फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Tariff: Units dependent only on exports to the US are at risk of closure

टैरिफ : सिर्फ अमेरिका में निर्यात पर निर्भर इकाइयों पर बंदी का खतरा

Fri, 29 Aug 2025 12:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 29 Aug 2025 12:09 AM IST
विज्ञापन
Tariff: Units dependent only on exports to the US are at risk of closure
गुरुग्राम और मानेसर से गारमेंट, लेदर और ऑटोमोबाइल का हो रहा है निर्यात
विज्ञापन



15989 मिलियन यूएस डॉलर का था देश से गारमेंट निर्यात
5531 मिलियन यूएस डॉलर गारमेंट का तीन माह में हुआ निर्यात
08 प्रतिशत की बढ़ोतरी अप्रैल से जुलाई के बीच हुई
983 मिलियन डॉलर का निर्यात सिर्फ अमेरिका को



संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुरुग्राम और मानेसर के परिधान और लेदर गारमेंट, एक्ससेरीज का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है। कुछ निर्यातकों ने ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के फैसले को घातक बताया है तो कुछ अभी इस पर पुनर्विचार के इंतजार में हैं। जो इकाइयां केवल अमेरिकी बाजार में गारमेंट का निर्यात कर रही हैं सबसे बड़ा संकट उनके सामने है। उन पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है वहीं एमएसएमई उद्योग समूह सरकार से नए बाजारों को तलाशने की उम्मीद में हैं।
अमेरिकी टैरिफ के खतरे से गुरुग्राम और मानेसर की गारमेंट इकाइयों के ऑर्डर अधर में हैं। निर्यातकों को चिंता है कि अमेरिका परिधान, लेदर का एक बड़ा खरीदार है। भारतीय रेडीमेड गारमेंट का सबसे ज्यादा निर्यात अमेरिका में है। हर साल 14 फीसदी की बढ़ोतरी अमेरिका के लिए निर्यात में हो रही है। इस साल तीन माह में 5531 मिलियन यूएस डॉलर के निर्यात में अमेरिका को 983.4 मिलियन यूएस डॉलर का निर्यात हो चुका है।
विज्ञापन



नए बाजारों की तलाश में मदद दे सरकार
अमेरिकी बाजार पर पूरी तरह से निर्भर निर्यातकों ने नए बाजारों की तलाश में सरकार से सहयोग मांगा है। गारमेंट निर्यातकों के मुताबिक जिन देशों में भारतीय रेडीमेड गारमेंट की मांग तेज हो रही है उन देशों पर फोकस किया जा सकता है। इनमें यूरोपीय देशों के साथ मध्य पूर्व के देश हैं। निर्यातकों के मुताबिक अमेरिकी बाजार के टैरिफ पर सरकार हस्तक्षेप करे और निदान निकाले। लेदर निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ बढ़ने का बोझ वह नहीं उठा पाएंगे और इकाइयों पर भी काफी बुरा असर पड़ेगा। लेदर और गारमेंट दोनों श्रम बाहुल्य वाले उद्योग हैं। इकाइयों का काम कम होने से बेरोजगारी बढ़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन



इन बाजारों में हैं संभावनाएं
देश निर्यात में बढ़ोतरी
यूएई 14 %
जर्मनी 20.7%
पोलेंड 44 %
इटली 26.1%
स्पेन 11%
यूके 5.6%

अमेरिकी खरीदार को हमारे उत्पाद करीब 60 प्रतिशत ज्यादा कीमतों में मिलेंगे। ऐसे में कोई हमसे माल क्यों लेगा। निर्यात 80 प्रतिशत तक नीचे जा चुका है। जो तैयार माल है उसे वे लेंगे या नहीं यह संशय है। अगर हालात ऐसे रहे तो करीब 150 निर्यात इकाइयां बंद करनी पड़ सकती हैं।
- संजय कालरा, सान्या इंटरनेशनल, गारमेंट निर्यातक


बायर्स 30 प्रतिशत तक का डिस्काउंट मांग रहे हैं क्योंकि उन पर 60 प्रतिशत टैरिफ लगा है। गारमेंट की ज्यादातर इकाइयां अमेरिका को निर्यात करती हैं। दूसरी मार्केट में मात्रा का भी प्रश्न होगा। छोटे-छोटे देशों में निर्यात के मुकाबले बड़ी मात्रा और कीमत का निर्यात बेहतर होता है। थर्ड पार्टी भी इससे प्रभावित हैं।

- संजय बंसल, अध्यक्ष दिल्ली एनसीआर, सिफ्ली एम्ब्रॉयडरी मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन

हम समय पर और क्वालिटी चीजें देते हैं इसलिए भी हमारी साख है। अगर टैरिफ कम न हुआ तो अगले छह महीने में अमेरिका से निर्यात खत्म हो जाएगा। लेदर मार्केट में टर्की और इटली भी हैं मगर उनके उत्पाद के अलग वर्ग के खरीदार हैं।


- सुशील सिंगला, डिस्कवरी लेदर, निर्यातक


हमारा एक शिपमेंट पोर्ट पर है, एक आर्डर तैयार हो रहा है। एक ऑर्डर होल्ड पर है। पूरा व्यापार अमेरिका पर निर्भर है। एमएसएमई इकाइयों की सरकार को मदद करनी चाहिए।

-सुमन चावला, उपाध्यक्ष मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed