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हाईकोर्ट ने नोटबंदी के बाद हुए साढ़े सात करोड़ के लेनदेन पर मांगी रिपोर्ट

Sun, 13 Oct 2019 05:44 AM IST
Mohit Mudgal धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज बेनीवाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 13 Oct 2019 05:44 AM IST
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High court ask report on transaction of seven and a half crores after demonetization
file photo - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने 8 नवंबर 2016 में नोटबंदी के दो दिन बाद हुए संपत्ति सौदे में साढ़े सात करोड़ के लेनदेन पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता का आरोप है कि इस लेनदेन के लिए साढ़े सात करोड़ के पुराने नोटों का इस्तेमाल किया गया था, जबकि पीएम मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को एक हजार व पांच सौ रुपये के पुराने नोट बंद कर दिए थे। मामला पूर्वी पंजाबी बाग की एक संपत्ति से जुड़ा है।

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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने अधिवक्ता गगन गांधी की याचिका पर आर्थिक अपराध शाखा से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। याची गगन गांधी का आरोप है कि संपत्ति की खरीद के लिए साढ़े सात करोड़ रुपये से ज्यादा के पे ऑर्डर तैयार करवाए गए थे और इसके लिए पुराने नोटों का इस्तेमाल किया गया था। इसकी जांच करने का निर्देश दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की गई है।
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याची का दावा है कि पूर्वी पंजाबी बाग की यह संपत्ति उनके नाना ने 1985 में उनकी नानी के नाम ट्रांसफर की थी। याची के नाना की 1986 तथा नानी की 1991 में मृत्यु हो गई थी। इस संपत्ति में याची की मां अमृत कौर का भी हिस्सा था, लेकिन इसका बंटवारा नहीं हुआ था। यह संपत्ति 1991 से 1999 तक खाली थी। इसके बाद याची का मौसेरा भाई इस संपत्ति में रहने लगा था।
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याची की मां ने 2010 में अपने पिता की वसीयत के परीक्षण के लिए तीस हजारी अदालत में अर्जी दायर की थी। यह मामला कई साल तक चलता रहा। इसकी सुनवाई के दौरान याची के मौसेरे भाई ने 11 नवंबर, 2016 को किसी बंसल परिवार को यह संपत्ति 7.56 करोड़ में बेच दी थी। इस संपत्ति को बेचने में लिए साढ़े सात करोड़ के पे ऑर्डर चांदनी चौक स्थित बैंक ऑफ इंडिया से तैयार करवाए गए थे।


याची ने बैंक से आरटीआई में जानकारी मांगी। याची का आरोप है कि बैंक ने यह तो बताया कि साढ़े सात करोड़ के पे ऑर्डर बनाए गए थे, लेकिन यह नहीं बताया कि यह पे ऑर्डर किसी बैंक खाते को डेबिट कर बनाए गए थे या इसके लिए नकद राशि दी गई थी। इस मुद्दे पर बैंक का विजिलेंस विभाग भी कुछ कहने को तैयार नहीं हुआ। इसकी शिकायत याची ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में अप्रैल 2018 में दी थी। पुलिस ने जब इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की, तो याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

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