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Gyanvapi: अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा जमीयत, पदाधिकारी बोले- फैसला पूरी तरह गलत, हमारा पक्ष सुना नहीं गया
Fri, 02 Feb 2024 07:10 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: आकाश दुबे
Updated Fri, 02 Feb 2024 07:10 PM IST
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पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखते जमीयत
- फोटो : अमर उजाला
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ज्ञानवापी परिसर में व्यास जी के तहखाने में पूजा का अधिकार मिलने के बाद मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट पर बात न सुनने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि इस मामले में जल्द राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे। शुक्रवार को दिल्ली के जमीअत उलमा ए हिन्द कार्यालय में मुस्लिम पक्ष की बैठक हुई।
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बैठक के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि कोर्ट में हमें अपनी बात तक रखने का मौका नहीं दिया गया। जिस तरह से तहखाने में पूजा शुरू करवा दी गई वह प्रशासन के कार्य पर सवाल उठाता है। अदालत ने प्रशासन को इस काम के लिए सात दिन का समय दिया था।
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उन्होंने कहा कि वाराणसी जिला न्यायाधीश के फैसला पर हैरानी है। यह फैसला गलत और निराधार है। तहखाने में कभी भी पूजा नहीं हुई थी, एक निराधार दावे को बुनियाद बनाकर जिला जज ने सेवा के अंतिम दिन आपत्तिजनक फैसला दिया। हिंदू पक्ष ने गलत तथ्यों का आधार बनकर मामले पेश किया जिससे समाज में माहौल खराब हो गया है। हालांकि अभी अदालत में न तो इस पर कोई बहस हुई है और न ही उस की पुष्टि। यह रिपोर्ट महज एक दावा है।
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उन्होंने कहा कि जिला अदालत को भी मुस्लिम पक्ष को अपील का मौका देना चाहिए था जो कि उस का कानूनी अधिकार है। समस्या केवल ज्ञानवापी मस्जिद तक सीमित नहीं है, बल्कि जिस तरह मथुरा की शाही ईदगाह, दिल्ली की सुनहरी और अन्य मस्जिदों से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह से सब चलता रहा तो देश में कही भी विवाद खड़ा होगा और इसमें मुस्लिम पक्ष की बात नहीं सुनी जाएगी। इस मौके पर जमीअत उलमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना सय्यद असद महमूद मदनी, जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष जनाब मलिक मोतसिम खान सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कोर्ट से उठ जाएगा भरोसा
जमीयत उलमा ए हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सय्यद अरशद मदनी ने कहा कि साल 1991 में एक कानून बना था। इसमें कहा गया था कि साल 1947 के बाद जो जहां हैं वैसा ही रहेगा। इसमें बाबरी मस्जिद को बाहर रखा गया। बाबरी मस्जिद के बाद से एक रास्ता खुल गया और अब हर जगह ऐसी कोशिश होने लगी है। उन्होंने कहा कि कोर्ट और सरकार को देखना चाहिए कि किसी के साथ गलत न हो, लेकिन कोई इस दिशा में काम नहीं कर रहा। यदि ऐसा ही होता रहा तो हमारा विश्वास कोर्ट के ऊपर से उठ जाएगा। मुस्लिम पक्ष के साथ जो हो रहा है उसने देश के मुसलमानों को गहरी चिंता में डाल दिया है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अदालतें समाज के पीड़ित और प्रभावित लोगों के लिए आखिरी सहारा होती हैं।
राष्ट्रपति से मांगा है मिलने का समय
मर्कजी जमीअत अहले हदीस के अध्यक्ष मौलाना असगर इमाम महदी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष के साथ भेदभाव हो रहा है। इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। राष्ट्रपति से मिलकर हम अपना पक्ष रखना चाहते हैं। राष्ट्रपति देश का प्रमुख है। यदि उनसे मुलाकात के बाद हमें लगता है कि प्रधानमंत्री से भी मिलना चाहिए तो उनसे भी मिलने का समय मांगा जाएगा।