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कृषि कानूनों के खिलाफ दिए जा रहे धरने में महिला किसान दिवस मनाया
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गुरुग्राम। कृषि कानूनों के खिलाफ लघु सचिवालय के सामने दिल्ली-जयपुर हाईवे पर दिए जा रहे धरने में सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने महिला किसान दिवस मनाया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने शिरकत की। ऊषा सरोहा ने धरने का नेतृत्व किया, जबकि पुष्पा धनखड़ ने संचालन किया।
इस मौके पर ऊषा सरोहा ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई में महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर किसानों का साथ देंगी। जब भी आंदोलनकारी किसानों को उनके सहयोग की जरूरत होगी, वह तभी धरने में शामिल हो जाएंगी। वहीं, पूर्व निगम पार्षद रमा राठी ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर महिलाएं ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा में बढ़ चढ़कर भाग लेंगी, क्योंकि केंद्र सरकार संवेदनहीन हो गई है। वह किसानों की सुनवाई नहीं कर रही है, वहीं अन्य महिला वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि केंद्र सरकार ने तानाशाही छोड़कर कृषि कानूनों को रद्द कर देना चाहिए।
दूसरी ओर, मोर्चा पदाधिकारी संतोख सिंह, राव कमलबीर सिंह एवं गजे सिंह कबलाना ने कहा कि सोमवार को पूरे देश में महिला किसान दिवस मनाया जा रहा है। यहां धरने पर मातृशक्ति ने पहुंचकर किसानों की मांगों के समर्थन में हुंकार भरी। महिलाओं की भारी संख्या में भागीदारी से साबित हो रहा है कि किसानों का आंदोलन अब जन आंदोलन बन चुका है।
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धरने में डॉ. सारिका वर्मा, सुनीता सहरावत, निर्मल यादव, रेखा यादव, मंजू सांखला, मीनाक्षी सहरावत, भारती देवी, शर्मिला रोज, सुनीता कटारिया, नीलम गुलिया, आशा राठी, सुदेश डबास, सुनीता मलिक, मंजू देसवाल, लोकेश चौधरी, पूनम सहरावत और सुमन सहरावत एडवोकेट आदि शामिल हुई।
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इस मौके पर ऊषा सरोहा ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई में महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर किसानों का साथ देंगी। जब भी आंदोलनकारी किसानों को उनके सहयोग की जरूरत होगी, वह तभी धरने में शामिल हो जाएंगी। वहीं, पूर्व निगम पार्षद रमा राठी ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर महिलाएं ट्रैक्टर तिरंगा यात्रा में बढ़ चढ़कर भाग लेंगी, क्योंकि केंद्र सरकार संवेदनहीन हो गई है। वह किसानों की सुनवाई नहीं कर रही है, वहीं अन्य महिला वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि केंद्र सरकार ने तानाशाही छोड़कर कृषि कानूनों को रद्द कर देना चाहिए।
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दूसरी ओर, मोर्चा पदाधिकारी संतोख सिंह, राव कमलबीर सिंह एवं गजे सिंह कबलाना ने कहा कि सोमवार को पूरे देश में महिला किसान दिवस मनाया जा रहा है। यहां धरने पर मातृशक्ति ने पहुंचकर किसानों की मांगों के समर्थन में हुंकार भरी। महिलाओं की भारी संख्या में भागीदारी से साबित हो रहा है कि किसानों का आंदोलन अब जन आंदोलन बन चुका है।
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धरने में डॉ. सारिका वर्मा, सुनीता सहरावत, निर्मल यादव, रेखा यादव, मंजू सांखला, मीनाक्षी सहरावत, भारती देवी, शर्मिला रोज, सुनीता कटारिया, नीलम गुलिया, आशा राठी, सुदेश डबास, सुनीता मलिक, मंजू देसवाल, लोकेश चौधरी, पूनम सहरावत और सुमन सहरावत एडवोकेट आदि शामिल हुई।