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केजरीवाल केस : हाईकोर्ट ने पूछा- सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत के बाद इसे रद्द करने की मांग का क्या है औचित्य

Thu, 08 Aug 2024 06:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Aug 2024 06:30 AM IST
सार

न्यायालय ने कहा कि जब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी है तो उनकी जमानत रद्द करने वाली मांग याचिका का औचित्य क्या है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह अब केवल एक अकादमिक मुद्दा है। मामले में अगली सुनवाई अब पांच सितंबर को होगी। 

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High Court asked- What is the justification for demanding cancellation of interim bail from the Supreme Court?
Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत रद्द करने की याचिका दायर करने पर हाईकोर्ट ने आपत्ति जताई है। न्यायालय ने कहा कि जब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी है तो उनकी जमानत रद्द करने वाली मांग याचिका का औचित्य क्या है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह अब केवल एक अकादमिक मुद्दा है। मामले में अगली सुनवाई अब पांच सितंबर को होगी। 

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जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के वकील से पूछा कि अगर ईडी की याचिका को अनुमति दी जाती है तो क्या एजेंसी फिर से मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करेगी? मेरे सवाल का जवाब दें। अगर मैं आपकी याचिका को अनुमति देता हूं तो क्या होगा? क्या आप उन्हें फिर से गिरफ्तार करेंगे?  इस पर वकील ने कहा कि गिरफ्तारी का कोई सवाल ही नहीं है और किसी ने भी उनकी गिरफ्तारी को अवैध नहीं बताया है।
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जज ने यह भी कहा कि मामले में दायर आवेदन इतने खूबसूरती से तैयार किए गए है कि वह भ्रमित हो गईं। क्या यह जमानत अवैध हिरासत या मुआवजे के लिए है? मैं भ्रमित हूं । उन्होंने कहा 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी थी और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता के पहलू पर तीन सवालों पर गहन विचार के लिए मामले को एक बड़ी बेंच को भेज दिया था। 
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लेकिन वह अभी भी जेल में हैं, क्योंकि वह एक्साइज घोटाले से जुड़े केंद्रीय जांच ब्यूरो के भ्रष्टाचार मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। शुरुआत में ईडी के वकील ने अदालत से स्थगन देने और मामले की सुनवाई गुरुवार को करने का आग्रह किया, क्योंकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जिन्हें मामले पर बहस करनी है और वह दूसरी अदालत में व्यस्त हैं। न्यायाधीश ने कहा कि मामले को गुरुवार के लिए सूचीबद्ध करना संभव नहीं है।

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