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Gurugram News: आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने नगर निगम को सौंपा कचरा प्रबंधन का मॉडल
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मलबा प्रबंधन की अव्यवस्था पर चिंता जताई, प्रदूषण से मिल सकती है निजात
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों के संगठन मेकिंग मॉडल गुरुग्राम ने गुरुग्राम और मानेसर नगर निगम को कचरा प्रबंधन का मॉडल भेजा है। इसमें बताया गया है कि किस तरह से कचरा प्रबंधन से शहर के प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
मेकिंग मॉडल गुरुग्राम की अध्यक्ष गौरी सरीन ने बताया कि इसमें यह बताया गया है कि किस तरह से सोसाइटी स्तर पर नगर निगम आरडब्ल्यूए और प्रतिनिधियों के साथ मिलकर विकेंद्रीकृत कूड़ा प्रबंधन के माध्यम से कूड़े का समाधान कर सकते हैं। इसमें बताया गया है कि शहर के निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा कचरा प्रबंधन की राह में एक बड़ी समस्या है। बसई के मलबा प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 1500 टन के निष्पादन की है जबकि शहर में करीब 2000 टन मलबा रोजाना निकल रहा है। जगह-जगह पड़े मलबे से धूल प्रदूषण की एक बड़ी वजह है।
कूड़ा प्रबंधन की इस योजना पर विभिन्न आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श कर तैयार किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि किस तरह सोसाइटियों के लोग कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निष्पादित करने में भूमिका निभा सकते हैं। कचरा प्रबंधन के इस मॉडल को पहले हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पी राघवेंद्र राव क समक्ष भी प्रस्तुत किया गया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों के संगठन मेकिंग मॉडल गुरुग्राम ने गुरुग्राम और मानेसर नगर निगम को कचरा प्रबंधन का मॉडल भेजा है। इसमें बताया गया है कि किस तरह से कचरा प्रबंधन से शहर के प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
मेकिंग मॉडल गुरुग्राम की अध्यक्ष गौरी सरीन ने बताया कि इसमें यह बताया गया है कि किस तरह से सोसाइटी स्तर पर नगर निगम आरडब्ल्यूए और प्रतिनिधियों के साथ मिलकर विकेंद्रीकृत कूड़ा प्रबंधन के माध्यम से कूड़े का समाधान कर सकते हैं। इसमें बताया गया है कि शहर के निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाला मलबा कचरा प्रबंधन की राह में एक बड़ी समस्या है। बसई के मलबा प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 1500 टन के निष्पादन की है जबकि शहर में करीब 2000 टन मलबा रोजाना निकल रहा है। जगह-जगह पड़े मलबे से धूल प्रदूषण की एक बड़ी वजह है।
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कूड़ा प्रबंधन की इस योजना पर विभिन्न आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श कर तैयार किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि किस तरह सोसाइटियों के लोग कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निष्पादित करने में भूमिका निभा सकते हैं। कचरा प्रबंधन के इस मॉडल को पहले हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पी राघवेंद्र राव क समक्ष भी प्रस्तुत किया गया था।
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