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हाईकोर्ट ने एमसीडी से पूछा, किस कानून के तहत मीट उत्पाद विक्रेताओं पर लगाया प्रतिबंध
Sun, 21 Jul 2019 09:38 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 21 Jul 2019 09:38 PM IST
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delhi high court
- फोटो : PTI
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम से सवाल किया है किस कानून के तहत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को मीट या मीट के उत्पाद बेचने के लिए लाइसेंस लेने की आवश्यकता है। इस मामले में पीठ ने निगम की खिंचाई की है।
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न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने मामले की सुनवाई के दौरान उत्तरी-दिल्ली नगर निगम से पूछा कि कौन सा कानून है जो किसी रेहड़ी-पटरी विक्रेता को लाइसेंस के बिना मांस बेचने से मना करता है? कौन सा कानून आपको (निगम) इसे प्रतिबंधित करने का अधिकार देता है? पीठ ने कहा कि इस संबंध में निगम की कोई नीति नहीं है। इस दौरान निगम की ओर से पेश वकील मोनिका अरोड़ा ने अदालत के समक्ष इस संबंध में कानून पेश करने के लिए समय मांगा। जिस पर अदालत ने 22 जुलाई तक का समय दिया है।
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यह याचिका दिल्ली के महेंद्रा पार्क इलाके में रेहड़ी-पटरी पर मीट या मीट के उत्पाद बेचने वाले विक्रताओं के संगठन की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि उन्हें निगम की ओर से स्ट्रीट वेंडिंग अधिनियम के तहत सर्टिफिकेट प्राप्त है, इसके बावजूद उन्हें हटाया गया है। उन्होंने मांग की कि इस संबंध में सर्वे कराया जाए और मीट व मीट के उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने के लिए उचित कानून बनाया जाए। इसके बाद ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाए। वहीं निगम की ओर से दलील दी गई कि रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की तादाद ज्यादा होने की वजह से आम लोगों को परेशानी हो रही थी और ये विक्रेता गंदगी में मीट व मीट के उत्पाद बेच रहे थे। इसी आधार पर निगम ने कार्रवाई की।
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