{"_id":"6ad66b4f0502b5bd2a0fa998","slug":"rejecting-an-insurance-claim-proves-costly-rs-129-lakh-must-be-returned-along-with-interest-gurgaon-news-c-24-1-fbd1020-104709-2026-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: बीमा क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, ब्याज समेत लौटाने होंगे 1.29 लाख रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: बीमा क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, ब्याज समेत लौटाने होंगे 1.29 लाख रुपये
विज्ञापन
कंपनी ने दस्तावेज पूरे न होने का हवाला देकर क्लेम खारिज किया था
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। कोविड-19 उपचार का बीमा क्लेम खारिज करना आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनी को महंगा पड़ा है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी को ब्याज सहित 1.29 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। कंपनी ने दस्तावेज पूरे न होने का हवाला देकर क्लेम खारिज किया था।
सेक्टर-10ए निवासी ओंकार नाथ कश्यप ने आयोग में याचिका दायर की थी। उन्हें 22 अप्रैल 2021 से 3 मई 2021 तक कोरोना संक्रमण के कारण सेक्टर-104 स्थित शिवाय हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। उनके उपचार पर 1.29 लाख रुपये का खर्च आया था। उन्होंने 30 मई 2021 को बीमा कंपनी को क्लेम पास करने के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने अस्पताल से ई-मेल के जरिये उपचार के बारे में पूछा था। अस्पताल प्रबंधन ने जवाब दिया कि उपचार ओपीडी में हुआ था, आईपीडी में नहीं। इसी आधार पर कंपनी ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न होने का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया। कश्यप का पक्ष था कि अस्पताल से समय पर दस्तावेज न मिलने के कारण वे उन्हें जमा नहीं कर पाए थे। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के सामने महत्वपूर्ण तथ्य आए। बीमा कंपनी को भेजे ई-मेल में संबंधित डॉक्टर ने शुरुआत में मरीज का ओपीडी में इलाज बताया था। हालांकि, अस्पताल के आधिकारिक बिल में मरीज के आईपीपीडी (इन-पेशेंट केयर) के तहत भर्ती रहने का स्पष्ट उल्लेख था। आयोग ने इस विरोधाभास पर गौर किया। आयोग ने अस्पताल के आधिकारिक बिल को आधार मानते हुए फैसला सुनाया। कंपनी को 1.29 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज की दर से देने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपये का मुआवजा मिलेगा। कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए भी 22 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। कोविड-19 उपचार का बीमा क्लेम खारिज करना आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनी को महंगा पड़ा है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी को ब्याज सहित 1.29 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। कंपनी ने दस्तावेज पूरे न होने का हवाला देकर क्लेम खारिज किया था।
सेक्टर-10ए निवासी ओंकार नाथ कश्यप ने आयोग में याचिका दायर की थी। उन्हें 22 अप्रैल 2021 से 3 मई 2021 तक कोरोना संक्रमण के कारण सेक्टर-104 स्थित शिवाय हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। उनके उपचार पर 1.29 लाख रुपये का खर्च आया था। उन्होंने 30 मई 2021 को बीमा कंपनी को क्लेम पास करने के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने अस्पताल से ई-मेल के जरिये उपचार के बारे में पूछा था। अस्पताल प्रबंधन ने जवाब दिया कि उपचार ओपीडी में हुआ था, आईपीडी में नहीं। इसी आधार पर कंपनी ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न होने का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया। कश्यप का पक्ष था कि अस्पताल से समय पर दस्तावेज न मिलने के कारण वे उन्हें जमा नहीं कर पाए थे। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के सामने महत्वपूर्ण तथ्य आए। बीमा कंपनी को भेजे ई-मेल में संबंधित डॉक्टर ने शुरुआत में मरीज का ओपीडी में इलाज बताया था। हालांकि, अस्पताल के आधिकारिक बिल में मरीज के आईपीपीडी (इन-पेशेंट केयर) के तहत भर्ती रहने का स्पष्ट उल्लेख था। आयोग ने इस विरोधाभास पर गौर किया। आयोग ने अस्पताल के आधिकारिक बिल को आधार मानते हुए फैसला सुनाया। कंपनी को 1.29 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज की दर से देने का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपये का मुआवजा मिलेगा। कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए भी 22 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है।
विज्ञापन