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हाईकोर्ट: नगर निगम चुनावों में राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह हटाने की याचिका खारिज, कहा- याचिकाकर्ता के तर्को से नहीं सहमत
Mon, 18 Apr 2022 11:26 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: आकाश दुबे
Updated Mon, 18 Apr 2022 11:26 PM IST
सार
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने कहा कि वह याचिकाकर्ता अलका गहलोत के तर्को से सहमत नहीं है। जिसके चलते नगर निगम चुनावों के लिए मतपत्रों से चुनाव चिन्ह हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
उच्च न्यायालय ने सोमवार को नगर निगम चुनावों के लिए मतपत्रों से चुनाव चिन्ह हटाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने कहा कि वह याचिकाकर्ता अलका गहलोत के तर्को से सहमत नहीं है।
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याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नगरपालिका चुनावों के पीछे का उद्देश्य स्थानीय स्वशासन है, जिसे बैलेट पेपर पर राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्नों की उपस्थिति से छीन लिया जाता है। उनकी ओर से पेश वकील एचएस गहलोत ने कहा कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के मौजूदा प्रतीक वाले उम्मीदवार को दूसरे प्रतीक चिन्ह वाले उम्मीदवार पर अनुचित लाभ मिलता है। किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल द्वारा प्रायोजित उम्मीदवार को एक आरक्षित प्रतीक होने का लाभ होगा, जो समान अवसर होने के मूल सिद्धांत का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि निगम में राजनीतिक दलों के चिन्ह पर लड़ने का प्रावधान नहीं है।
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राज्य चुनाव आयोग के वकील सुमीत पुष्कर्ण ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश थे कि चुनाव के लिए प्रतीक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं और निरक्षरों को उनकी पसंद के उम्मीदवार से संबंधित होने में मदद करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न तो भारत के चुनाव आयोग और न ही किसी राजनीतिक दल को याचिका में पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने कहा कि यदि राजनीति पार्टी को चुनाव लड़ने से रोका जाता है और यदि याचिकाकर्ता का तर्क अच्छा है तो इसे अन्य सभी चुनावों पर भी लागू किया जाना चाहिए न कि केवल नगरपालिका चुनावों में। अदालत ने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार बहुत बार चुने जाते हैं।
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