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पांच दिन से मरीज को नहीं मिला बेड
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गुरुग्राम। साइबर सिटी गुरुग्राम की उच्च चिकित्सकीय सुविधा से रूप में पहचान होने के बावजूद मरीजों का बुरा हाल है। अब यहां स्वास्थ्य सुविधा के मामले में स्थिति उल्टी नजर आ रही है। स्थिति यह है कि सिविल अस्पताल में एक मरीज को पांच दिन से बेड ही नहीं मिला है, ऐसे में वह इमरजेंसी के बाहर स्लैब पर लेटकर ही अपना इलाज करा रहा है।
कोविड संक्रमण के दौर में अस्पतालों में मरीजों को इलाज के साथ-साथ बेड नसीब नहीं हो रहे हैं। मरीज कई दिनों तक इमरजेंसी के बाहर जमीन, स्लैब, व्हीलचेयर पर लिटाकर ऑक्सीजन ले रहे हैं। शुक्रवार को भी सिविल अस्पताल में यहीं हाल रहा। बसई रोड निवासी प्रवेश कुमार पांच दिनों से स्लैब पर लेटकर ऑक्सीजन लेने को मजबूर दिखे। वहीं साथ में आए तीमारदार भी छोटी सी पत्थर की स्लैब पर बैठे रहते हैं। यह हालत सिविल अस्पताल में एक दिन से नहीं है। बल्कि यह स्थिति कोरोना मरीजों के साथ पिछले काफी समय से बनी हुई है। तीमारदार एंबुलेंस न मिलने पर ऑटो और निजी वाहनों में ही मरीज को लेकर अस्पताल में पहुंचते है।
डॉक्टर और स्टाफ नहीं लेते सुध
मरीजों का कहना है कि उनको इमरजेंसी के बाहर लिटाने के बाद डॉक्टर और स्टाफ हालचाल भी नहीं पूछते हैं, जबकि तीमारदार हमेशा इमरजेंसी में जाकर डॉक्टरों से मरीज की जांच करने की विनती करते है। वहीं डॉक्टर अन्य मरीजों को देखने का हवाला देकर कई घंटे इंतजार के बाद मरीज को देखते है। वहीं, कई बार तो तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच कहासुनी तक की नौबत आ जाती है।
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कोविड संक्रमण के दौर में अस्पतालों में मरीजों को इलाज के साथ-साथ बेड नसीब नहीं हो रहे हैं। मरीज कई दिनों तक इमरजेंसी के बाहर जमीन, स्लैब, व्हीलचेयर पर लिटाकर ऑक्सीजन ले रहे हैं। शुक्रवार को भी सिविल अस्पताल में यहीं हाल रहा। बसई रोड निवासी प्रवेश कुमार पांच दिनों से स्लैब पर लेटकर ऑक्सीजन लेने को मजबूर दिखे। वहीं साथ में आए तीमारदार भी छोटी सी पत्थर की स्लैब पर बैठे रहते हैं। यह हालत सिविल अस्पताल में एक दिन से नहीं है। बल्कि यह स्थिति कोरोना मरीजों के साथ पिछले काफी समय से बनी हुई है। तीमारदार एंबुलेंस न मिलने पर ऑटो और निजी वाहनों में ही मरीज को लेकर अस्पताल में पहुंचते है।
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डॉक्टर और स्टाफ नहीं लेते सुध
मरीजों का कहना है कि उनको इमरजेंसी के बाहर लिटाने के बाद डॉक्टर और स्टाफ हालचाल भी नहीं पूछते हैं, जबकि तीमारदार हमेशा इमरजेंसी में जाकर डॉक्टरों से मरीज की जांच करने की विनती करते है। वहीं डॉक्टर अन्य मरीजों को देखने का हवाला देकर कई घंटे इंतजार के बाद मरीज को देखते है। वहीं, कई बार तो तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच कहासुनी तक की नौबत आ जाती है।
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