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हाईकोर्ट में सरकार के तर्क पर 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर टली सुनवाई

Thu, 14 Jul 2016 03:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 14 Jul 2016 03:21 AM IST
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High Court defers hearing on the appointment of the 21 parliamentary secretaries
कोर्ट, न्यायालय - फोटो : file photo
दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति से संबंधित मामला चुनाव आयोग के पास लंबित है और बृहस्पतिवार को सुनवाई तय है। 
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अदालत ने इस तर्क के आधार पर संसदीय सचिवों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी है। दायर याचिका में इन नियुक्तियों को संविधान के खिलाफ बताते हुए तुरंत रद्द करने का आग्रह किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि आप विधायकों को
अयोग्य ठहराने के संबंध में याचिका दायर की गई थी। 

ऐसे में चुनाव आयोग में सुनवाई के ध्यानार्थ कम से कम चार सप्ताह बाद इस जनहित याचिका पर सुनवाई की जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 8 सितंबर तय की है।

सरकार ने कहा फिलहाल चुनाव आयोग में लंबित है मामला

High Court defers hearing on the appointment of the 21 parliamentary secretaries
केजरीवाल और सिसोदिया

हाईकोर्ट में खंडपीठ राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता रविंद्र कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में दिल्ली सरकार द्वारा संविधान का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। 

याचिका में रविंद्र कुमार ने तर्क रखा है कि संविधान के अनुच्छेद 239 में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि दिल्ली सरकार में मात्र सात ही मंत्री बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरकार ने 14 फरवरी 2015 को शपथ ग्रहण की, और मुख्यमंत्री सहित कुल सात मंत्री हैं।

सरकार ने संविधान का उल्लंघन कर हाल ही में 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त कर दिया। सरकार ने इन सभी को मंत्री पद का दर्जा प्रदान किया है जो सरासर तय नियमों व भारतीय संविधान के खिलाफ है। याची ने कहा कि सरकार द्वारा नियुक्त सभी संसदीय सचिवों की नियुक्ति को गैरकानूनी ठहराते हुए उनकी नियुक्ति के फैसले को रद्द किया जाए। 

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