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सेहत: आरएमएल में मानक पर खरी नहीं उतरी 10 दवाओं की खेप वापस, एंटी रेबीज खत्म; जीटीबी में गायनी क्लिनिक शुरू
Sun, 04 Oct 2026 01:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 04 Oct 2026 01:15 AM IST
सार
अस्पताल प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों और वार्डों को इन दवाओं का इस्तेमाल तत्काल रोकने और प्रभावित खेप को ड्रग यूनिट में वापस जमा करने के निर्देश दिए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली 10 दवाओं की खेप वापस मंगा ली गई है। इनमें दौरे, हृदय रोग, अवसाद, तेज धड़कन और प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों और वार्डों को इन दवाओं का इस्तेमाल तत्काल रोकने और प्रभावित खेप को ड्रग यूनिट में वापस जमा करने के निर्देश दिए हैं।
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अस्पताल की ओर से 7 से 14 सितंबर के बीच जारी नोटिस में इन दवाओं के संबंध में निर्देश दिए गए। नोटिस के अनुसार, सोडियम वैल्प्रोएट 200 मिलीग्राम, स्पिरोनोलैक्टोन 50 मिलीग्राम और इमिप्रामाइन 25 मिलीग्राम की गोलियां गुणवत्ता जांच में निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
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इसी अवधि में पांच तरह के इंजेक्शन की खेप भी वापस लेने के निर्देश दिए गए। इनमें एडेनोसिन, मिथाइल एर्गोमेट्रिन, मल्टीविटामिन, फेनिरामाइन मैलिएट और एस्कॉर्बिक एसिड इंजेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा, आइसोसॉर्बाइड मोनोनेट्रेट 20 मिलीग्राम की कुछ गोलियां स्ट्रिप के अंदर पाउडर के रूप में मिलने की शिकायत सामने आई। इसका बैच नंबर एबीटी6711 है। अस्पताल ने संबंधित विभागों को इस बैच का इस्तेमाल रोककर दवाएं वापस जमा कराने को कहा। मेटोप्रोलोल 50 मिलीग्राम के बैच एबीटी6608 की गोलियां भी स्ट्रिप के अंदर पाउडर के रूप में मिलने की शिकायत सामने आई। इसके बाद इस खेप को भी वापस मंगा लिया गया।
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अलग-अलग बीमारियों के इलाज में होती हैं इस्तेमाल
सोडियम वैल्प्रोएट का इस्तेमाल दौरे की बीमारी के इलाज में, जबकि स्पिरोनोलैक्टोन हृदय संबंधी समस्याओं और शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने की स्थिति में किया जाता है। मेटोप्रोलोल का इस्तेमाल ब्लड प्रेशर और हृदय रोग के इलाज में होता है। एडेनोसिन कुछ मामलों में तेज धड़कन को नियंत्रित करने के लिए दिया जाता है। वहीं, मिथाइल एर्गोमेट्रिन का इस्तेमाल प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव को नियंत्रित करने में किया जाता है।
मरीज में दवा से जुड़ी परेशानी की भी जानकारी देने को कहा
आरएमएल अस्पताल प्रशासन के अनुसार, गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रभावित दवाओं को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। संबंधित विभागों को दवाओं का इस्तेमाल रोकने के साथ ही किसी मरीज में दवा से जुड़ी परेशानी सामने आने पर इसकी जानकारी देने को कहा गया है।
एक माह से एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म, घायल आरएमएल हो रहे रेफर
करोलबाग स्थित दिल्ली सरकार के डॉ. एनसी जोशी मेमोरियल अस्पताल में एक महीने से अधिक समय से एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके चलते कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचने वाले घायलों को दूसरे अस्पतालों में भेजा जा रहा है। ज्यादातर को टीकाकरण के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है।
अस्पताल परिसर में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने की सूचना भी चस्पा की गई है। इमरजेंसी के गेट पर दो जगह लगाए गए पोस्टर में कुत्ते के काटने का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है। पोस्टर पर आदेश की तारीख 25 अगस्त दर्ज है। इसके अलावा पंजीकरण काउंटर पर भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने संबंधी सूचना लगाई गई है।
शनिवार को कुत्ते के काटने के बाद एक युवक दोपहर करीब साढ़े 12 बजे देशबंधु गुप्ता मार्ग से टीकाकरण के लिए अस्पताल पहुंचा। हालांकि, वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे वापस भेज दिया गया और आरएमएल अस्पताल में टीकाकरण कराने की सलाह दी गई।
वैक्सीन की कमी को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। हालांकि, एक अधिकारी ने इतना जरूर स्वीकार किया कि यदि अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने का पोस्टर लगाया गया है तो इसका मतलब है कि फिलहाल वैक्सीन नहीं है।
रोजाना औसतन 1500 से अधिक मामले आते हैं अस्पतालों में
बता दें कि दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में रोजाना औसतन 1500 से अधिक लोग कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचते हैं। अकेले सफदरजंग अस्पताल में प्रतिदिन 700-800 लोग आते हैं। वहीं, अन्य अस्पतालों में रोजाना करीब 100-150 लोग पहुंचते हैं। आरएमएल अस्पताल में भी प्रतिदिन करीब 150-220 लोग टीकाकरण के लिए पहुंच रहे हैं।
जीटीबी अस्पताल में गायनी कैंसर क्लिनिक शुरू
गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में महिलाओं को कैंसर की जांच, विशेषज्ञ सलाह और इलाज की सुविधा अब एक ही जगह मिल सकेगी। अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में विशेष गायनी ऑन्कोलॉजी क्लिनिक शुरू की गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार क्लिनिक हर बुधवार दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक चलेगी। मरीज गायनी ओपीडी के कमरा नंबर 703 में इस सुविधा का लाभ ले सकती हैं।
क्लिनिक में महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर की जांच और इलाज किया जाएगा। इनमें सर्वाइकल कैंसर, गर्भाशय कैंसर, अंडाशय का कैंसर और बाह्य जननांग (वल्वल) कैंसर शामिल हैं। इसके अलावा सर्वाइकल और स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में होने पर समय पर उपचार शुरू करना संभव होता है। इस पहल से शाहदरा, दिलशाद गार्डन, सीमापुरी और आसपास के इलाकों की महिलाओं को लाभ मिलेगा। उन्हें जांच और विशेषज्ञ सलाह के लिए दूर के अस्पतालों में जाने की जरूरत कम होगी।