{"_id":"661aed3139c62cf83b0aa08b","slug":"the-agents-who-conducted-kidney-transplant-had-an-agreement-with-the-hospital-management-gurgaon-news-c-24-1-noi1094-29068-2024-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले एजेंटों का अस्पताल प्रबंधन से था करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले एजेंटों का अस्पताल प्रबंधन से था करार
विज्ञापन
एसीबी ने अस्पताल प्रबंधन से मांगी एमओयू की कॉपी, लेन-देने का पूरा ब्यौरा
सर्जरी करने वाले डाक्टरों को मिलने वाले भुगतान की भी मांगी जानकारी
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले एजेंटों ने अस्पताल प्रबंधन से बाकायदा समझौता कर रखा था। इसमें एक ट्रांसप्लांट पर उनको मिलने वाले कमीशन का निर्धारण होता था। एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से डाक्टरों व अस्पताल समन्वयकों से पूछताछ के बाद जयपुर के फोर्टिस व ईएचसीसी अस्पताल के साथ अन्य संबंधित अस्पताल प्रबंधन से करार की कॉपी मांगी गई है। इसके साथ ही एसीबी ने अस्पताल प्रबंधन से होने वाली सर्जरी के पैकेज व वेतन के पैकेज की जानकारी भी मांगी है।
एंटी करप्शन ब्यूरो की अब तक की छानबीन में भ्रष्टाचार का खुलासा तो हुआ है इसके साथ ही कानून की खामियों से खेलने की बात भी सामने आई है। एसीबी के अधिकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक प्रत्यारोपण में कितने पैसे डाक्टर को दिए जाते थे और कितने पैसे ग्राहक लाने वाले एजेंट को मिलते थे, कितने पैसे किडनी प्रत्यारोपित कराने वाले से लिए जाते थे और कितने पैसे एनओसी जारी करने वालों को मिलते थे इन सब का ब्यौरा मांगा गया है।
-- --
दो साल का बैंक का ब्यौरा उगलेगा सच
एसीबी की जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल लेने के बाद बैंक से उनके दो साल के लेन-देन का ब्यौरा मांगा गया है। किसके खाते में कितने पैसे आए हैं। एसीबी सर्जरी करने वाले डाक्टर, अस्पताल प्रबंधन, जेल जा चुके आरोपी के बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है।
विज्ञापन
-- --
अलग-अलग किस्तों में पैसे लेते थे एजेंट
एसीबी की छानबीन में पता चला है कि किडनी लगवाने वालों से तीन किस्तों में पैसा लिया जाता था। एक किस्त का पैसा डोनर को देने के साथ अस्पताल प्रबंधन व एनओसी वाले को दिया जाता था। दूसरी किस्त आपरेशन के बाद मिलती थी। जबकि तीसरी किस्त अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दी जाती थी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी कमीशन का चेक नंबर एक में एजेंटों को दिया जाता था।
मामले की जांच में चार्टेड अकाउंटेट से ली जाएगी मदद
एसीबी सूत्रों के अनुसार बैंक डिटेल व अस्पताल प्रबंधन की ओर से मिलने वाली जानकारी के बाद आवश्यकतानुसार सीए हायर किया जाएगा। कुछ टेक्निकल प्वाइंट हैं जिसका खुलासा सीए की ओर से ही हो सकता है। एंटी करप्शन ब्यूरो इस मामले के आरोपियों को किसी भी हालत में अदालत की ओर से सजा दिलाने का प्रयास करेगी।
-- --
गेस्ट हाउस में है किडनी कांड में फंसे सभी लोग
किडनी कांड में फंसे सभी पांच लोग व उनके परिजन सेक्टर 39 के गेस्ट हाउस में हैं। उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उपचार के लिए उनका अस्पताल आना-जाना लगा रहता है। सदर थाना पुलिस की ओर से उनके बयान अदालत में दर्ज कराए जा चुके हैं। उनका पासपोर्ट व मोबाइल सदर थाना पुलिस के कब्जे में है।
-- --
वर्जन
किडनी प्रत्यारोपण में सर्जरी करने वाले डाक्टर, केस लाने वाले एजेंट व अस्पताल प्रबंधन के बीच हुए करार व पैसे के लेन-देन का ब्यौरा मांगा गया है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से एजेंटों के बीच हुए करार की प्रति मांगी गई है। - भूपेन्द्र कुमार, एडिशन एसपी, एसीबी, जयपुर।
विज्ञापन
सर्जरी करने वाले डाक्टरों को मिलने वाले भुगतान की भी मांगी जानकारी
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले एजेंटों ने अस्पताल प्रबंधन से बाकायदा समझौता कर रखा था। इसमें एक ट्रांसप्लांट पर उनको मिलने वाले कमीशन का निर्धारण होता था। एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से डाक्टरों व अस्पताल समन्वयकों से पूछताछ के बाद जयपुर के फोर्टिस व ईएचसीसी अस्पताल के साथ अन्य संबंधित अस्पताल प्रबंधन से करार की कॉपी मांगी गई है। इसके साथ ही एसीबी ने अस्पताल प्रबंधन से होने वाली सर्जरी के पैकेज व वेतन के पैकेज की जानकारी भी मांगी है।
एंटी करप्शन ब्यूरो की अब तक की छानबीन में भ्रष्टाचार का खुलासा तो हुआ है इसके साथ ही कानून की खामियों से खेलने की बात भी सामने आई है। एसीबी के अधिकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक प्रत्यारोपण में कितने पैसे डाक्टर को दिए जाते थे और कितने पैसे ग्राहक लाने वाले एजेंट को मिलते थे, कितने पैसे किडनी प्रत्यारोपित कराने वाले से लिए जाते थे और कितने पैसे एनओसी जारी करने वालों को मिलते थे इन सब का ब्यौरा मांगा गया है।
विज्ञापन
दो साल का बैंक का ब्यौरा उगलेगा सच
एसीबी की जांच के दौरान आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल लेने के बाद बैंक से उनके दो साल के लेन-देन का ब्यौरा मांगा गया है। किसके खाते में कितने पैसे आए हैं। एसीबी सर्जरी करने वाले डाक्टर, अस्पताल प्रबंधन, जेल जा चुके आरोपी के बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है।
विज्ञापन
अलग-अलग किस्तों में पैसे लेते थे एजेंट
एसीबी की छानबीन में पता चला है कि किडनी लगवाने वालों से तीन किस्तों में पैसा लिया जाता था। एक किस्त का पैसा डोनर को देने के साथ अस्पताल प्रबंधन व एनओसी वाले को दिया जाता था। दूसरी किस्त आपरेशन के बाद मिलती थी। जबकि तीसरी किस्त अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दी जाती थी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी कमीशन का चेक नंबर एक में एजेंटों को दिया जाता था।
मामले की जांच में चार्टेड अकाउंटेट से ली जाएगी मदद
एसीबी सूत्रों के अनुसार बैंक डिटेल व अस्पताल प्रबंधन की ओर से मिलने वाली जानकारी के बाद आवश्यकतानुसार सीए हायर किया जाएगा। कुछ टेक्निकल प्वाइंट हैं जिसका खुलासा सीए की ओर से ही हो सकता है। एंटी करप्शन ब्यूरो इस मामले के आरोपियों को किसी भी हालत में अदालत की ओर से सजा दिलाने का प्रयास करेगी।
गेस्ट हाउस में है किडनी कांड में फंसे सभी लोग
किडनी कांड में फंसे सभी पांच लोग व उनके परिजन सेक्टर 39 के गेस्ट हाउस में हैं। उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उपचार के लिए उनका अस्पताल आना-जाना लगा रहता है। सदर थाना पुलिस की ओर से उनके बयान अदालत में दर्ज कराए जा चुके हैं। उनका पासपोर्ट व मोबाइल सदर थाना पुलिस के कब्जे में है।
वर्जन
किडनी प्रत्यारोपण में सर्जरी करने वाले डाक्टर, केस लाने वाले एजेंट व अस्पताल प्रबंधन के बीच हुए करार व पैसे के लेन-देन का ब्यौरा मांगा गया है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से एजेंटों के बीच हुए करार की प्रति मांगी गई है। - भूपेन्द्र कुमार, एडिशन एसपी, एसीबी, जयपुर।

शामली आठठे वाल में पूजा अर्चना करते श्रदांलू