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चुनाव आयोग की सक्रियता ने फिर बढ़ाई पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट
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गुरुग्राम। प्रदेश में एक बार फिर पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। पंचायत चुनावों को लेकर निर्वाचन विभाग के साथ पंचायत विभाग ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दो दिन पहले प्रदेश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त धनपत सिंह ने रेवाड़ी में अधिकारियों के साथ बैठक कर यह साफ संकेत दिया है कि निर्वाचन आयोग हाल-फिलहाल में ही पंचायत चुनाव कराने को एकदम तैयार हैं। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद ही लिया जा सकता है। लेकिन जिस तरह मुख्य चुनाव आयुक्त जिलावार फिडबैक ले रहे हैं, उससे निकट भविष्य में पंचायत चुनाव की संभावना प्रबल हो रही है।
बता दें कि प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल फरवरी में पूरा हो गया था। 26 फरवरी के बाद से पंचायतों का कार्य प्रशासक के तौर पर प्रशासनिक अधिकारी संभाल रहे हैं। हालांकि फरवरी में मई तक पंचायत चुनावों के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन मार्च में एकदम से कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण एकदम से ही विराम लग गया। जून के पहले सप्ताह में ही जिस प्रकार कोरोना की रफ्तार नग्ण्य होने लगी है तो ऐसे में प्रदेश में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट ने जोर पकड़ लिया है।
चार महीने से रुका है ग्रामीण विकास का पहिया
प्रदेश में पिछले चार महीने से ग्रामीण विकास का पहिया रुका हुआ है। पंचायतों से सारे अधिकार लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को दे दिए गए है। ऐसे में गांवों में जरूरत के मुताबिक विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश के साथ गुरुग्राम जिले की बात करें तो अनेक गांव ऐसे हैं जहां कई विकास कार्यों की योजनाएं तो पंचायतों ने तैयार कर ली थी, लेकिन कार्यकाल पूरी होने के बाद वो नहीं हो पाए। ऐसे में नई पंचायतों के गठन के बाद इन विकास योजनाओं के सिरे चढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही थी। लेकिन पंचायत चुनावों में देरी ने इस उम्मीद को तोड़ दिया।
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हम तैयार, सरकार के आदेश का इंतजार : सारवान
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र सिंह सारवान ने कहा कि निश्चित ही प्रदेश में पंचायत चुनाव सबसे अहम कार्य है। अगर कोरोना महामारी कहर नहीं बरपाती तो शायद चुनावों में ज्यादा वक्त नहीं लगता। उन्होंने कहा कि पंचायत विभाग तैयार है बस सरकार के आदेश का इंतजार है। उन्होंने कहा कि मानेसर नगर निगम के गठन के बाद गुरुग्राम जिले में पंचायतों की संख्या भी घट गई है। पहले 203 पंचायतें थीं जो अब घटकर 166 रह गई है। विभाग अपने स्तर पर चुनावों के लिए तैयार है।
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बता दें कि प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल फरवरी में पूरा हो गया था। 26 फरवरी के बाद से पंचायतों का कार्य प्रशासक के तौर पर प्रशासनिक अधिकारी संभाल रहे हैं। हालांकि फरवरी में मई तक पंचायत चुनावों के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन मार्च में एकदम से कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण एकदम से ही विराम लग गया। जून के पहले सप्ताह में ही जिस प्रकार कोरोना की रफ्तार नग्ण्य होने लगी है तो ऐसे में प्रदेश में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट ने जोर पकड़ लिया है।
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चार महीने से रुका है ग्रामीण विकास का पहिया
प्रदेश में पिछले चार महीने से ग्रामीण विकास का पहिया रुका हुआ है। पंचायतों से सारे अधिकार लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को दे दिए गए है। ऐसे में गांवों में जरूरत के मुताबिक विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। प्रदेश के साथ गुरुग्राम जिले की बात करें तो अनेक गांव ऐसे हैं जहां कई विकास कार्यों की योजनाएं तो पंचायतों ने तैयार कर ली थी, लेकिन कार्यकाल पूरी होने के बाद वो नहीं हो पाए। ऐसे में नई पंचायतों के गठन के बाद इन विकास योजनाओं के सिरे चढ़ने की उम्मीद लगाई जा रही थी। लेकिन पंचायत चुनावों में देरी ने इस उम्मीद को तोड़ दिया।
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हम तैयार, सरकार के आदेश का इंतजार : सारवान
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र सिंह सारवान ने कहा कि निश्चित ही प्रदेश में पंचायत चुनाव सबसे अहम कार्य है। अगर कोरोना महामारी कहर नहीं बरपाती तो शायद चुनावों में ज्यादा वक्त नहीं लगता। उन्होंने कहा कि पंचायत विभाग तैयार है बस सरकार के आदेश का इंतजार है। उन्होंने कहा कि मानेसर नगर निगम के गठन के बाद गुरुग्राम जिले में पंचायतों की संख्या भी घट गई है। पहले 203 पंचायतें थीं जो अब घटकर 166 रह गई है। विभाग अपने स्तर पर चुनावों के लिए तैयार है।