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Gurugram News: धोखाधड़ी मामले में तीन दोषियों को 7 साल और एक को पांच साल की सजा

Tue, 20 Oct 2026 12:41 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 12:41 AM IST
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Three convicts sentenced to 7 years and one to 5 years in a fraud case
अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सोलह साल पुराने 2.48 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में जिला अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराया है। इनमें से तीन दोषियों को सात साल की कठोर कारावास और एक दोषी को पांच साल की सजा सुनाई गई है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है। सुनील कुमार भंडारी पर 40 हजार रुपये, मनोज भंडारी पर 30 हजार रुपये और कमलेश नाहर पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। राजकुमार श्रीवास पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह मामला भारती इंफ्रैटेल लिमिटेड कंपनी की शिकायत पर 2010 में सेक्टर-18 थाना पुलिस ने दर्ज किया था। कंपनी के मैनेजर राजेश चावला ने शिकायत में बताया था कि मुंबई स्थित वेंडर हार्डवेयर ट्रेडिंग कॉरपोरेशन को पहले ही वैध भुगतान किए जा चुके थे। सुनील भंडारी और मनोज भंडारी कंपनी के वित्त विभाग में कार्यरत थे। इन पर आरोप था कि इन्होंने असली वेंडर के इनवॉइस और बिलों को दोबारा प्रोसेस किया। इन्होंने अन्य कर्मचारियों की सिस्टम आईडी का अनधिकृत रूप से इस्तेमाल करके फर्जी इनवॉइस अपलोड किए और अपनी आईडी से सत्यापित कर दिया।
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आरोपियों ने मिलीभगत करके इंदौर और गुरुग्राम की देना बैंक शाखाओं में असली वेंडर के नाम से एक फर्जी खाता खोला। कंपनी से धोखाधड़ी करके निकाले गए 2.48 करोड़ रुपये इसी फर्जी बैंक खाते में जमा करवाए गए। बाद में इन रुपयों को आपस में बांट लिया गया। राजकुमार श्रीवास और कमलेश नाहर ने मुख्य आरोपियों के साथ मिलकर इस पूरी धोखाधड़ी की साजिश रची। इन्होंने फर्जी बैंक खाते को खुलवाने, चलाने और अवैध रूप से रुपये ट्रांसफर करने में सक्रिय भूमिका निभाई। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराध और कॉरपोरेट धोखाधड़ी समाज तथा व्यावसायिक विश्वास की जड़ों पर प्रहार करते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में नरमी बरतना उचित नहीं है। अदालत ने तीन दोषियों को सात साल की और एक दोषी को पांच साल की सजा दी।
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