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गुरुग्राम: नगर निगम में 180 करोड़ रुपये का विज्ञापन घोटाला, एसआईटी करेगी जांच
Sun, 27 Jun 2021 07:45 PM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गुरुग्राम
अमर उजाला ब्यूरो, गुरुग्राम
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jun 2021 07:45 PM IST
सार
हरियाणा के लोकायुक्त न्यायमूर्ति नवल किशोर अग्रवाल ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि नगर निगम के अधिकारियों की विज्ञापन एजेंसियों के साथ 2010 से 2015 तक सैकड़ों करोड़ के गबन के लिए मिलीभगत साफ तौर पर नजर आ रही है।
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घोटाला
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
गुरुग्राम नगर निगम में हुए विज्ञापन घोटाले पर हरियाणा के लोकायुक्त ने बड़ा निर्णय लेते हुए एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित कर जांच का आदेश दिया है। कथित तौर पर गुरुग्राम नगर निगम में 180 करोड़ रुपये का विज्ञापन घोटाला हुआ है, जिसमें निगम अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है।
शिकायतकर्ता व मानव आवाज संस्था गुरुग्राम के संयोजक एडवोकेट अभय जैन के मुताबिक, एसआईटी में एक सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और नगर निगम के दो सेवानिवृत्त सक्षम अधिकारियों को शामिल किया गया है। एडवोकेट अभय जैन ने वर्ष 2015 में लोकायुक्त हरियाणा के समक्ष नगर निगम गुरुग्राम के खिलाफ बड़े मॉल मालिकों और बिल्डरों से विज्ञापन कर के रूप में 180 करोड़ रुपये की वसूली न करने की शिकायत दर्ज कराई थी।
2010 से 2015 के बीच हुआ गड़बड़झाला
हरियाणा के लोकायुक्त न्यायमूर्ति नवल किशोर अग्रवाल ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि नगर निगम के अधिकारियों की विज्ञापन एजेंसियों के साथ 2010 से 2015 तक सैकड़ों करोड़ के गबन के लिए मिलीभगत साफ तौर पर नजर आ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भ्रष्टाचार ने राज्य के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में अपना जाल फैला लिया है। यह देश के निवेश और विकास की वृद्धि में एक बाधा है। लोकायुक्त ने आदेश में कहा है कि एसआईटी की जांच में जो भी दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक/विभागीय कार्रवाई करने के अलावा उन अधिकारियों से बकाया की वसूली भी की जाए।
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180 करोड़ की करनी थी वसूली
शिकायतकर्ता अभय जैन ने बताया कि नगर निगम गुरुग्राम ने 2015 में एक आरटीआई में जवाब दिया था कि उसको विज्ञापन एजेंसियों से 180 करोड़ रुपये की वसूली करनी थी। इसी आधार पर उन्होंने 2015 में लोकायुक्त में एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि नगर निगम के अधिकारियों ने विज्ञापन एजेंसियों के साथ मिलकर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया है। शिकायतकर्ता अभय जैन ने अपनी शिकायत में कुछ कंपनियों और उनकी देय राशि का खुलासा भी किया है।
ये कंपनियां शामिल
शिकायतकर्ता के मुताबिक विज्ञापन का कर न देने वलों में डीएलएफ साइबर सिटी डेवलपर्स 59 करोड़ 37 लाख, डीएलएफ ऑफिस डेवलपर 23 करोड़ 38 लाख, रेनकॉन पार्टनर्स, झंडेवालान एक्सटेंशन नई दिल्ली 23 करोड़ 62 लाख विज्ञापन संचार प्राइवेट लिमिटेड 16 करोड़ 95 लाख, एंबिएंस मॉल 11 करोड़ 8 लाख डीएलएफ कमर्शियल एंटरप्राइजेज 8 करोड़ 97 लाख, डीएलएफ लिमिटेड गुरुग्राम 7 करोड़ 20 लाख, पैंटालून रिटेल लिमिटेड 3 करोड़, एनएसआर फार्म लिमिटेड 2 करोड़ 91 लाख, सहारा इंडिया कमर्शियल लिमिटेड 1 करोड़ 65 लाख, शामिल है।
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शिकायतकर्ता व मानव आवाज संस्था गुरुग्राम के संयोजक एडवोकेट अभय जैन के मुताबिक, एसआईटी में एक सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और नगर निगम के दो सेवानिवृत्त सक्षम अधिकारियों को शामिल किया गया है। एडवोकेट अभय जैन ने वर्ष 2015 में लोकायुक्त हरियाणा के समक्ष नगर निगम गुरुग्राम के खिलाफ बड़े मॉल मालिकों और बिल्डरों से विज्ञापन कर के रूप में 180 करोड़ रुपये की वसूली न करने की शिकायत दर्ज कराई थी।
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2010 से 2015 के बीच हुआ गड़बड़झाला
हरियाणा के लोकायुक्त न्यायमूर्ति नवल किशोर अग्रवाल ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि नगर निगम के अधिकारियों की विज्ञापन एजेंसियों के साथ 2010 से 2015 तक सैकड़ों करोड़ के गबन के लिए मिलीभगत साफ तौर पर नजर आ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भ्रष्टाचार ने राज्य के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में अपना जाल फैला लिया है। यह देश के निवेश और विकास की वृद्धि में एक बाधा है। लोकायुक्त ने आदेश में कहा है कि एसआईटी की जांच में जो भी दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक/विभागीय कार्रवाई करने के अलावा उन अधिकारियों से बकाया की वसूली भी की जाए।
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180 करोड़ की करनी थी वसूली
शिकायतकर्ता अभय जैन ने बताया कि नगर निगम गुरुग्राम ने 2015 में एक आरटीआई में जवाब दिया था कि उसको विज्ञापन एजेंसियों से 180 करोड़ रुपये की वसूली करनी थी। इसी आधार पर उन्होंने 2015 में लोकायुक्त में एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि नगर निगम के अधिकारियों ने विज्ञापन एजेंसियों के साथ मिलकर निगम के करोड़ों रुपये का गबन किया है। शिकायतकर्ता अभय जैन ने अपनी शिकायत में कुछ कंपनियों और उनकी देय राशि का खुलासा भी किया है।
ये कंपनियां शामिल
शिकायतकर्ता के मुताबिक विज्ञापन का कर न देने वलों में डीएलएफ साइबर सिटी डेवलपर्स 59 करोड़ 37 लाख, डीएलएफ ऑफिस डेवलपर 23 करोड़ 38 लाख, रेनकॉन पार्टनर्स, झंडेवालान एक्सटेंशन नई दिल्ली 23 करोड़ 62 लाख विज्ञापन संचार प्राइवेट लिमिटेड 16 करोड़ 95 लाख, एंबिएंस मॉल 11 करोड़ 8 लाख डीएलएफ कमर्शियल एंटरप्राइजेज 8 करोड़ 97 लाख, डीएलएफ लिमिटेड गुरुग्राम 7 करोड़ 20 लाख, पैंटालून रिटेल लिमिटेड 3 करोड़, एनएसआर फार्म लिमिटेड 2 करोड़ 91 लाख, सहारा इंडिया कमर्शियल लिमिटेड 1 करोड़ 65 लाख, शामिल है।