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किसान आंदोलनः गुरु के लंगर में सेवा के साथ सेहत का भी रखा जा रहा है ध्यान

Sun, 27 Dec 2020 05:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 27 Dec 2020 05:36 AM IST
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Health is being taken care of along with service in Gurus langar
लंगर में... - फोटो : amar ujala

सिंघु बॉर्डर पर प्रवेश करते ही सबसे बड़े मशहूर गुरु के लंगर में आंदोलनरत किसानों के लिए प्रतिदिन न सिर्फ प्रसाद के रूप में खाना तैयार किया जाता है बल्कि रोजाना मेन्यू भी बदल जाता है। सेहत के मामले में यहां कोई लापरवाही नहीं बरती जाती है। पौष्टिकता से परिपूर्ण प्रसाद ग्रहण करने के लिए यहां भीड़ लगी रहती है और हर वर्ग प्रसाद ग्रहण करता है।

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गुरु के लंगर का संचालन करने वाले बाबा अमरीक सिंह ने बताया कि सुबह 6 बजे से लंगर शुरू हो जाता है। इसमें सुबह चाय और ब्रेड पकोड़े बनाए जाते हैं। इसके बाद सुबह 8:30 बजे पूड़ी छोले नाश्ते के रूप में बनते हैं। 10:00 बजे तक सब्जियों को भी तैयार कर लिया जाता है।
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24 घंटे चाय-पकौड़ी
खास बात यह है कि यहां 24 घंटे चाय के साथ बिस्किट, पकौड़ी आदि चीजें मिलती हैं। रात में भी यहां खाने का इंतजाम रहता है। सेहत का ध्यान रखते हुए यहां हर दिन अलग-अलग तरह की सब्जियां बनाई जाती हैं, ताकि किसानों को पौष्टिक आहार मिलता रहे।
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मेन्यू पर एक नजर
सप्ताह में आलू, गोभी, मटर, कड़ी, पनीर, बेसन की सब्जी, सफेद छोले, काले चने व विभिन्न प्रकार की दाल बनाई जाती हैं। कभी-कभी इन सभी सब्जियों मिक्स करके भी बनाया जाता है। इसके अलावा मीठे और फीके चावल भी लोगों की पसंद को देखते हुए बनाए जाते हैं। प्रतिदिन खीर भी लोगों को पसंद आ रही है।

घी वाले चावल मनपसंद
गुरु के लंगर में घी वाले चावल लोगों को सबसे अधिक पसंद आ रहे हैं। इन चावलों में गाजर, मटर व आलू के साथ घी डालकर बनाया जाता है। एक बड़ा पतीला भरकर चावल में करीब एक कनस्तर घी डाला जाता है। गुरु के लंगर में मौजूद सेवादारों ने बताया कि चावलों की सबसे अधिक खपत होती है। एक दिन में करीब 800 किलो चावल बनाए जाते हैं।


प्रतिदिन 35 हजार लोग चख रहे लंगर
बाबा अमरीक सिंह ने बताया कि गुरु का लंगर में तैयार होने वाले प्रसाद को प्रतिदिन 30 से 35 हजार डिस्पोजेबल प्लेट में परोसा जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन इतने लोग खाने के लिए पहुंचता है। वहीं, सेवा भाव ग्रुप से हरियाणा और दिल्ली से भी लोग घी के कनस्तर, चावल के कट्टे व आटा आदि लेकर यहां पहुंच रहे हैं। लंगरघर में 15 से 20 लोग सेवा करते हैं। साथ ही बाहरी लोग भी यहां सेवा करने आते हैं।

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