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हेट स्पीच मामलाः दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति ने फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष को भेजा समन

Sat, 12 Sep 2020 02:11 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 12 Sep 2020 02:11 PM IST
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Hateful content: Delhi Assembly panel summons Facebook india official ajit mohan, delhi peace and harmony committee
राघव चड्ढा - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सदभाव समिति ने फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजीत मोहन को बुलाने का फैसला लिया है। पिछली कार्यवाही के दौरान गवाहों की तरफ से सौंपे गए साक्ष्य और रिकाॅर्ड सामग्री की जांच के बाद राघव चड्ढा की अध्यक्षता में समिति ने फेसबुक पर लगाए गए गंभीर आरोपों की सत्यता का पता लगाने के लिए ये फैसला लिया है। समिति ने अजीत मोहन को 15 सितंबर को होने वाली कार्यवाही में उपस्थित रहने के लिए औपचारिक नोटिस भेजा है। इस दौरान समिति कुछ और प्राप्त शिकातयों की जांच भी करेगी। 

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उल्लेखनीय है कि राघव चड्ढा की अध्यक्षता वाली शांति एवं सद्भाव समिति ने प्रथम दृष्टया गवाहों की तरफ से पेश किए गए रिकॉर्ड और अपराध को बढ़ावा देने वाली सामग्री के आधार पर फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों में फेसबुक की मिलीभगत पाई है और साथ ही, समिति के समक्ष गवाहों ने तीखे बयान भी दिए हैं।
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इसके अलावा समिति ने एक स्वतंत्र जांच की जरूरत का भी आग्रह किया है, ताकि कथित जांच के दौरान सहायक और पुष्ट सामग्री के आधार पर दिल्ली दंगों से संबंधित चल रहे केस में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया जा सके। समिति ने अपनी पिछली कार्यवाही में कई विशेषज्ञों के साथ-साथ स्वतंत्र गवाहों की अच्छी तरह से जांच भी की गई है।
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गवाह अवधेश तिवारी ने अपने बयान में बल देकर कहा था कि फेसबुक की मिलीभगत न केवल दिल्ली दंगों को भड़काने तक सीमित है, बल्कि बहुत लंबे समय से अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ लगातार नफरत को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने समिति के समक्ष जोर देकर कहा था कि फेसबुक अनिवार्य रूप से अपने प्लेटफार्म पर घृणा फैलाने वाले और विभाजनकारी सामग्री को बढ़ावा देता है, लेकिन साथ ही जानबूझ कर अपने प्लेटफार्म पर ऐसी सामग्री की दृश्यता कम कर देता है या हटा देता है, जिसका उद्देश्य समुदायों के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ावा देना है।

उन्होंने यह भी दावा किया था कि दिल्ली विधानसभा के चुनाव से ठीक पहले दिल्ली शहर की शांति और सौहार्द को बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश को नाकाम किया गया था। उन्होंने अंखी दास और सत्तारूढ़ व्यवस्था के बीच मजबूत गठजोड़ का भी आरोप लगाया था और साथ ही इससे संबंधित कुछ साक्ष्य और सहायक सामग्री भी सौंपी थी।

एक स्वतंत्र पत्रकार और शोधकर्ता कुणाल पुरोहित ने बताया था कि सत्तारूढ़ व्यवस्था और फेसबुक के बीच व्यवसायिक लेन-देन है और सरकारी सहयोग के बीच हितों का स्पष्ट टकराव है, जिसके कारण फेसबुक सत्तारूढ़ व्यवस्था के पक्ष में प्रदर्शित सामग्री पर अपनी प्रतिबंधात्मक नीतियों को लागू करने से बचता है।

उन्होंने बल देकर यह भी कहा था कि दिल्ली के दंगों से पहले, व्हाट्सएप पर जो कुछ भी हुआ, वह पूर्व नियोजित और पूर्व निर्धारित तरीके से कुछ समुदाय के खिलाफ घृणा पैदा करने और नफरत फैलाने के लिए किया गया था, जो धीरे-धीरे पूरे फेसबुक पर भी फैल गया। गवाह ने यह भी बयान दिया था कि मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था फेसबुक प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा पैसे खर्च करती है।

गौरतलब है कि गुहा ने अपने बयान में स्पष्ट कहा था कि फेसबुक प्लेटफॉर्म कथित तौर पर नास्तिक और कंटेंट न्यूट्रल नहीं है, जितना कि वह दावा करता है। उन्होंने बयान दिया था कि इसे लेकर पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं, जो सत्तारूढ़ व्यवस्था और फेसबुक के बीच एक कथित सांठगांठ प्रदर्शित करता है और विरोधाभासी कथनों को कथित तौर पर दबाने की जगह उसे आगे बढ़ावा देता है, जबकि सत्तारूण व्यवस्था की आलोचना वाली सामग्री की दृश्यता को कम कर देते हैं, जो फेसबुक की कथित जटिलता को उजागर करते हैं।

इसके अलावा, यह भी सर्वसम्मति से बयान दिया गया कि उनकी कथित जटिलता और भूमिकाओं का पता लगाने के साथ फेसबुक के कथित दोषी अधिकारियों की भूमिका और मिलीभगत का पता लगाने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि दिल्ली दंगों में फेसबुक की भूमिका का पता लगाया जा सके।

दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति के अध्यक्ष राघव चड्ढा को संबोधित कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसमें आरोप लगाया है कि अपनी व्यापक नीतियों और विनियमों के बावजूद, फेसबुक अपने प्लेटफार्म पर बड़े पैमाने पर घृणित और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली सामग्री के विनिर्माण और प्रचार को रोकने में असफल है और इसे लेकर अपनी आंखें बंद किए हुए है, जो सामग्री न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि उसमें हिंसा और दंगा जैसी स्थिति को पैदा करने की क्षमता हैं।

शिकायतों और इसके संभावित नतीजों को लेकर लगाए गए आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सद्भाव समिति ने मजबूती के साथ इस मुद्दे के समाधान करने का फैसला किया था।

साथ ही समिति ने देश भर में कहर बरपाने की संभावना, विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शांति व सद्भाव को भंग करने और सांप्रदायिक वैमनस्यता को बढ़ावा देने की किसी भी गहरी साजिश और सांठगांठ का पता लगाने का फैसला किया था। इसी उद्देश्य से समिति ने यह कार्यवाही शुरू की है और इस मुद्दे को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए तेजी के साथ काम कर रही है।

प्रासंगिक है कि इस मामले को सार्वजनिक महत्व का अधिक होने की वजह से समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा ने पूरी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग करने का फैसला लिया है, ताकि इसकी पारदर्शिता को सुनिश्चित किया जा सके और इस कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए मीडिया को भी आमंत्रित किया गया है।

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