Delhi: सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड में दंड पर सुनवाई 7 नवंबर को, कोर्ट ने हफ्ते भर में सजा पूर्व रिपोर्ट मांगी
दोषियों के वकीलों ने दावा किया कि वे आवश्यक हलफनामा तैयार करने में असमर्थ है, क्योंकि उनके पास आवश्यक विवरण नहीं है। साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे ने अब दोषियों की सजा तय करने के लिए सुनवाई 7 नवंबर तय की है।
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अदालत ने दिल्ली सरकार को पत्रकार सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड में सजा से पूर्व रिपोर्ट पेश करने के लिए एक परिवीक्षाधीन अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, दोषियों के वकीलों ने दावा किया कि वे आवश्यक हलफनामा तैयार करने में असमर्थ है, क्योंकि उनके पास आवश्यक विवरण नहीं है। साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे ने अब दोषियों की सजा तय करने के लिए सुनवाई 7 नवंबर तय की है। विश्वनाथन की सितंबर 2008 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
डीएलएसए सचिव पहले ही पीड़ित प्रभाव रिपोर्ट दाखिल कर चुके हैं। हालांकि, दोषियों की ओर से शपथ पत्र के अभाव में डीएलएसए की ओर से दोषियों से संबंधित रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने मामले में कोर्ट में दोषियों की संपत्ति और जेल में उनके बर्ताव को लेकर हलफनामा दाखिल किया।
दोषी के वकीलों ने संयुक्त रूप से कहा कि वे हलफनामा तैयार करने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि हलफनामे के लिए आवश्यक विस्तृत विवरण उनके पास उपलब्ध नहीं है। सुनवाई के दौरान दोषी अजय कुमार और अमित शुक्ला ने कहा कि वे निर्दोष हैं। कोर्ट ने कहा कि आपको फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। अजय कुमार ने कहा कि इसमें वे 15 साल से जेल में हैं जबकि डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के अलावा कोई सबूत नहीं है।
इससे पहले 18 अक्टूबर को साकेत कोर्ट ने चारों आरोपियों रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक और अजय कुमार को आईपीसी की धारा 302, 34 और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की धारा 3(1)(I) के तहत हत्या के अपराध में दोषी ठहराया था। पांचवें आरोपी अजय सेठी को आईपीसी की धारा 411 और मकोका की धारा 3 (2) और 3 (5) के तहत चोरी की संपत्ति रखने के अपराध में दोषी ठहराया गया है। अजय सेठी को हत्या के अपराध से मुक्त कर दिया गया।