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Gurugram News: संतूर की ध्वनि से गूंजा विश्व संतूर दिवस
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प्रख्यात संतूर वादक पंडित अभय रुस्तम सोपोरी बोले- यह दिन भारतीय सांस्कृतिक विरासत का सम्मान
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और कश्मीर के सूफियाना संगीत की विरासत के प्रतीक संतूर को समर्पित तीसरे विश्व संतूर दिवस का आयोजन सोमवार को चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में हुआ। सोपोरी एकेडमी ऑफ म्यूजिक एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स (सामापा) की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में संतूर की विरासत, उसकी वैश्विक पहचान और नई पीढ़ी के कलाकारों की भूमिका रेखांकित की गई।
इस मौके पर युवा संतूर वादक दिव्यांश श्रीवास्तव के एकल वादन की प्रस्तुति दी। तबले पर खुर्रम अली नियाजी और घटम पर वरुण राजशेखरन ने संगत की। इसके बाद पंडित संदीप चटर्जी ने तबला वादक पंडित दुर्जय भौमिक के साथ प्रस्तुति दी। वहीं, इस मौके पर जैसे ही संतूर वादक पंडित अभय रुस्तम सोपोरी ने तार पर सुर छेड़े, श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खान और पखावज पर पंडित विश्वंभर नाथ मिश्रा ने संगत की।
इस दौरान सामापा की निदेशक प्रोफेसर अपर्णा सोपोरी ने कहा कि इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता वरिष्ठ और युवा कलाकारों का एक ही मंच पर आना है। वहीं, सामापा के अध्यक्ष पंडित अभय रुस्तम सोपोरी ने कहा, यह दिन केवल एक वाद्ययंत्र का उत्सव नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का भी सम्मान है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और कश्मीर के सूफियाना संगीत की विरासत के प्रतीक संतूर को समर्पित तीसरे विश्व संतूर दिवस का आयोजन सोमवार को चिन्मय मिशन ऑडिटोरियम में हुआ। सोपोरी एकेडमी ऑफ म्यूजिक एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स (सामापा) की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में संतूर की विरासत, उसकी वैश्विक पहचान और नई पीढ़ी के कलाकारों की भूमिका रेखांकित की गई।
इस मौके पर युवा संतूर वादक दिव्यांश श्रीवास्तव के एकल वादन की प्रस्तुति दी। तबले पर खुर्रम अली नियाजी और घटम पर वरुण राजशेखरन ने संगत की। इसके बाद पंडित संदीप चटर्जी ने तबला वादक पंडित दुर्जय भौमिक के साथ प्रस्तुति दी। वहीं, इस मौके पर जैसे ही संतूर वादक पंडित अभय रुस्तम सोपोरी ने तार पर सुर छेड़े, श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खान और पखावज पर पंडित विश्वंभर नाथ मिश्रा ने संगत की।
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इस दौरान सामापा की निदेशक प्रोफेसर अपर्णा सोपोरी ने कहा कि इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता वरिष्ठ और युवा कलाकारों का एक ही मंच पर आना है। वहीं, सामापा के अध्यक्ष पंडित अभय रुस्तम सोपोरी ने कहा, यह दिन केवल एक वाद्ययंत्र का उत्सव नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों का भी सम्मान है।
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