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स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बाद भी भ्रूण लिंग जांच का कारोबार
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गुरुग्राम। भ्रूण लिंग जांच के कारोबार को रोकने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न गिरोहों का पर्दाफाश भी किया है, बावजूद इसके गिरोह बैखौफ होकर अपने कार्य को अंजाम देते रहे हैं।
स्थिति यह है कि पिछले 16 दिन में ही स्वास्थ्य विभाग ने दो गिरोह का पर्दाफाश किया है। वहीं, अगस्त से अब तक भ्रूण लिंग जांच के करीब पांच मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से सभी में जिले की महिलाओं को दिल्ली, बहादुरगढ़ व गाजियाबाद समेत अन्य जगहों पर ले जाकर भ्रूण लिंग जांच के कार्य को अंजाम दिया जाता था। इससे पहले 26, 27 अगस्त, 10 अक्तूबर व 26 नवंबर को भ्रूण लिंग जांच के मामले सामने आए थे। पिछले एक साल की बात करें तो भ्रूण लिंग जांच के 10 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। रविवार को भी एक मामला सामने आया है, जिसमें चौमा गांव स्थित एक क्लीनिक चलाने वाले दंपति भ्रूण लिंग जांच के कार्य को अंजाम दे रहे थे।
पूछताछ के बाद आरोपियों को छोड़ा
भ्रूण लिंग जांच गिरोह के बेखौफ होने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग जितनी तत्परता गिरोह को पकड़ने में दिखाता है। उतनी ही तेजी से पुलिस व स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले को खत्म भी कर दिया जाता है। ताजा मामले में भी यही हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से तीन आरोपियों के खिलाफ मामला तो दर्ज कराया गया, लेकिन सभी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जांच के कार्य में हमेशा ही अनुभवी डॉक्टर शामिल होते हैं, लेकिन अब तक किसी भी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है। आम तौर पर 30-35 हजार रुपये से लेकर 50-60 हजार रुपये तक वसूल लिए जाते हैं। वहीं, कई बार गिरोह में शामिल दलाल मुख्य जांच करने वालों को निर्धारित पैसे देकर ग्राहकों से मनमाने पैसे वसूलते हैं।
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स्थिति यह है कि पिछले 16 दिन में ही स्वास्थ्य विभाग ने दो गिरोह का पर्दाफाश किया है। वहीं, अगस्त से अब तक भ्रूण लिंग जांच के करीब पांच मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से सभी में जिले की महिलाओं को दिल्ली, बहादुरगढ़ व गाजियाबाद समेत अन्य जगहों पर ले जाकर भ्रूण लिंग जांच के कार्य को अंजाम दिया जाता था। इससे पहले 26, 27 अगस्त, 10 अक्तूबर व 26 नवंबर को भ्रूण लिंग जांच के मामले सामने आए थे। पिछले एक साल की बात करें तो भ्रूण लिंग जांच के 10 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। रविवार को भी एक मामला सामने आया है, जिसमें चौमा गांव स्थित एक क्लीनिक चलाने वाले दंपति भ्रूण लिंग जांच के कार्य को अंजाम दे रहे थे।
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पूछताछ के बाद आरोपियों को छोड़ा
भ्रूण लिंग जांच गिरोह के बेखौफ होने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग जितनी तत्परता गिरोह को पकड़ने में दिखाता है। उतनी ही तेजी से पुलिस व स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले को खत्म भी कर दिया जाता है। ताजा मामले में भी यही हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से तीन आरोपियों के खिलाफ मामला तो दर्ज कराया गया, लेकिन सभी को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जांच के कार्य में हमेशा ही अनुभवी डॉक्टर शामिल होते हैं, लेकिन अब तक किसी भी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है। आम तौर पर 30-35 हजार रुपये से लेकर 50-60 हजार रुपये तक वसूल लिए जाते हैं। वहीं, कई बार गिरोह में शामिल दलाल मुख्य जांच करने वालों को निर्धारित पैसे देकर ग्राहकों से मनमाने पैसे वसूलते हैं।
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