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Gurugram News: नींव होगी दमदार, जब गतिविधियां होंगी शिक्षा का आधार
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गतिविधि आधारित शिक्षण से बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मौलिक शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए जारी सप्ताह-5 के सीआरपी मॉड्यूल में इस बार गतिविधि आधारित शिक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। यह मॉड्यूल 11 मई से 16 मई तक चलेगी। इसका उद्देश्य बच्चों की बुनियादी साक्षरता, भाषा दक्षता और गणितीय समझ को मजबूत करना है। गतिविधियां आधारित शिक्षा होने से विद्यार्थियों की नींव दमदार होगी।
मॉड्यूल के तहत शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पढ़ाई को रोचक और सरल बनाने के लिए खेल, चित्र, कहानी, संवाद और दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों का उपयोग करें। कक्षा पहली और दूसरी में भाषा पहचान, ध्वनि ज्ञान, संख्या गणना और वस्तुओं की तुलना जैसी विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। वहीं तीसरी से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को पहाड़े, अनुच्छेद लेखन, व्याकरण, भिन्न और मापन जैसी गतिविधियों के जरिए क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारियों के अनुसार नई शिक्षण योजना का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में समझ, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास विकसित करना है, ताकि वे सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मौलिक शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए जारी सप्ताह-5 के सीआरपी मॉड्यूल में इस बार गतिविधि आधारित शिक्षा पर विशेष फोकस किया गया है। यह मॉड्यूल 11 मई से 16 मई तक चलेगी। इसका उद्देश्य बच्चों की बुनियादी साक्षरता, भाषा दक्षता और गणितीय समझ को मजबूत करना है। गतिविधियां आधारित शिक्षा होने से विद्यार्थियों की नींव दमदार होगी।
मॉड्यूल के तहत शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पढ़ाई को रोचक और सरल बनाने के लिए खेल, चित्र, कहानी, संवाद और दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों का उपयोग करें। कक्षा पहली और दूसरी में भाषा पहचान, ध्वनि ज्ञान, संख्या गणना और वस्तुओं की तुलना जैसी विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। वहीं तीसरी से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को पहाड़े, अनुच्छेद लेखन, व्याकरण, भिन्न और मापन जैसी गतिविधियों के जरिए क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
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जिला शिक्षा अधिकारियों के अनुसार नई शिक्षण योजना का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों में समझ, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास विकसित करना है, ताकि वे सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
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