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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Terrorist attack in Pahalgam... Mehndi did not come off my hands and my granddaughter's world was ruined.

Gurugram News: पहलगाम में आतंकी हमला.... हाथों से मेहंदी नहीं उतरी और उजड़ गया मेरी पोती का संसार

Thu, 24 Apr 2025 12:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 24 Apr 2025 12:09 AM IST
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Terrorist attack in Pahalgam... Mehndi did not come off my hands and my granddaughter's world was ruined.
हाथों से मेहंदी नहीं उतरी और उजड़ गया मेरी पोती का संसार
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- विनय की पत्नी हिमांशी की दादी और बुआ का रो-रोकर बुरा हाल, नम आंखों संग दादी ने बयां किया दर्द
- पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए नेवी के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के ससुराल में मातम का माहौल

सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। 15 दिन में मेरी पोती का संसार उजड़ गया, क्या करूं नियति को शायद यही मंजूर था, अब क्या होगा मेरी पोती का... यह दर्द था पहलगाम में आतंकियों की गोली का शिकार बने नेवी में लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी की दादी का। घर में दादी फूट-फूटकर रो रहीं थी जबकि अन्य परिजन भी मातम में डूबे हुए थे।
लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का विवाह 16 अप्रैल को गुरुग्राम की हिमांशी से हुआ था और उनका ससुराल गुरुग्राम के सेक्टर-47 में स्थित है। इस घटना के बाद से यहां परिवार को ढांढस बांधने के लिए लोगों का आना-जाना जारी रहा। रोते हुए दादी ने अमर उजाला टीम को बताया कि जनवरी में विनय और उनकी पोती हिमांशी का रिश्ता पक्का हुआ था। छह अप्रैल को दोनों की सगाई हुई और 16 अप्रैल को दोनों की धूमधाम से शादी की गई मगर आज सात दिन बाद उनकी पोती की पूरी दुनिया ही खत्म हो गई। अभी तक तो उसके हाथों की मेहंदी भी नहीं उतरी थी।
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कुछ ऐसा ही हाल हिमांशी की बुआ बबीता का भी था। वह भी बात करते-करते रोती रहीं। दूसरे परिजन दादी और बुआ को संभालने और ढांढस बांधने में जुटे हुए थे। बुआ ने बताया कि विनय और हिमांशी के पिता पहले से दोस्त थे और इसी दोस्ती ने पारिवारिक रिश्ते का रूप ले लिया था। दोनों परिवार इस रिश्ते से बहुत खुश थे मगर हमें क्या पता था कि इन खुशियों को ग्रहण लगने वाला है।
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उन्होंने बताया कि हमले की खबर मिलते ही हिमांशी के माता-पिता और भाई तुरंत कश्मीर के लिए रवाना हो गए और परिवार पूरी तरह से सदमे में आ गया। काफी देर तक तो समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है, सभी बदहवास इधर-उधर फोन घुमाकर हालात जानने की कोशिश करते रहे। उनके अनुसार उनका दामाद विनय बहुत खुशमिजाज और जिम्मेदार लड़का था। शादी के बाद 20 अप्रैल को वह पहली बार गुरुग्राम आया था। विनय और हिमांशी 21 अप्रैल को आईजीआई एयरपोर्ट से कश्मीर घूमने के लिए रवाना हो गए थे। उधर हिमांशी के घर में मातम का माहौल छाया रहा।
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