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Delhi AIIMS: एम्स में बदले जाएंगे विभागाध्यक्ष, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्ताव पर दी अंतिम मंजूरी

Fri, 21 Jul 2023 11:02 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 21 Jul 2023 11:02 PM IST
सार

एक अधिकारी ने कहा कि अब एम्स में राजनीति की नहीं बल्कि सुधार की जरूरत है। इस फैसले के बाद एम्स में कई तरह की चर्चा या फिर विवाद शुरू हो सकता है लेकिन प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों ने उससे निपटने के विकल्पों पर पहले ही विचार कर लिया है।

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Head of Department will be changed in AIIMS Union Health Ministry gave final approval on the proposal
एम्स - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली एम्स में जल्द ही विभागाध्यक्षों में फेरबदल देखने को मिलेगा। शुक्रवार की शाम केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स के छह माह पुराने प्रस्ताव पर अंतिम मंजूरी दी है। इसी के साथ ही अब एम्स प्रबंधन विभागाध्यक्षों को लेकर रोटेशन प्रणाली लागू कर सकेगा।

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जानकारी मिली है कि इस प्रणाली के लागू होते ही एम्स के मौजूदा विभागाध्यक्षों को अपने पदों से हटना होगा। हालांकि उसी विभाग में उनकी सेवाएं आगे जारी रहेगीं लेकिन विभाग के अन्य प्रोफेसर को कुछ कुछ अवधि के लिए अध्यक्ष बनने का मौका मिलेगा। इसका एक लाभ यह भी होगा कि हर किसी को प्रशासनिक स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर भी रहेगा। साथ ही एम्स के विभागों को नई सोच के साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ समय पहले एम्स के निदेशक डॉ. श्रीनिवास की पहल पर विभागाध्यक्षों को लेकर रोटेशन प्रणाली लागू करने की अनुमति मांगी गई। इस पर काफी गहन विचार किया। साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के साथ बैठक के बाद मंजूरी दी गई है।

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वहीं एम्स प्रबंधन के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि लिखित तौर पर मंत्रालय से अनुमति मिली है। जल्द ही एम्स रोटेशन प्रणाली को लेकर आधिकारिक निर्देश भी जारी करेगा। इसके बाद विभागाध्यक्षों की सूची तैयार होगी और फिर नए चेहरे सामने आएंगें। हालांकि नए चेहरे कितने दिन तक विभाग की कमान संभाल सकते हैं? इसके बारे में अभी ठोस जानकारी नहीं है लेकिन एम्स के सूत्रों का कहना है कि कम से कम अभी जिस विभाग में जितने प्रोफेसर होंगे, उनके बीच एक साल का कार्यकाल बराबर महीनों में बांटा जा सकता है। इसके बाद रोटेशन प्रणाली पूरी तरह से लागू होगी क्योंकि समिति ने भी सिफारिश की है कि फिलहाल कॉलेजियम के आधार पर ही विभागाध्यक्षों का चयन किया जाए।

अब राजनीति नहीं, सुधार की जरूरत
एक अधिकारी ने कहा कि अब एम्स में राजनीति की नहीं बल्कि सुधार की जरूरत है। इस फैसले के बाद एम्स में कई तरह की चर्चा या फिर विवाद शुरू हो सकता है लेकिन प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों ने उससे निपटने के विकल्पों पर पहले ही विचार कर लिया है। एम्स में हमेशा से ही विभागाध्यक्ष को लेकर विवाद की स्थिति देखने को मिलती है। कई बार चंद दिन का अंतर होने पर दो पक्ष नियुक्ति के खिलाफ कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई घटनाएं देखने को मिली हैं।

पिछले साल से चल रही कवायद
जानकारी के अनुसार, एम्स में प्रशासनिक तौर पर कई बड़े बदलावों की पहल पिछले साल से चल रही है। विभागाध्यक्षों के रोटेशन की मांग लंबे समय से चल रही है जिसे लेकर एम्स ने एक समिति का गठन भी किया।

इसमें नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल, पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व निदेशक डॉ. के के तलवार, डॉ. जगत राम, एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. एम सी मिश्रा, आईसीएमआर के पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. वी एम कटोच और आईआईटी कानपुर के निदेशक डॉ. अभय करंदीकर शामिल किया गया।

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