Excise Policy Case: केजरीवाल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, CBI को कोर्ट का नोटिस; 17 जुलाई को सुनवाई
दिल्ली सीएम ने सीबीआई की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एक जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को इस मामले में 26 जून को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं।
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हाईकोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से दायर जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री से भी पूछा कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट में गए बिना सीधे इस कोर्ट का रुख क्यों किया।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने सीबीआई को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान केजरीवाल की ओर से पेश अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामले की सुनवाई करने का अधिकार हाईकोर्ट को है। उन्हीं की ओर से पेश वकील विक्रम चौधरी ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41ए (बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले उसे नोटिस देना) का उल्लंघन किया गया है। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि 41ए का उल्लंघन नहीं किया गया है, इसलिए हम कह रहे हैं कि निचली अदालत जाना निरर्थक होगा।
सिंघवी ने कहा कि जमानत देने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45, सीबीआई मामले में लागू नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कानून तय कर दिया है। इसमें पीएमएलए की धारा 45 शामिल नहीं है। सीबीआई की ओर से पेश वकील डीपी सिंह ने जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, जमानत के लिए पहली अदालत ट्रायल कोर्ट होनी चाहिए थी। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
दिल्ली सीएम ने सीबीआई की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एक जुलाई को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 26 जून को सीबीआई द्वारा केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट ने केजरीवाल को तीन दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया था। जिसके बाद 29 जून को केजरीवाल को कोर्ट ने 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
सीबीआई से पहले इसी मामल में ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में लंबी पूछताछ के बाद सीएम केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। ईडी की भी गिरफ्तारी को भी सीएम केजरीवाल ने कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित है।
क्या है कथित शराब नीति घोटाला?
कोरोना काल के बीच दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने 'दिल्ली आबकारी नीति 2021-22' लागू की थी। इस शराब नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की शिकायतें आईं जिसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके साथ ही दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 सवालों के घेरे में आ गई। हालांकि, नई शराब नीति को बाद में इसे बनाने और इसके कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था।
जांच कैसी शुरू हुई?
सीबीआई ने अगस्त 2022 में इस मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ नियमों के कथित उल्लंघन और नई शराब नीति में प्रक्रियागत गड़बड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की। बाद में सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के संबंध में ईडी ने पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले की जांच शुरू कर दी।
ईडी और सीबीआई दिल्ली सरकार की नई शराब नीति में कथित घोटाले की अलग-अलग जांच कर रही हैं। ईडी नीति को बनाने और लागू करने में धन शोधन के आरोपों की जांच कर रही है। वहीं, सीबीआई की जांच नीति बनाते समय हुई कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।