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Gurugram News: पीड़ित को 9 फीसदी ब्याज के साथ बीमा कंपनी देगी रकम
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जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दिया आदेश, बीमा कंपनी ने क्लेम किया था खारिज
45 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। एक बीमांकित की शिकायत की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं कि बीमांकित व्यक्ति को उसके उपचार पर खर्च हुए एक लाख 43 हजार 461 रुपये का 9 प्रतिशत ब्याज दर से भुगतान किया जाए। यदि 45 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगी।
इसके साथ ही बीमा कंपनी को हर्जाने के रूप में 50 हजार और कानूनी खर्च के रूप में 22 हजार रुपये का भुगतान भी वादी को करना होगा। यदि आदेश की पालना नहीं की जाती है कंपनी को जुर्माना व सजा भी भुगतनी होगी। उक्त फैसला जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल व पदेन सदस्य ज्योति सिवाच व खुशविंद्र कौर ने सुनाया है।
अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि बादशाहपुर में रहने वाले उनके मुव्वकिल नारायण सिंह ने रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंश कंपनी से एक मेडिकल पॉलिसी ली हुई थी। नारायण सिंह ने 21 मई 2021 को सेक्टर 56 स्थित प्रतीक्षा अस्पताल में भर्ती होकर अपना उपचार कराया था। उनके उपचार पर 77 हजार 58 रुपये और दवाइयों पर 66 हजार 403 रुपये खर्च हुए थे। जब उन्होंने इंश्योरेंश कंपनी से उपचार और दवाइयों पर आए खर्च का क्लेम किया तो, बीमा कंपनी ने उसे खारिज कर दिया और कहा कि नारायण सिंह पहले से ही धूम्रपान करता था। इस बारे में उसने कंपनी को नहीं बताया।
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अधिवक्ता का कहना है कि हालांकि चिकित्सक ने लिखकर दिया था कि नारायण सिंह दो साल पहले ही धूम्रपान छोड़ चुका था और इसकी जानकारी उसने बीमा कंपनी के एडवाइजर को भी दी थी। एडवाइजर ने इस बारे में कंपनी को लिखकर भी दे दिया था। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने इसको नहीं माना। अधिवक्ता का कहना है कि बीमा कंपनी को लीगल नोटिस भी दिया गया, लेकिन कंपनी ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। इस पर उपभोक्ता को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाने पर बाध्य होना पड़ा।
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45 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। एक बीमांकित की शिकायत की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं कि बीमांकित व्यक्ति को उसके उपचार पर खर्च हुए एक लाख 43 हजार 461 रुपये का 9 प्रतिशत ब्याज दर से भुगतान किया जाए। यदि 45 दिन के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत हो जाएगी।
इसके साथ ही बीमा कंपनी को हर्जाने के रूप में 50 हजार और कानूनी खर्च के रूप में 22 हजार रुपये का भुगतान भी वादी को करना होगा। यदि आदेश की पालना नहीं की जाती है कंपनी को जुर्माना व सजा भी भुगतनी होगी। उक्त फैसला जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल व पदेन सदस्य ज्योति सिवाच व खुशविंद्र कौर ने सुनाया है।
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अधिवक्ता क्षितिज मेहता ने बताया कि बादशाहपुर में रहने वाले उनके मुव्वकिल नारायण सिंह ने रेलिगेयर हेल्थ इंश्योरेंश कंपनी से एक मेडिकल पॉलिसी ली हुई थी। नारायण सिंह ने 21 मई 2021 को सेक्टर 56 स्थित प्रतीक्षा अस्पताल में भर्ती होकर अपना उपचार कराया था। उनके उपचार पर 77 हजार 58 रुपये और दवाइयों पर 66 हजार 403 रुपये खर्च हुए थे। जब उन्होंने इंश्योरेंश कंपनी से उपचार और दवाइयों पर आए खर्च का क्लेम किया तो, बीमा कंपनी ने उसे खारिज कर दिया और कहा कि नारायण सिंह पहले से ही धूम्रपान करता था। इस बारे में उसने कंपनी को नहीं बताया।
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अधिवक्ता का कहना है कि हालांकि चिकित्सक ने लिखकर दिया था कि नारायण सिंह दो साल पहले ही धूम्रपान छोड़ चुका था और इसकी जानकारी उसने बीमा कंपनी के एडवाइजर को भी दी थी। एडवाइजर ने इस बारे में कंपनी को लिखकर भी दे दिया था। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने इसको नहीं माना। अधिवक्ता का कहना है कि बीमा कंपनी को लीगल नोटिस भी दिया गया, लेकिन कंपनी ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। इस पर उपभोक्ता को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाने पर बाध्य होना पड़ा।