{"_id":"5f6ba3318ebc3ef8f324dd31","slug":"villagers-against-corporation-gurgaon-news-noi5381898153","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘39 गांवों को निगम में शामिल करने का फैसला ग्रामीण विरोधी’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘39 गांवों को निगम में शामिल करने का फैसला ग्रामीण विरोधी’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुग्राम। राज्य सरकार ने जिले के 39 गांवों को नगर निगम के अधीन करने के फैसले को सरपंचों ने ग्रामीण विरोधी बताया है। इस फैसले के खिलाफ ग्रामीणों ने पिछले सप्ताह मोर्चा खोला था। अब उन्होंने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में अपनी बात रखी।
इस दौरान गांव संघर्ष समिति के बैनर तले बीरू सरपंच, सुंदर सिंह सरपंच, राजेंद्र सिंह पूर्व सरपंच, प्रहलाद सरपंच, समुंदर पहलवान ढाणा, संजय राघव पूर्व सरपंच, राजन राघव, तिलकराज चौहान, दीपक राघव, जय प्रकाश राघव आदि ने कहा कि वर्ष 2009 में शामिल किए गए 39 गांवों में आज तक विकास कार्य नहीं हुआ है। निगम ने गांवों में चिकित्सालय, स्कूल व अन्य सरकारी संस्थाएं नहीं बनाई हैं। इससे निगम की कार्यशैली की असलियत सामने आ रही है। राज्य सरकार का गांवों को निगम के अधीन करने का निर्णय पूरी तरह ग्रामीण विरोधी है। निगम के गांव के लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। जबकि पंचायत वाले गांवों में एक भी समस्या नहीं है। पंचायतों ने गांवों में सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया करा रखी हैं। इस कारण वह अपने गांवों को निगम के अधीन करने नहीं देंगे। गांवों से निगम केवल टैक्स वसूलने का कार्य कर रहा है। वह गांवों को निगम में शामिल करने के विरोध में इलाके के जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करेंगे। इस संबंध में उनसे तालमेल किया जाएगा। राज्य सरकार व निगम की उनके 39 गांवों की 7021 एकड़ भूमि और पंचायत के पास जमा करीब 900 करोड़ रुपये पर नजर है।
गांवों ने नहीं दी सहमति, मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
सरपंचों व ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी गांव की पंचायत ने अपने गांव को निगम में शामिल करने के लिए सहमति नहीं दी है। उनके गांवों में आज भी कृषि कार्य किया जा रहा है। इस कारण राज्य सरकार का निर्णय सही नहीं है। वह बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन उपायुक्त को देकर विरोध जताएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस दौरान गांव संघर्ष समिति के बैनर तले बीरू सरपंच, सुंदर सिंह सरपंच, राजेंद्र सिंह पूर्व सरपंच, प्रहलाद सरपंच, समुंदर पहलवान ढाणा, संजय राघव पूर्व सरपंच, राजन राघव, तिलकराज चौहान, दीपक राघव, जय प्रकाश राघव आदि ने कहा कि वर्ष 2009 में शामिल किए गए 39 गांवों में आज तक विकास कार्य नहीं हुआ है। निगम ने गांवों में चिकित्सालय, स्कूल व अन्य सरकारी संस्थाएं नहीं बनाई हैं। इससे निगम की कार्यशैली की असलियत सामने आ रही है। राज्य सरकार का गांवों को निगम के अधीन करने का निर्णय पूरी तरह ग्रामीण विरोधी है। निगम के गांव के लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं। जबकि पंचायत वाले गांवों में एक भी समस्या नहीं है। पंचायतों ने गांवों में सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया करा रखी हैं। इस कारण वह अपने गांवों को निगम के अधीन करने नहीं देंगे। गांवों से निगम केवल टैक्स वसूलने का कार्य कर रहा है। वह गांवों को निगम में शामिल करने के विरोध में इलाके के जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करेंगे। इस संबंध में उनसे तालमेल किया जाएगा। राज्य सरकार व निगम की उनके 39 गांवों की 7021 एकड़ भूमि और पंचायत के पास जमा करीब 900 करोड़ रुपये पर नजर है।
विज्ञापन
गांवों ने नहीं दी सहमति, मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
सरपंचों व ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी गांव की पंचायत ने अपने गांव को निगम में शामिल करने के लिए सहमति नहीं दी है। उनके गांवों में आज भी कृषि कार्य किया जा रहा है। इस कारण राज्य सरकार का निर्णय सही नहीं है। वह बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन उपायुक्त को देकर विरोध जताएंगे।
विज्ञापन