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Gurugram News: गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में क्षेत्रीय पार्टियां नहीं खोल सकीं खाता
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देश की सियासत देखकर मतदाता देते हैं वोट, निर्दलीय प्रत्याशी भी रहे चुके हैं विजेता
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। गुरुग्राम लोकसभा में हुए आठ आम चुनावों में क्षेत्रीय पार्टियां अपना खाता नहीं खोल सकी है। गुरुग्राम लोस से कांग्रेस और बीजेपी के अलावा निर्दलीय तक विजेता रहे हैं। इस सीट से इनेलो, हरियाणा जनहित कांग्रेस व जजपा समेत अन्य दलों ने कई बार जीत के लिए पूरा जोर लगाया पर जीत हमेशा उसने दो कदम पीछे रही। यहां का मतदाता देश की सियासत देखकर वोट देता है और अधिकांश बार केंद्र में उसकी सरकार बनी।
गुरुग्राम सीट के संसदीय इतिहास पर नजर दौड़ाए तो इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा का वर्चस्व रहा है। आजादी के बाद हुए 1952 व 1957 के चुनावों में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की। हालांकि कांग्रेस इस सीट को अभेद दुर्ग नहीं बना सकी और अबुल कलाम आजाद की मौत के बाद 1958 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ। केंद्र में पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार होने पर भी आर्य समाज के नेता प्रकाशवीर शास्त्री ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस और जनसंघ के नेताओं को हराया था। कांग्रेस के इस किले को साल 1967 के आम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल गनी डार ने एक बार फिर से ध्वस्त कर दिया था। कांटेदार मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल गनी डार ने कांग्रेस उम्मीदवार जी सिंह को सिर्फ 1308 मतों से हराया था। 1952 से 1977 तक हुए आम चुनाव और एक उपचुनाव में चार बार कांग्रेस और दो बार निर्दलीय विजेता रहे थे। इसके बाद साल 2009 में दोबारा गुरुग्राम लोकसभा सीट अस्तित्व में आई इसमें कांग्रेस ने जीत दर्ज की। 2014 से 2019 में बीजेपी विजेता रही है।
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2014 में दूसरे स्थान पर रही इनेलो
साल 2014 में इनेलो ने इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार राव इंद्रजीत के सामने जाकिर हुसैन को उतारा था। इसमें जाकिर हुसैन को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्हें मेवात क्षेत्र से अच्छा वोट मिला लेकिन गुरुग्राम जिले में ग्राफ कम हो गया। ऐसे में इस सीट पर चश्मा का ठप्पा लगाने से दूर रहा। तीसरे स्थान पर कांग्रेस के धर्मपाल यादव रहे थे। 2009 के चुनाव में क्षेत्रीय पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस बीएल से नरबीर सिंह चौथे और साल 2019 के आम चुनाव में इनेलो प्रत्याशी वीरेंद्र राणा चौथे स्थान पर रहे थे।
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फरीदाबाद सीट पर क्षेत्रीय दल रहे दूर
फरीदाबाद लोस सीट पर 2004 में हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना जीते थे। हालांकि दूसरे स्थान पर इनेलो के चौधरी मोहम्मद इलियास रहे। तीसरे स्थान पर बीजेपी के रामचंदर बैंदा रहे। वहीं, हरियाणा विकास पार्टी देवेन्द्र भड़ाना पांचवें स्थान पर रहे। साल 2009 के आम चुनाव में इनेलो के प्रत्याशी यशपाल नागर चौथे स्थान पर रहे थे और हरियाणा जनहित कांग्रेस बीएल के चंदर भाटिया तीसरे स्थान पर रहे थे। 2014 के चुनाव में बीजेपी से कृष्णपाल गुर्जर जीते थे। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना और तीसरे स्थान पर इनेलो के आरके आनंद रहे थे। इस सीट पर साल 1977 से 2019 तक हुए चुनावों में एक-एक बार जनता पार्टी और लोकदल के प्रत्याशी जीते थे। अन्य चुनाव कांग्रेस और बीजेपी के प्रत्याशी चुनाव जीते।
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देश की सियासी हवा में बहता है मतदाता
1. साल 1952 में पहले लोकसभा चुनाव में हरियाणा संयुक्त पंजाब का हिस्सा था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे और हरियाणा के हिस्से की पांच सीटें कांग्रेस को मिली थी।
2. साल 1957 लोस चुनाव में दोबारा कांग्रेस सत्ता में आई थी। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बने। संयुक्त पंजाब के हरियाणा हिस्से की छह सीटें कांग्रेस ने जीतीं। हालांकि उपचुनाव में गुरुग्राम सीट पर निर्दलीय विजेता रहा।
3. साल 1662 के लोस चुनाव में हरियाणा के हिस्से की चार सीटें कांग्रेस, दो जनसंघ एक सीट सोशलिस्ट पार्टी ने जीती थी।
4. साल 1967 के लोस चुनाव में हरियाणा, पंजाब से अलग हो गया था। केंद्र में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी। हरियाणा में नौ सीटें कांग्रेस, एक भारतीय जनसंघ को मिली।
5.साल 1971 के लोस चुनाव में छह सीटें कांग्रेस,एक जनसंघ और एक विशाल हरियाणा पार्टी को मिली। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बनी थी।
6-साल 1977 के चुनाव में इमरजेंसी के कारण कांग्रेस प्रदेश में खाता नहीं खोल पाई।सभी सीटें जनता पार्टी और भारतीय लोकदल ने जीती।
7-साल 1980 में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी और 10 में से पांच सीटें कांग्रेस और पांच जनता पार्टी ने जीती थी।
8-साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हरियाणा की सियासत बदली और सभी दस सीटें कांग्रेस के पास चली गई।
9- साल 1989 में कांग्रेस को चार और जनता दल गठबंधन को छह सीटें मिली। वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने।
10- साल 1991 के आम चुनाव में कांग्रेस को नौ सीटें और हरियाणा विकास पार्टी को एक सीट मिली। नर सिंहा राव प्रधानमंत्री बने।
11-साल1996 के आम चुनाव में बीजेपी ने चार, कांग्रेस ने दो, हविपा ने तीन और एक सीट निर्दलीय ने जीती।
12-साल 1999 के आम चुनाव में एनडीए से अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। भाजपा और इनेलो से मिलकर चुनाव लड़ा और 5-5 सीटें जीती।
13- साल 2004 के चुनाव में कांग्रेस को नौ और बीजेपी को एक सीट मिली। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। 2009 में कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थी।
14- साल 2014 लोस में बीजेपी को सात और कांग्रेस को दो और इनेलो को एक सीट मिली। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।
15- साल 2019 लोस में सभी 10 सीटों पर बीजेपी विजयी रही। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।
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मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। गुरुग्राम लोकसभा में हुए आठ आम चुनावों में क्षेत्रीय पार्टियां अपना खाता नहीं खोल सकी है। गुरुग्राम लोस से कांग्रेस और बीजेपी के अलावा निर्दलीय तक विजेता रहे हैं। इस सीट से इनेलो, हरियाणा जनहित कांग्रेस व जजपा समेत अन्य दलों ने कई बार जीत के लिए पूरा जोर लगाया पर जीत हमेशा उसने दो कदम पीछे रही। यहां का मतदाता देश की सियासत देखकर वोट देता है और अधिकांश बार केंद्र में उसकी सरकार बनी।
गुरुग्राम सीट के संसदीय इतिहास पर नजर दौड़ाए तो इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा का वर्चस्व रहा है। आजादी के बाद हुए 1952 व 1957 के चुनावों में कांग्रेस ने लगातार जीत दर्ज की। हालांकि कांग्रेस इस सीट को अभेद दुर्ग नहीं बना सकी और अबुल कलाम आजाद की मौत के बाद 1958 में इस सीट पर उपचुनाव हुआ। केंद्र में पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार होने पर भी आर्य समाज के नेता प्रकाशवीर शास्त्री ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस और जनसंघ के नेताओं को हराया था। कांग्रेस के इस किले को साल 1967 के आम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल गनी डार ने एक बार फिर से ध्वस्त कर दिया था। कांटेदार मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल गनी डार ने कांग्रेस उम्मीदवार जी सिंह को सिर्फ 1308 मतों से हराया था। 1952 से 1977 तक हुए आम चुनाव और एक उपचुनाव में चार बार कांग्रेस और दो बार निर्दलीय विजेता रहे थे। इसके बाद साल 2009 में दोबारा गुरुग्राम लोकसभा सीट अस्तित्व में आई इसमें कांग्रेस ने जीत दर्ज की। 2014 से 2019 में बीजेपी विजेता रही है।
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2014 में दूसरे स्थान पर रही इनेलो
साल 2014 में इनेलो ने इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार राव इंद्रजीत के सामने जाकिर हुसैन को उतारा था। इसमें जाकिर हुसैन को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्हें मेवात क्षेत्र से अच्छा वोट मिला लेकिन गुरुग्राम जिले में ग्राफ कम हो गया। ऐसे में इस सीट पर चश्मा का ठप्पा लगाने से दूर रहा। तीसरे स्थान पर कांग्रेस के धर्मपाल यादव रहे थे। 2009 के चुनाव में क्षेत्रीय पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस बीएल से नरबीर सिंह चौथे और साल 2019 के आम चुनाव में इनेलो प्रत्याशी वीरेंद्र राणा चौथे स्थान पर रहे थे।
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फरीदाबाद सीट पर क्षेत्रीय दल रहे दूर
फरीदाबाद लोस सीट पर 2004 में हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना जीते थे। हालांकि दूसरे स्थान पर इनेलो के चौधरी मोहम्मद इलियास रहे। तीसरे स्थान पर बीजेपी के रामचंदर बैंदा रहे। वहीं, हरियाणा विकास पार्टी देवेन्द्र भड़ाना पांचवें स्थान पर रहे। साल 2009 के आम चुनाव में इनेलो के प्रत्याशी यशपाल नागर चौथे स्थान पर रहे थे और हरियाणा जनहित कांग्रेस बीएल के चंदर भाटिया तीसरे स्थान पर रहे थे। 2014 के चुनाव में बीजेपी से कृष्णपाल गुर्जर जीते थे। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना और तीसरे स्थान पर इनेलो के आरके आनंद रहे थे। इस सीट पर साल 1977 से 2019 तक हुए चुनावों में एक-एक बार जनता पार्टी और लोकदल के प्रत्याशी जीते थे। अन्य चुनाव कांग्रेस और बीजेपी के प्रत्याशी चुनाव जीते।
देश की सियासी हवा में बहता है मतदाता
1. साल 1952 में पहले लोकसभा चुनाव में हरियाणा संयुक्त पंजाब का हिस्सा था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे और हरियाणा के हिस्से की पांच सीटें कांग्रेस को मिली थी।
2. साल 1957 लोस चुनाव में दोबारा कांग्रेस सत्ता में आई थी। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बने। संयुक्त पंजाब के हरियाणा हिस्से की छह सीटें कांग्रेस ने जीतीं। हालांकि उपचुनाव में गुरुग्राम सीट पर निर्दलीय विजेता रहा।
3. साल 1662 के लोस चुनाव में हरियाणा के हिस्से की चार सीटें कांग्रेस, दो जनसंघ एक सीट सोशलिस्ट पार्टी ने जीती थी।
4. साल 1967 के लोस चुनाव में हरियाणा, पंजाब से अलग हो गया था। केंद्र में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी। हरियाणा में नौ सीटें कांग्रेस, एक भारतीय जनसंघ को मिली।
5.साल 1971 के लोस चुनाव में छह सीटें कांग्रेस,एक जनसंघ और एक विशाल हरियाणा पार्टी को मिली। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बनी थी।
6-साल 1977 के चुनाव में इमरजेंसी के कारण कांग्रेस प्रदेश में खाता नहीं खोल पाई।सभी सीटें जनता पार्टी और भारतीय लोकदल ने जीती।
7-साल 1980 में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी और 10 में से पांच सीटें कांग्रेस और पांच जनता पार्टी ने जीती थी।
8-साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हरियाणा की सियासत बदली और सभी दस सीटें कांग्रेस के पास चली गई।
9- साल 1989 में कांग्रेस को चार और जनता दल गठबंधन को छह सीटें मिली। वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने।
10- साल 1991 के आम चुनाव में कांग्रेस को नौ सीटें और हरियाणा विकास पार्टी को एक सीट मिली। नर सिंहा राव प्रधानमंत्री बने।
11-साल1996 के आम चुनाव में बीजेपी ने चार, कांग्रेस ने दो, हविपा ने तीन और एक सीट निर्दलीय ने जीती।
12-साल 1999 के आम चुनाव में एनडीए से अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। भाजपा और इनेलो से मिलकर चुनाव लड़ा और 5-5 सीटें जीती।
13- साल 2004 के चुनाव में कांग्रेस को नौ और बीजेपी को एक सीट मिली। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। 2009 में कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थी।
14- साल 2014 लोस में बीजेपी को सात और कांग्रेस को दो और इनेलो को एक सीट मिली। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।
15- साल 2019 लोस में सभी 10 सीटों पर बीजेपी विजयी रही। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।