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यौन उत्पीड़न मामला: बृजभूषण सिंह के बरी होने के खिलाफ 28 सितंबर को सुनवाई, महिला पहलवानों ने दायर की थी अपील

Sat, 26 Sep 2026 11:48 AM IST
अनुज कुमार एएनआई, दिल्ली
एएनआई, दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 26 Sep 2026 11:48 AM IST
सार

राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने के आदेश के खिलाफ 28 सितंबर को सुनवाई होगी। महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में याचिका दायर की थी। 

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harassment case Hearing on September 28 against order acquitting Brij Bhushan singh
बृजभूषण शरण सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृज भूषण शरण सिंह की बरी के खिलाफ अपील 28 सितंबर को सूचीबद्ध की है। यह मामला महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। आज संबंधित न्यायाधीश न्यायिक प्रशिक्षण पर थे।

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यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह के दोषमुक्त के खिलाफ चार महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। यह मामला देश की कई शीर्ष महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से संबंधित है। इन आरोपों के बाद देश भर में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। 
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जानकारी के लिए बता दें कि मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। महिला पहलवानों ने सह-अभियुक्त विनोद तोमर की बरीगी को भी चुनौती दी है।
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पहलवानों का कहना था कि ट्रायल कोर्ट का आदेश अनुमानों और अटकलों पर आधारित है तथा इसमें यौन उत्पीड़न पीड़िताओं के अपेक्षित व्यवहार को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि अदालत ने छोटे-मोटे महत्वहीन विसंगतियों पर ध्यान केंद्रित कर पूरे मामले को खारिज कर दिया, जबकि गवाहों के बयानों से इसकी पुष्टि होती थी। 

मामला छह महिला पहलवानों द्वारा सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 15 जून 2023 को पुलिस ने आईपीसी की धारा 354 (शालीनता भंग), 354ए (यौन रंग के टिप्पणी), 354डी (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। ट्रायल कोर्ट ने 10 मई 2024 को सिंह पर पांच महिला पहलवानों के उत्पीड़न के आरोप तय किए थे। हालांकि 3 अगस्त 2026 को ट्रायल कोर्ट ने सिंह और तोमर दोनों को बरी कर दिया।


ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि मामला “झूठा और गढ़ा हुआ” तथा “राजनीतिक रूप से” प्रेरित प्रतीत होता है। अदालत ने टिप्पणी की थी कि आरोप रटी-रटाई, अभ्यास किए हुए और थोपे हुए लगते हैं, खासकर जब शिकायतें लंबे समय बाद दर्ज की गईं। अब इस फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी गई है।

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