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लापरवाही पर एनएचएआई सख्त : एलएंडटी पर 6.67 करोड़ रुपये का जुर्माना
Sun, 20 Mar 2022 05:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 20 Mar 2022 05:52 AM IST
सार
द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में लापरवाही पर एनएचएआई की बड़ी कार्रवाई। कंपनी ने एक सप्ताह में नहीं भरा जुर्माना तो भुगतान राशि में से कटेगा। तीन महीने तक किसी भी टेंडर प्रक्रिया में भी कंपनी नहीं ले सकेगी हिस्सा।
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विस्तार
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में लापरवाही पर कंपनी लार्सन एंड ट्यूब्रो (एलएंडटी) को कड़ी फटकार लगाई है। एनएचएआई ने 6.67 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही तीन महीने तक कंपनी के किसी भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने पर पाबंदी लगा दी है। अगर कंपनी ने एक सप्ताह में जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई तो भुगतान राशि से भरपाई कर ली जाएगी। एनएचएआई ने शुक्रवार को कंपनी को नोटिस देकर उसकी तामील करा दी है।
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पिछले साल 28 मार्च को दौलताबाद गांव के पास पिलर नंबर 107-108 और 108-109 के बीच एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड स्लैब गिरने का मामला प्रकाश में आया था। बाद में जांच के दौरान पता चला कि एक्सप्रेसवे से जुड़े रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण के दौरान यह घटना हुई थी। इस प्रकरण के 12 दिन बाद यानी नौ अप्रैल को एनएचएआई मंत्रालय की ओर से घटना की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित कर इसकी जांच की जिम्मेदारी उसे सौंप दी।
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जांच के बाद एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया कि निर्माण एजेंसी ने आरओबी निर्माण के वक्त सुरक्षा के तय मानकों का पालन नहीं किया था। साथ ही गुणवत्ता और डिजाइन के मानकों से समझौता किया गया। जिसके कारण ही स्टैब गिरने की गंभीर घटना हुई। इस हादसे में पांच लोग घायल हुए थे। एसआईटी ने इस घटना को टेंडर की शर्तों का उल्लंघन करार देते साफ किया कि स्लैब डालते समय पर्याप्त लेबर (मजदूर) भी कंपनी ने नहीं लगाई।
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बता दें कि दिल्ली के द्वारका से गुरुग्राम के खेड़कीदौला टोल तक 29 किलोमीटर का लंबा एक्सप्रेसवे बन रहा है। इसका निर्माण चार फेज में किया जा रहा है। इसके 10 किलोमीटर लंबे दो फेज दिल्ली में है। हरियाणा की सीमा में 19 किलोमीटर लंबे दो फेज हैं। स्लैब हरियाणा के हिस्से वाले फेज-3 में गिरी थी। इसे इसी साल पूरा किया जाना है।
स्लैब गिरने के मामले की जांच पूरी हो गई है। इसमें कंपनी की लापरवाही और निर्माण की गुणवत्ता से समझौता दोनों तरह की खामियां पाई गई हैं। कंपनी पर 6.67 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है, जो उसे एक सप्ताह में भरना है। अगर कंपनी जुर्माना नहीं भरती है तो उसके भुगतान में तत्काल जुर्माने की कटौती कर ली जाएगी। कंपनी पर 16 जून तक किसी भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने की पाबंदी भी लगाई है। -निर्माण जंबूलरक, परियोजना निदेशक, एनएचएआई