1984 सिख विरोधी दंगा: हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, छावनी में हुए दंगे तब क्या कर रहा था सरकारी तंत्र
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1984 सिख विरोधी दंगों के दौरान सरकारी तंत्र क्या कर रहा था, जबकि यह दंगे दिल्ली छावनी इलाके में हुए थे। हाईकोर्ट ने यह सवाल सिख विरोधी दंगों के मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार व अन्य के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए उठाया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने कहा कि दंगों से जुड़े मामलों को उचित तरह से सुलझा गया होता तो आज इस मुद्दे पर सुनवाई नहीं चल रही होती। कोर्ट इस मामले में 19 जुलाई को आगे दलीलें सुनेगी।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी दिल्ली छावनी के राजनगर इलाके में एक नवंबर 1984 को पांच लोगों की हत्या से संबंधित मामले में अपील पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि उस समय सरकारी तंत्र क्या कर रहा था।
कोर्ट के समक्ष सज्जन कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने तर्क रखा कि जस्टिस नानावटी जांच आयोग ने सज्जन कुमार के खिलाफ इस मामले की दोबारा जांच की सिफारिश नहीं की थी।
दूसरी ओर, सीबीआई के अधिवक्ता डीपी सिंह व दंगा पीड़ितों के वकील एचएस फूलका ने दलील रखी कि जांच आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद संसद ने सज्जन कुमार के खिलाफ मामले की जांच दोबारा करने का फैसला किया था।
कोर्ट के समक्ष सज्जन कुमार ने कहा था कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भीड़ को भड़काने का उन पर कोई आरोप नहीं था। निचली अदालत ने इस मामले में सज्जन कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। दूसरी ओर पूर्व निगम पार्षद बलवान खोखर, कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल, महेंद्र यादव व कृष्ण खोखर को दोषी ठहराते हुए मई 2013 में सजा सुनाई थी।