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पुनर्वास व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की
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गुरुग्राम। अरावली से विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास मामले में गेंद पूरी तरह प्रदेश सरकार के पाले में है। इन परिवारों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार ने कार्रवाई से पहले ही प्रदेश सरकार के पाले में गेंद डाल दी है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने साफ शब्दों में कहा कि यह प्रदेश सरकार का मसला है, वह इसे अपने स्तर पर सुलझाए, केंद्र सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती। प्रदेश सरकार को तय करना है कि पुनर्वास की क्या व्यवस्था हो सकती है। कितने और किन लोगों का पुनर्वास करना है, यह सब प्रदेश सरकार को तय करना है। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने अरावली के संरक्षण को लेकर नए सिरे से योजना बनाए जाने की बात भी कही।
सोहना-शिकोहपुर में सैकड़ों परिवारों पर विस्थापित होने की तलवार
वन विभाग की ओर से अवैध कब्जों और निर्माण को चिन्हित कर थमाए गए नोटिस के बाद सोहना से लेकर मानेसर, कासन और शिकोहपुर के सैकड़ों परिवारों पर विस्थापित होने की तलवार लटकी है। अकेले सोहना में 1000 हजार से ज्यादा नोटिस वन विभाग अभी तक दे चुका है। इनमें 600 के करीब ऐसे परिवार हैं जो वर्षों से यहां अपना आशियाना बनाकर रह रहे हैं। पहाड़ी, नट, आईटीआई और पीर कॉलोनी सहित आसपास की कॉलोनियों में अनेक परिवारों के आशियाने अरावली के वन क्षेत्र में बने हैं। पहाड़, पीर, नट और आईटीआई कॉलोनी में ही 1000 के करीब मकान हैं। इनमें से 600 को वन विभाग का नोटिस मिल चुका है। लोग एक नेता से दूसरे नेता और अधिकारियों के यहां मारे-मारे फिर रहे हैं। लोग अपने मूल निवासी होने के साक्ष्य भी जुटा रहे हैं। कुछ लोगों को निचली अदालत से स्टे भी मिल गया है, लेकिन इन लोगों को वन विभाग की ओर से सेक्शन 4 और 5 के नोटिस दिए गए हैं। इन सेक्शन के प्रावधान के तहत अरावली के वन क्षेत्र में आने वाले किसी भी तरह का निर्माण ध्वस्त करना जरूरी है। शिकोहपुर में भी यही हालात हैं। यहां 90 परिवारों को नोटिस दिए गए हैं। ये लोग यहां चार दशक पहले से रह रहे हैं। ये लोग केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विधायक सत्यप्रकाश जरावता आदि से मिलकर आशियाना बचाने की गुहार लगा चुके हैं। ये लोग पुनर्वास तक की मांग कर चुके हैं।
राव इंद्रजीत कर रहे हैं पैरवी
लोगों के पुनर्वास के लिए स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पैरवी कर रहे हैं। राव ने पिछले दिनों ही कहा था कि वह केंद्र और प्रदेश सरकार से इस बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने मूल निवासियों के पुनर्वास की पैरवी करने की बात ही कही है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी योग्य लोगों के पुनर्वास करने की व्यवस्था दी है।
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सोहना-शिकोहपुर में सैकड़ों परिवारों पर विस्थापित होने की तलवार
वन विभाग की ओर से अवैध कब्जों और निर्माण को चिन्हित कर थमाए गए नोटिस के बाद सोहना से लेकर मानेसर, कासन और शिकोहपुर के सैकड़ों परिवारों पर विस्थापित होने की तलवार लटकी है। अकेले सोहना में 1000 हजार से ज्यादा नोटिस वन विभाग अभी तक दे चुका है। इनमें 600 के करीब ऐसे परिवार हैं जो वर्षों से यहां अपना आशियाना बनाकर रह रहे हैं। पहाड़ी, नट, आईटीआई और पीर कॉलोनी सहित आसपास की कॉलोनियों में अनेक परिवारों के आशियाने अरावली के वन क्षेत्र में बने हैं। पहाड़, पीर, नट और आईटीआई कॉलोनी में ही 1000 के करीब मकान हैं। इनमें से 600 को वन विभाग का नोटिस मिल चुका है। लोग एक नेता से दूसरे नेता और अधिकारियों के यहां मारे-मारे फिर रहे हैं। लोग अपने मूल निवासी होने के साक्ष्य भी जुटा रहे हैं। कुछ लोगों को निचली अदालत से स्टे भी मिल गया है, लेकिन इन लोगों को वन विभाग की ओर से सेक्शन 4 और 5 के नोटिस दिए गए हैं। इन सेक्शन के प्रावधान के तहत अरावली के वन क्षेत्र में आने वाले किसी भी तरह का निर्माण ध्वस्त करना जरूरी है। शिकोहपुर में भी यही हालात हैं। यहां 90 परिवारों को नोटिस दिए गए हैं। ये लोग यहां चार दशक पहले से रह रहे हैं। ये लोग केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विधायक सत्यप्रकाश जरावता आदि से मिलकर आशियाना बचाने की गुहार लगा चुके हैं। ये लोग पुनर्वास तक की मांग कर चुके हैं।
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राव इंद्रजीत कर रहे हैं पैरवी
लोगों के पुनर्वास के लिए स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पैरवी कर रहे हैं। राव ने पिछले दिनों ही कहा था कि वह केंद्र और प्रदेश सरकार से इस बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने मूल निवासियों के पुनर्वास की पैरवी करने की बात ही कही है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी योग्य लोगों के पुनर्वास करने की व्यवस्था दी है।
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