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Gurugram News: नए गुरुग्राम में सार्वजनिक परिवहन नहीं होने से परेशान हैं महिलाएं
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सिटी बसें, ऑटो, ई-रिक्शा कुछ भी नहीं चलता, लोगों को आवागन में होती है परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक ओर पुराने शहर में जहां मेट्रो स्टेशन से लेकर रेलवे स्टेशन और सेक्टर-56 के लिए दो पिंक सिटी बसें चलाई जा रही हैं। जो अकसर खाली आवाजाही करती नजर आती हैं। वहीं, नए गुरुग्राम की सोसाइटियों में सार्वजनिक परिवहन का अभाव है। पुराने शहर की पिंक बसें यात्रियों के लिए तरस रही हैं। वहीं, न्यू गुरुग्राम की महिलाएं बसों के नहीं होने के कारण बेबस हैं।
सेक्टर-58 से लेकर 115 तक सोसाइटियां बसी हैं। इन इलाकों में सिटी बसें, ऑटो, ई-रिक्शा कुछ भी नहीं चलता। कई बार बसों की घोषणाएं हो चुकी हैं मगर एक दो चलीं और बंद हो गईं। दूर दराज में बसी सोसाइटियों की वे महिलाएं जिन्हें ड्राइविंग नहीं आती, उनके लिए सार्वजनिक परिवहन का नहीं होना बड़ा संकट हैं। खासतौर पर द्वारका एक्सप्रेसवे, सदर्न पेरिफेरल रोड में बसी सोसाइटियों तक ऑटो, ई-रिक्शा, बस कोई साधन नहीं पहुंचता।
वर्जन
सेक्टर-70ए में हमारी सोसाइटी से मुख्य सड़क करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। यहां की मुख्य सड़क पर भी सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। कैब भी अकसर कैंसिल हो जाती है। शहर के भीतर जाना हमारे एक बहुत बड़ी चुनौती है। - स्वाति शुक्ला
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यहां एकमात्र सहारा निजी कैब है। सेक्टर-70ए में कैब भी बहुत मुश्किल से मिलती है। हम लोगों ने सोसाइटी में सारी सुविधाएं खुद से बनाई हैं मगर सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था खुद से कैसे करें। - लता पटेल
गुरुग्राम खास तौर पर नए गुरुग्राम में प्रशासन महिलाओं को लेकर संवेदनशील नहीं है। नया गुरुग्राम नया बसा है, इसलिए प्रशासन को मेट्रो से फीडर बसें, सिटी बसें चलनी चाहिए। जिन्हें ड्राइविंग नहीं आती उन्हें काफी मुश्किल आती है। - शालिनी कुलश्रेष्ठ
द्वारका एक्सप्रेसवे पर तो स्कूटी भी नहीं चला सकते हैं। शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने के लिए यहां की महिलाएं खुद को लाचार महसूस करती हैं। प्रशासन को यहां कई बसें चलानी चाहिए। - राजबाला सांगवान
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक ओर पुराने शहर में जहां मेट्रो स्टेशन से लेकर रेलवे स्टेशन और सेक्टर-56 के लिए दो पिंक सिटी बसें चलाई जा रही हैं। जो अकसर खाली आवाजाही करती नजर आती हैं। वहीं, नए गुरुग्राम की सोसाइटियों में सार्वजनिक परिवहन का अभाव है। पुराने शहर की पिंक बसें यात्रियों के लिए तरस रही हैं। वहीं, न्यू गुरुग्राम की महिलाएं बसों के नहीं होने के कारण बेबस हैं।
सेक्टर-58 से लेकर 115 तक सोसाइटियां बसी हैं। इन इलाकों में सिटी बसें, ऑटो, ई-रिक्शा कुछ भी नहीं चलता। कई बार बसों की घोषणाएं हो चुकी हैं मगर एक दो चलीं और बंद हो गईं। दूर दराज में बसी सोसाइटियों की वे महिलाएं जिन्हें ड्राइविंग नहीं आती, उनके लिए सार्वजनिक परिवहन का नहीं होना बड़ा संकट हैं। खासतौर पर द्वारका एक्सप्रेसवे, सदर्न पेरिफेरल रोड में बसी सोसाइटियों तक ऑटो, ई-रिक्शा, बस कोई साधन नहीं पहुंचता।
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वर्जन
सेक्टर-70ए में हमारी सोसाइटी से मुख्य सड़क करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। यहां की मुख्य सड़क पर भी सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। कैब भी अकसर कैंसिल हो जाती है। शहर के भीतर जाना हमारे एक बहुत बड़ी चुनौती है। - स्वाति शुक्ला
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यहां एकमात्र सहारा निजी कैब है। सेक्टर-70ए में कैब भी बहुत मुश्किल से मिलती है। हम लोगों ने सोसाइटी में सारी सुविधाएं खुद से बनाई हैं मगर सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था खुद से कैसे करें। - लता पटेल
गुरुग्राम खास तौर पर नए गुरुग्राम में प्रशासन महिलाओं को लेकर संवेदनशील नहीं है। नया गुरुग्राम नया बसा है, इसलिए प्रशासन को मेट्रो से फीडर बसें, सिटी बसें चलनी चाहिए। जिन्हें ड्राइविंग नहीं आती उन्हें काफी मुश्किल आती है। - शालिनी कुलश्रेष्ठ
द्वारका एक्सप्रेसवे पर तो स्कूटी भी नहीं चला सकते हैं। शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने के लिए यहां की महिलाएं खुद को लाचार महसूस करती हैं। प्रशासन को यहां कई बसें चलानी चाहिए। - राजबाला सांगवान