किराया मांगा तो बोली कि मेरे साथ गंदी हरकत की कोशिश की
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अदालत ने किरायेदार महिला से रेप का प्रयास करने के आरोप में मकान मालिक को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सभी साक्ष्य देखने के बाद वे महसूस करते हैं कि पूरा मामला छलपूर्ण है और महिला के बयान भी विश्वसनीयता पूर्ण नहीं है।
ऐसे में आरोपी बरी होने का हकदार है। द्वारका अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेन्द्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि बयानों के दौरान महिला अपना बयान बार-बार बदलती रही है ऐसे में उसके बयानों को भरोसेमंद व विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि महिला पर विश्वास करना आपराधिक कानून के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
नहीं दिया था 2014 से किराया
दूसरी तरफ आरोपी पुष्पेंद्र ने अदालत को बताया कि महिला व उसका पति सितंबर 2014 को किराये पर रहने के लिए आए थे और तभी से बिजली बिल व किराया अदा नहीं कर रहे थे।
किराये से बचने के लिए ही महिला ने पति के इशारे पर उसके खिलाफ रेप के प्रयास का झूठा मामला दर्ज करवा दिया। अदालत ने कहा कि पूरा मामला छलपूर्ण प्रतीत होता है ऐसे में वे आरोपी को बरी करते हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 14 अक्तूबर 2014 को महिला घर पर अकेली थी और उसका पति बाहर गया हुआ था। उसी दौरान आरोपी ने रेप का प्रयास किया। महिला ने दावा किया गया कि वह आरोपी के चंगुल से किसी तरह निकल कर घर से बाहर आ गई थी।