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मध्य वर्ग को सरकार ने किया निराश
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गुरुग्राम। भीमनगर निवासी रोहताश शर्मा के परिवार को बड़ी उम्मीद थी कि पांच राज्यों के चुनाव से पहले आ रहे इस बजट से मध्यवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। टीवी पर पूरा बजट भाषण सुनने के बाद ये संयुक्त परिवार एक बार फिर अपने काम में जुट गया। परिवार के मुखिया बोले कि मध्य वर्ग शायद केंद्र सरकार के फोकस में नहीं है, इसलिए इस वर्ग की मुश्किलें सरकार को समझ में नहीं आ रहीं हैं और यही वर्ग महंगाई से सबसे ज्यादा परेशान है। इतना कहकर वह अपनी चश्मे की दुकान पर चले गए।
रोहताश गुरुग्राम में चश्मे के लैंस के कारोबार से जुड़े हैं। बेटा प्रतीक रियल एस्टेट कंपनी में कार्यरत है। दोनों को मिलाकर परिवार की कुल आय लगभग 70 हजार रुपये (आयकर देने के बाद) तक होती है, जिसमें रसोई का खर्च लगभग 15000, कार की ईएमआई 8000, बच्चों की पढ़ाई 15000, पेट्रोल और सीएनजी खर्च लगभग 5000, मेडिकल में 5000, बीमे की किस्तों में 10000 रुपये खर्च हो जाते हैं। दो हजार रुपये हर महीने अलग से खर्च होते हैं। इस तरह से लगभग 60 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। खींचतान कर लगभग 10000 रुपये की ही बचत हो पाती है, जिससे भविष्य में कोई बड़ा काम करना मुश्किल है।
प्रतीक की मां पूनम शर्मा ने कहा कि मध्य वर्ग के लिए आयुष्मान योजना में आय सीमा की शर्त को हटना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रतीक की पत्नी सोनाक्षी ने कहा कि जब स्कूल नहीं खुले हैं तो पूरी फीस कैसे वसूली जा रही है, इस पर रोक लगे और केवल ट्यूशन फीस ली जाए। ऑनलाइन क्लास में हमारा मोबाइल डाटा, वाईफाई, कंप्यूटर, बिजली, एसी का खर्च बढ़ा है। इससे बजट बिगड़ गया है।
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प्रतीक की बहन प्रेरणा कहती हैं कि मेडिकल से लेकर रसोई तक सब कुछ महंगा हो रहा है। इस पर कोई नियंत्रण नहीं हुआ है। आयकर के स्लैब में कोई राहत नहीं दी गई। इसमें ही छूट मिलती तो कुछ राहत होती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कोरोना काल के कारण पहले ही काम धंधा रफ्तार नहीं पकड़ रहा। रियल एस्टेट से लेकर बाजार तक खरीदारी का माहौल बहुत सुस्त है।
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रोहताश गुरुग्राम में चश्मे के लैंस के कारोबार से जुड़े हैं। बेटा प्रतीक रियल एस्टेट कंपनी में कार्यरत है। दोनों को मिलाकर परिवार की कुल आय लगभग 70 हजार रुपये (आयकर देने के बाद) तक होती है, जिसमें रसोई का खर्च लगभग 15000, कार की ईएमआई 8000, बच्चों की पढ़ाई 15000, पेट्रोल और सीएनजी खर्च लगभग 5000, मेडिकल में 5000, बीमे की किस्तों में 10000 रुपये खर्च हो जाते हैं। दो हजार रुपये हर महीने अलग से खर्च होते हैं। इस तरह से लगभग 60 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। खींचतान कर लगभग 10000 रुपये की ही बचत हो पाती है, जिससे भविष्य में कोई बड़ा काम करना मुश्किल है।
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प्रतीक की मां पूनम शर्मा ने कहा कि मध्य वर्ग के लिए आयुष्मान योजना में आय सीमा की शर्त को हटना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रतीक की पत्नी सोनाक्षी ने कहा कि जब स्कूल नहीं खुले हैं तो पूरी फीस कैसे वसूली जा रही है, इस पर रोक लगे और केवल ट्यूशन फीस ली जाए। ऑनलाइन क्लास में हमारा मोबाइल डाटा, वाईफाई, कंप्यूटर, बिजली, एसी का खर्च बढ़ा है। इससे बजट बिगड़ गया है।
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प्रतीक की बहन प्रेरणा कहती हैं कि मेडिकल से लेकर रसोई तक सब कुछ महंगा हो रहा है। इस पर कोई नियंत्रण नहीं हुआ है। आयकर के स्लैब में कोई राहत नहीं दी गई। इसमें ही छूट मिलती तो कुछ राहत होती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कोरोना काल के कारण पहले ही काम धंधा रफ्तार नहीं पकड़ रहा। रियल एस्टेट से लेकर बाजार तक खरीदारी का माहौल बहुत सुस्त है।