ये है भारत से अफगानी कैंप पहुंचने वाली गुरप्रीत की असल कहानी
जर्मनी के शरणार्थी कैंप में फंसी गुरप्रीत को मवई रोड निवासी मकान मालिक अजय ने खोज निकाला। जर्मनी जाने से पहले वह अजय के यहां ही किराए पर रह रही थी।
शरणार्थी कैंप से गुरप्रीत ने किसी के फोन से मदद की वीडियो बनाकर अजय को वाट्सएप की थी। उसकी मदद की गुहार को अजय ने ही सोशल मीडिया तक पहुंचाया।
मामला संज्ञान में आने के बाद अब भारत सरकार गुरप्रीत को वापस लाने की तैयारियां कर रही है। गुरप्रीत का विवाह 2005 में दिल्ली में रहने वाले मनोज से हुआ था।
परिजनों के मुताबिक 2010 में मनोज पत्नी और करीब दो साल की बच्ची को छोड़कर लापता हो गया था। पति के गायब होने के बाद गुरप्रीत अजय के यहां किराए पर रहने लगी और नौकरी कर परिवार चला रही थी।
एजेंट ने गुरप्रीत को पहुंचाया अफगान शरणार्थी कैंप
जुलाई 2015 में गुरप्रीत ने ससुरालियों के खिलाफ भरण पोषण का केस दायर किया था। ससुरालियों ने गुरप्रीत को बताया कि उसका पति मनोज और सास-ससुर जर्मनी में रह रहे हैं।
शर्त रखी गई कि यदि गुरप्रीत भरण-पोषण का केस वापस ले तो ससुराली उसे पति के पास जर्मनी पहुंचवा देंगे। सितंबर 2015 में गुरप्रीत ने केस वापस ले लिया।
इसके बाद ससुरालियों ने उसे एजेंट के जरिए जर्मनी भिजवा दिया। अजय के मुताबिक जर्मनी में एजेंट गुरप्रीत को अफगानियों के लिए बनाए गए शरणार्थी कैंप के पास ले गया।
दूसरे के स्मार्टफोन पर बनाया खुद का वीडिया
यहां उसको समझाया कि वह खुद को अफगानिस्तान का रहने वाला बताए। एजेंट उसका पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज लेकर चला गया। कैंप में बुरी हालत में जिंदगी बिता रही गुरप्रीत के पास अजय का वाट्सएप नंबर था।
उसने किसी के स्मार्टफोन से मदद की वीडियो बनाई और अजय को वाट्सएप कर दी। अजय ने उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर डाल दिया।
अजय ने बताया कि मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा ने गुरप्रीत को जल्द ही वापस बुलवाने का आश्वासन दिया है। इस संबंध में केंद्र सरकार ने कार्रवाई भी शुरू कर दी है।