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Gurugram News: देरी से फ्लैट का पजेशन देने पर विपुल बिल्डर देगा ब्याज
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हरेरा के चेयरमैन ने दिया आदेश, लावण्या परियोजना का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-81 स्थित विपुल लावण्या परियोजना में फ्लैट का पजेशन देरी से देने पर विपुल लिमिटेड को खरीदार को ब्याज के साथ रुपये वापस करेगा। यह आदेश हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) गुरुग्राम के चेयरमैन अरुण कुमार ने दिया है।
शिकायतकर्ता राजेश खरबंदा और सुमन खरबंदा ने सितंबर 2010 में विपुल लावण्या के टावर-3 में 1780 वर्ग फुट का मकान बुक किया था। दिसंबर 2010 में हुए खरीदार समझौते के अनुसार मकान का निर्माण 36 महीने में पूरा किया जाना था। फ्लैट का पजेशन देने पर 5 मार्च 2014 तय थी। बिल्डर ने 7 अक्टूबर 2021 को खरीदार को केवल अनुमति के आधार पर कब्जा दिया।
बिल्डर की ओर से दलील दी गई कि खरीदार ने कब्जा लेते समय पूर्ण और अंतिम समझौता किया था और उसे देरी के एवज में 1.30 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। इसलिए अब दोबारा देरी का ब्याज मांगना उचित नहीं है। बिल्डर ने मामले को समय-सीमा से बाहर बताते हुए पूर्व के कुछ मामलों का भी हवाला दिया।
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प्राधिकरण ने कहा कि बिल्डर अभी भी ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पाया है। कब्जे की तय तारीख के करीब 12 साल बाद तक भी प्रमाण पत्र नहीं मिलने के संबंध में बिल्डर की ओर से कोई संतोषजनक कारण रिकार्ड पर नहीं रखा गया। हरेरा ने आदेश दिया कि खरीदार को 5 मार्च 2014 से 7 अक्टूबर 2021 तक 10.80 प्रतिशत सालाना की दर से देरी का ब्याज दिया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-81 स्थित विपुल लावण्या परियोजना में फ्लैट का पजेशन देरी से देने पर विपुल लिमिटेड को खरीदार को ब्याज के साथ रुपये वापस करेगा। यह आदेश हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) गुरुग्राम के चेयरमैन अरुण कुमार ने दिया है।
शिकायतकर्ता राजेश खरबंदा और सुमन खरबंदा ने सितंबर 2010 में विपुल लावण्या के टावर-3 में 1780 वर्ग फुट का मकान बुक किया था। दिसंबर 2010 में हुए खरीदार समझौते के अनुसार मकान का निर्माण 36 महीने में पूरा किया जाना था। फ्लैट का पजेशन देने पर 5 मार्च 2014 तय थी। बिल्डर ने 7 अक्टूबर 2021 को खरीदार को केवल अनुमति के आधार पर कब्जा दिया।
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बिल्डर की ओर से दलील दी गई कि खरीदार ने कब्जा लेते समय पूर्ण और अंतिम समझौता किया था और उसे देरी के एवज में 1.30 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। इसलिए अब दोबारा देरी का ब्याज मांगना उचित नहीं है। बिल्डर ने मामले को समय-सीमा से बाहर बताते हुए पूर्व के कुछ मामलों का भी हवाला दिया।
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प्राधिकरण ने कहा कि बिल्डर अभी भी ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पाया है। कब्जे की तय तारीख के करीब 12 साल बाद तक भी प्रमाण पत्र नहीं मिलने के संबंध में बिल्डर की ओर से कोई संतोषजनक कारण रिकार्ड पर नहीं रखा गया। हरेरा ने आदेश दिया कि खरीदार को 5 मार्च 2014 से 7 अक्टूबर 2021 तक 10.80 प्रतिशत सालाना की दर से देरी का ब्याज दिया जाए।