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Gurugram News: बिजली चोरी के खिलाफ किरायदार ने डाली याचिका, अदालत ने की खारिज
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बिजली निगम ने 8.52 लाख रुपये का लगाया था जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बिजली चोरी करने पर लगे जुर्माने के विरोध में किरायदार ने दायर की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। यह आदेश अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश सौरभ गुप्ता की अदालत ने दिया है। निचली अदालत भी इस मामले को खारिज कर चुकी है।
लक्ष्मण विहार निवासी संदीप शर्मा ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि राजबाला के घर पर किराये पर रहता है। 13 फरवरी 2017 को बिजली निगम की टीम ने घर लगे मीटर को उतारकर लैब में जांच के लिए भेज दिया था। 17 फरवरी को टीम ने उन्हें लैब में बुलाया लेकिन उन्हें बाहर बैठा दिया। 22 फरवरी को वहां पर नया मीटर लगा दिया। इसके बाद निगम की तरफ से बिजली चोरी की बात कहकर उन पर 8.52 लाख रुपये का जुर्माना लगाया दिया गया। बिजली निगम ने अदालत में दलील दी कि मीटर राजबाला के नाम पर है। उन्होंने याचिकाकर्ता को मामले में पैरवी करने के लिए अधिकृत नहीं किया है। ऐसे में वह याचिका दायर नहीं कर सकते।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि याचिकाकर्ता सिर्फ बिजली इस्तेमाल कर सकता है लेकिन वह उस मीटर के संबंध में कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसके साथ ही सिविल कोर्ट के पास बिजली चोरी से जुड़े मामले का सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं है।
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गुरुग्राम। बिजली चोरी करने पर लगे जुर्माने के विरोध में किरायदार ने दायर की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। यह आदेश अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश सौरभ गुप्ता की अदालत ने दिया है। निचली अदालत भी इस मामले को खारिज कर चुकी है।
लक्ष्मण विहार निवासी संदीप शर्मा ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि राजबाला के घर पर किराये पर रहता है। 13 फरवरी 2017 को बिजली निगम की टीम ने घर लगे मीटर को उतारकर लैब में जांच के लिए भेज दिया था। 17 फरवरी को टीम ने उन्हें लैब में बुलाया लेकिन उन्हें बाहर बैठा दिया। 22 फरवरी को वहां पर नया मीटर लगा दिया। इसके बाद निगम की तरफ से बिजली चोरी की बात कहकर उन पर 8.52 लाख रुपये का जुर्माना लगाया दिया गया। बिजली निगम ने अदालत में दलील दी कि मीटर राजबाला के नाम पर है। उन्होंने याचिकाकर्ता को मामले में पैरवी करने के लिए अधिकृत नहीं किया है। ऐसे में वह याचिका दायर नहीं कर सकते।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि याचिकाकर्ता सिर्फ बिजली इस्तेमाल कर सकता है लेकिन वह उस मीटर के संबंध में कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकता है। इसके साथ ही सिविल कोर्ट के पास बिजली चोरी से जुड़े मामले का सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं है।
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