{"_id":"6a5d390f11d23e30bc011e0a","slug":"waterlogging-will-be-alleviated-gurugram-nuh-palwal-drain-project-being-designed-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-95007-2026-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: जलभराव से मिलेगी... गुरुग्राम-नूंह-पलवल ड्रेन परियोजना की बन रही रूपरेखा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: जलभराव से मिलेगी... गुरुग्राम-नूंह-पलवल ड्रेन परियोजना की बन रही रूपरेखा
विज्ञापन
तीन माह में तैयार होगी फिजिबिलिटी रिपोर्ट व डीपीआर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में गुरुग्राम-नूंह-पलवल ड्रेन परियोजना पर काम शुरू हो गया है। परियोजना के लिए नियुक्त कंसल्टेंट ने सर्वे और तकनीकी अध्ययन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट (व्यवहार्यता अध्ययन) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में करीब तीन माह का समय लगने की संभावना है। इसके बाद परियोजना की लागत, ड्रेन का मार्ग और निर्माण का स्वरूप स्पष्ट हो सकेगा।
प्रदेश सरकार का उद्देश्य गुरुग्राम के बरसाती पानी की निकासी के लिए नजफगढ़ ड्रेन पर निर्भरता कम करना है। इसके लिए एक वैकल्पिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे गुरुग्राम का वर्षा जल सोहना, नूंह और पलवल होते हुए आगे यमुना नदी तक पहुंचाया जा सके। इससे मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। निप्पॉन कोइ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। एजेंसी प्रस्तावित ड्रेन के संभावित रूट, भू-आकृति, जल प्रवाह, भूमि की उपलब्धता और अन्य तकनीकी पहलुओं का सर्वे कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, अध्ययन के दौरान यह भी आकलन किया जाएगा कि गुरुग्राम से निकलने वाले बरसाती पानी को किस प्रकार सुरक्षित और प्रभावी ढंग से नूंह तथा पलवल के रास्ते यमुना तक पहुंचाया जा सकता है। डीपीआर में परियोजना की तकनीकी डिजाइन, लागत, निर्माण अवधि और पर्यावरणीय पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।
जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह ने बताया कि गुरुग्राम-सोहना-नूंह-पलवल ड्रेन परियोजना के लिए कंसल्टेंट ने काम शुरू कर दिया है। सर्वे और तकनीकी अध्ययन के आधार पर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तथा डीपीआर तैयार की जाएगी। रिपोर्ट पूरी होने के बाद परियोजना की पूरी रूपरेखा और आगे की कार्ययोजना स्पष्ट होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में गुरुग्राम-नूंह-पलवल ड्रेन परियोजना पर काम शुरू हो गया है। परियोजना के लिए नियुक्त कंसल्टेंट ने सर्वे और तकनीकी अध्ययन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिजिबिलिटी रिपोर्ट (व्यवहार्यता अध्ययन) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में करीब तीन माह का समय लगने की संभावना है। इसके बाद परियोजना की लागत, ड्रेन का मार्ग और निर्माण का स्वरूप स्पष्ट हो सकेगा।
प्रदेश सरकार का उद्देश्य गुरुग्राम के बरसाती पानी की निकासी के लिए नजफगढ़ ड्रेन पर निर्भरता कम करना है। इसके लिए एक वैकल्पिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे गुरुग्राम का वर्षा जल सोहना, नूंह और पलवल होते हुए आगे यमुना नदी तक पहुंचाया जा सके। इससे मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। निप्पॉन कोइ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। एजेंसी प्रस्तावित ड्रेन के संभावित रूट, भू-आकृति, जल प्रवाह, भूमि की उपलब्धता और अन्य तकनीकी पहलुओं का सर्वे कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, अध्ययन के दौरान यह भी आकलन किया जाएगा कि गुरुग्राम से निकलने वाले बरसाती पानी को किस प्रकार सुरक्षित और प्रभावी ढंग से नूंह तथा पलवल के रास्ते यमुना तक पहुंचाया जा सकता है। डीपीआर में परियोजना की तकनीकी डिजाइन, लागत, निर्माण अवधि और पर्यावरणीय पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह ने बताया कि गुरुग्राम-सोहना-नूंह-पलवल ड्रेन परियोजना के लिए कंसल्टेंट ने काम शुरू कर दिया है। सर्वे और तकनीकी अध्ययन के आधार पर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तथा डीपीआर तैयार की जाएगी। रिपोर्ट पूरी होने के बाद परियोजना की पूरी रूपरेखा और आगे की कार्ययोजना स्पष्ट होगी।
विज्ञापन