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Gurugram News: सोने और चांदी के लड्डू गोपाल, रत्न जड़ित मुकुट, सिंहासन से बाजार गुलजार
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मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारियां, रंगीन बत्तियों से हो रही सजावट
कान्हा के लिए फूल बंगला बनाने के लिए वृंदावन से आएंगे कलाकार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जन्माष्टमी पर बाजार से लेकर ऑनलाइन मार्केट में सोने-चांदी से निर्मित लड्डू गाेपाल की धूम है। लड्डू गोपाल के सिंहासन से लेकर मुकुट तक में सोने, चांदी और रत्न जड़े हैं। कुछ सिल्वर प्लेटेड सिंहासन और चांदी के कान्हाजी, बांसुरी और अन्य एक्सेसरीज भी ऑनलाइन मार्केट में ऑन डिमांड है। ऑनलाइन बाजार में चांदी के तरह-तरह के डिजाइनर मुकुट, सिंहासन, राधा कृष्ण, लड्डू गोपाल आदि की मूर्तियां बिक रही हैं। दो से तीन हजार रुपये के बीच छोटे लड्डू गोपाल, 700 से 800 रुपये के बीच बांसुरी के साथ ही इसी कीमत पर पाजेब आदि की ऑनलाइन खरीदारी हो रही है। रेलवे रोड स्थित प्रेम मंदिर में कान्हा का फूल बंगला बनाए जाने की तैयारी है। वृंदावन के कलाकार इसे अंतिम रूप देंगे। मंदिर को रंगीन बत्तियों से सजाया जा रहा है।
सदर बाजार के स्वर्ण विक्रेता डाॅ. मंदीप किशोर गोयल ने बताया कि कान्हाजी की मूर्ति सोने और चांदी दोनों में खरीदी जा रही है। कान्हाजी की साइज के हिसाब से उनका मुकुट, चेन, पाजेब आदि बनवाकर खरीद रहे हैं। औसतन एक लाख रुपये तक में लड्डू गाेपाल की सोने की मूर्ति मिल जाती है। बाकी उनकी एक्सेसरीज आदि की कीमतें अलग-अलग है। लोग लड्डू गोपाल को हमेशा अपने पूजा घर में रखते हैं, इसलिए सोने चांदी की मूर्तियों को महत्व दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि चांदी के कान्हाजी चार से पांच हजार में मिल रहे हैं। इनके साथ इनका सिंहासन, मुकुट, बांसुरी आदि की कीमतें अलग हैं। चांदी के लड्डू गोपाल के साथ उनकी बांसुरी, चेन, पाजेब आदि कुछ ज्यादा महंगे नहीं, मगर यह डिजाइन पर और कान्हा जी के साइज और वजन पर निर्भर है। चांदी के कान्हा जी की मांग ज्यादा है।
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सजने लगा फूल बाजार
जन्माष्टमी के अवसर पर सेक्टर चार चिंतपूर्णी मंदिर के पास फूल बाजार में गहमा-गहमी नजर आने लगी है। दुकानदारों ने बताया कि पूजा के साथ मंदिरों को सजाने के लिए गेंदे, गुलदाउदी और गुलाब के फूल की बड़ी खेप आई है। मंदिरों में गेंदे की सजावट के साथ-साथ गुलाब और अन्य फूलों की सजावट की जानी है। लोग अपने घरों के मंदिर भी फूलों से सजाएंगे। फूल विक्रेताओं ने बताया कि पूजा के समय सजावट के लिए ज्यादातर लोग गेंदा और गुलाब ही लेते हैं मगर कुछ लोग जरबेरा, आर्किड, एंथोरियम, लिलियम आदि भी सजावट को सुंदर बनाने के लिए लगाते हैं। इसलिए फूलों की मात्रा दोगुनी की गई है। इस वक्त मोगरे के सफेद फूल की खेप भी है, हालांकि जल्द मुर्झाने के कारण, पूजा के दिन ही इसे सजावट के लिए खरीदेंगे। इसकी खुशबू दूर-दूर तक फैल जाती है।
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कान्हा और राधा के रूप में बच्चों ने मनमोहा
शनिवार को बच्चे कान्हा और राधा के वेश में स्कूल पहुंचे। रविवार और सोमवार को स्कूल बंद हैं। ऐसे में शनिवार को शहर के स्कूलों में जन्माष्टमी की धूम रही। सुबह सबेरे स्कूल वैन, बस और अपने माता पिता के साथ कृष्ण बनकर स्कूल जाते बच्चे लोगों को आकर्षित कर रहे थे। छोटे बच्चों के स्कूलों में अधिसंख्य बच्चे राधा, कृष्ण बनकर जाते दिखे।
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कान्हा के लिए फूल बंगला बनाने के लिए वृंदावन से आएंगे कलाकार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जन्माष्टमी पर बाजार से लेकर ऑनलाइन मार्केट में सोने-चांदी से निर्मित लड्डू गाेपाल की धूम है। लड्डू गोपाल के सिंहासन से लेकर मुकुट तक में सोने, चांदी और रत्न जड़े हैं। कुछ सिल्वर प्लेटेड सिंहासन और चांदी के कान्हाजी, बांसुरी और अन्य एक्सेसरीज भी ऑनलाइन मार्केट में ऑन डिमांड है। ऑनलाइन बाजार में चांदी के तरह-तरह के डिजाइनर मुकुट, सिंहासन, राधा कृष्ण, लड्डू गोपाल आदि की मूर्तियां बिक रही हैं। दो से तीन हजार रुपये के बीच छोटे लड्डू गोपाल, 700 से 800 रुपये के बीच बांसुरी के साथ ही इसी कीमत पर पाजेब आदि की ऑनलाइन खरीदारी हो रही है। रेलवे रोड स्थित प्रेम मंदिर में कान्हा का फूल बंगला बनाए जाने की तैयारी है। वृंदावन के कलाकार इसे अंतिम रूप देंगे। मंदिर को रंगीन बत्तियों से सजाया जा रहा है।
सदर बाजार के स्वर्ण विक्रेता डाॅ. मंदीप किशोर गोयल ने बताया कि कान्हाजी की मूर्ति सोने और चांदी दोनों में खरीदी जा रही है। कान्हाजी की साइज के हिसाब से उनका मुकुट, चेन, पाजेब आदि बनवाकर खरीद रहे हैं। औसतन एक लाख रुपये तक में लड्डू गाेपाल की सोने की मूर्ति मिल जाती है। बाकी उनकी एक्सेसरीज आदि की कीमतें अलग-अलग है। लोग लड्डू गोपाल को हमेशा अपने पूजा घर में रखते हैं, इसलिए सोने चांदी की मूर्तियों को महत्व दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि चांदी के कान्हाजी चार से पांच हजार में मिल रहे हैं। इनके साथ इनका सिंहासन, मुकुट, बांसुरी आदि की कीमतें अलग हैं। चांदी के लड्डू गोपाल के साथ उनकी बांसुरी, चेन, पाजेब आदि कुछ ज्यादा महंगे नहीं, मगर यह डिजाइन पर और कान्हा जी के साइज और वजन पर निर्भर है। चांदी के कान्हा जी की मांग ज्यादा है।
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सजने लगा फूल बाजार
जन्माष्टमी के अवसर पर सेक्टर चार चिंतपूर्णी मंदिर के पास फूल बाजार में गहमा-गहमी नजर आने लगी है। दुकानदारों ने बताया कि पूजा के साथ मंदिरों को सजाने के लिए गेंदे, गुलदाउदी और गुलाब के फूल की बड़ी खेप आई है। मंदिरों में गेंदे की सजावट के साथ-साथ गुलाब और अन्य फूलों की सजावट की जानी है। लोग अपने घरों के मंदिर भी फूलों से सजाएंगे। फूल विक्रेताओं ने बताया कि पूजा के समय सजावट के लिए ज्यादातर लोग गेंदा और गुलाब ही लेते हैं मगर कुछ लोग जरबेरा, आर्किड, एंथोरियम, लिलियम आदि भी सजावट को सुंदर बनाने के लिए लगाते हैं। इसलिए फूलों की मात्रा दोगुनी की गई है। इस वक्त मोगरे के सफेद फूल की खेप भी है, हालांकि जल्द मुर्झाने के कारण, पूजा के दिन ही इसे सजावट के लिए खरीदेंगे। इसकी खुशबू दूर-दूर तक फैल जाती है।
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कान्हा और राधा के रूप में बच्चों ने मनमोहा
शनिवार को बच्चे कान्हा और राधा के वेश में स्कूल पहुंचे। रविवार और सोमवार को स्कूल बंद हैं। ऐसे में शनिवार को शहर के स्कूलों में जन्माष्टमी की धूम रही। सुबह सबेरे स्कूल वैन, बस और अपने माता पिता के साथ कृष्ण बनकर स्कूल जाते बच्चे लोगों को आकर्षित कर रहे थे। छोटे बच्चों के स्कूलों में अधिसंख्य बच्चे राधा, कृष्ण बनकर जाते दिखे।