{"_id":"6adcfcf85bde33c50c0762a4","slug":"vehicle-pollution-in-gurugram-poses-a-serious-challenge-report-lays-bare-the-reality-gurgaon-news-c-1-1-noi1546-4870137-2026-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: गुरुग्राम में वाहनों का प्रदूषण गंभीर चुनौती, रिपोर्ट ने खोली पोल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: गुरुग्राम में वाहनों का प्रदूषण गंभीर चुनौती, रिपोर्ट ने खोली पोल
विज्ञापन
विज्ञापन
सर्दियों में पीएम 2.5 प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 16 से 26 प्रतिशत तक आंकी गई
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। साइबर सिटी की सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलने वाला धुआं हवा की सेहत बिगाड़ने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। सर्दियों में हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के जमीन के नजदीक जमा होने से वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण का असर और बढ़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्रोतों पर किए गए एक अध्ययन में गुरुग्राम में सर्दियों के दौरान पीएम 2.5 प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 16 से 26 प्रतिशत तक आंकी गई है।
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की ओर से तैयार रिपोर्ट सोर्स अपॉर्शनमेंट ऑफ पीएम 2.5 एंड पीएम 10 ऑफ दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों का आकलन किया गया था। अगस्त 2018 में जारी इस रिपोर्ट के लिए वर्ष 2016-17 के दौरान आंकड़े जुटाए गए थे। अध्ययन में गुरुग्राम के दो निगरानी स्थलों को शामिल किया गया था।
वाहनों का प्रदूषण नियंत्रित किए बिना हवा साफ बनाने की चुनौती बनी रहेगी
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में सर्दियों के दौरान पीएम 2.5 में वाहनों की हिस्सेदारी 16 से 26 प्रतिशत के बीच रही। गर्मियों में यह हिस्सेदारी 16 से 26 प्रतिशत के दायरे में आंकी गई। वहीं, पीएम 10 में वाहनों की हिस्सेदारी गर्मियों में 14 से 19 प्रतिशत और सर्दियों में 16 से 23 प्रतिशत रही। पीएम 2.5 बेहद महीन कण होते हैं, जो सांस के जरिये फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन में मौजूद प्रदूषक और गैसें वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित किए बिना शहर की हवा को साफ बनाने की चुनौती बनी रहेगी।
विज्ञापन
जाम में फंसे वाहन भी चिंता का विषय
गुरुग्राम में वाहनों की बढ़ती संख्या, व्यस्त सड़कों पर यातायात का दबाव और जाम की समस्या वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण को महत्वपूर्ण बनाती है। जाम में वाहन लंबे समय तक चलने या खड़े रहने के दौरान ईंधन जलाते रहते हैं। ऐसे में यातायात का बेहतर प्रबंधन, वाहनों के उत्सर्जन की नियमित जांच और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का अहम हिस्सा हो सकते हैं। रिपोर्ट में पुराने वाहनों के उत्सर्जन को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में कारों से होने वाले पीएम 2.5 उत्सर्जन में पुराने वाहनों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक थी। हालांकि, यह आकलन वर्ष 2016 के वाहनों और उस समय की परिस्थितियों पर आधारित था।
इसे भी जानें
: जिले में कुल बसों की आवश्यकता 1000 है जिसमें 150 ही सीएनजी की हैं।
: 2025 तक 80 बैट्री चार्ज स्टेशन बनने थे। 2026 में सितंबर तक 10 बने हैं। दिसंबर तक 15 बनने की उम्मीद।
: शहर में 33 जगहें ऐसी हैं, जहां पर जाम लगता है। सिरहौल बार्डर, राजीव चौक, नरसिंहपुर प्रमुख है।
ग्रेप-1 लागू होने के बाद इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान काटे जा रहे हैं। नगर निगम की ओर से होने वाले सभी काम को पूरा किया जा रहा है।
- रवीन्द्र यादव, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। साइबर सिटी की सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलने वाला धुआं हवा की सेहत बिगाड़ने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। सर्दियों में हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के जमीन के नजदीक जमा होने से वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण का असर और बढ़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्रोतों पर किए गए एक अध्ययन में गुरुग्राम में सर्दियों के दौरान पीएम 2.5 प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 16 से 26 प्रतिशत तक आंकी गई है।
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की ओर से तैयार रिपोर्ट सोर्स अपॉर्शनमेंट ऑफ पीएम 2.5 एंड पीएम 10 ऑफ दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों का आकलन किया गया था। अगस्त 2018 में जारी इस रिपोर्ट के लिए वर्ष 2016-17 के दौरान आंकड़े जुटाए गए थे। अध्ययन में गुरुग्राम के दो निगरानी स्थलों को शामिल किया गया था।
विज्ञापन
वाहनों का प्रदूषण नियंत्रित किए बिना हवा साफ बनाने की चुनौती बनी रहेगी
रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में सर्दियों के दौरान पीएम 2.5 में वाहनों की हिस्सेदारी 16 से 26 प्रतिशत के बीच रही। गर्मियों में यह हिस्सेदारी 16 से 26 प्रतिशत के दायरे में आंकी गई। वहीं, पीएम 10 में वाहनों की हिस्सेदारी गर्मियों में 14 से 19 प्रतिशत और सर्दियों में 16 से 23 प्रतिशत रही। पीएम 2.5 बेहद महीन कण होते हैं, जो सांस के जरिये फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन में मौजूद प्रदूषक और गैसें वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित किए बिना शहर की हवा को साफ बनाने की चुनौती बनी रहेगी।
विज्ञापन
जाम में फंसे वाहन भी चिंता का विषय
गुरुग्राम में वाहनों की बढ़ती संख्या, व्यस्त सड़कों पर यातायात का दबाव और जाम की समस्या वाहन प्रदूषण पर नियंत्रण को महत्वपूर्ण बनाती है। जाम में वाहन लंबे समय तक चलने या खड़े रहने के दौरान ईंधन जलाते रहते हैं। ऐसे में यातायात का बेहतर प्रबंधन, वाहनों के उत्सर्जन की नियमित जांच और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का अहम हिस्सा हो सकते हैं। रिपोर्ट में पुराने वाहनों के उत्सर्जन को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में कारों से होने वाले पीएम 2.5 उत्सर्जन में पुराने वाहनों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक थी। हालांकि, यह आकलन वर्ष 2016 के वाहनों और उस समय की परिस्थितियों पर आधारित था।
इसे भी जानें
: जिले में कुल बसों की आवश्यकता 1000 है जिसमें 150 ही सीएनजी की हैं।
: 2025 तक 80 बैट्री चार्ज स्टेशन बनने थे। 2026 में सितंबर तक 10 बने हैं। दिसंबर तक 15 बनने की उम्मीद।
: शहर में 33 जगहें ऐसी हैं, जहां पर जाम लगता है। सिरहौल बार्डर, राजीव चौक, नरसिंहपुर प्रमुख है।
ग्रेप-1 लागू होने के बाद इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान काटे जा रहे हैं। नगर निगम की ओर से होने वाले सभी काम को पूरा किया जा रहा है।
- रवीन्द्र यादव, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम, गुरुग्राम