Amar Ujala Samwad: 'मैंने जीवन में पहला अखबार अमर उजाला पढ़ा', रामदेव बोले- ये कोई कॉर्पोरेट हाउस की तरह नहीं
Amar Ujala Samwad Haryana: अमर उजाला संवाद हरियाणा के मंच पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने योग की संस्कृति के साथ-साथ अमर उजाला के गौरवपूर्ण इतिहास और साहस के बारे में अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि कैसे अमर उजाला का जन्म हुआ और अब तक जो सफर इस अखबार ने तय किया है वो आज भी एक आंदोलन की तरह ही है।
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विस्तार
योगगुरु रामदेव अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। योग और आयुर्वेद को घर-घर में लोकप्रिय बनाने वाले रामदेव ने आज गुरुग्राम में योग की संस्कृति और 'सनातन की बात' विषय पर विस्तार से अपनी बातें रखीं। अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कर्णिक के साथ संवाद के दौरान स्वामी रामदेव ने अमर उजाला के गौरवपूर्ण इतिहास के बारे में भी अपने विचार सभी के साथ साझा किए।
अमर उजाला ने आंदोलन की तरह अखबार की शुरुआती की थी
रामदेव ने संवाद के दौरान बताया कि अमर उजाला ने आंदोलन की तरह अखबार की शुरुआती की थी और आजादी के समय ही इसका जन्म हुआ। मुझे इस बात का फक्र है कि अमर उजाला मीडिया को एक आंदोलन की तरह ही लेकर चले हैं। इनके लिए मीडिया कोई कॉर्पोरेट हाउस नहीं हैं। अमर उजाला का एक मात्र लक्ष्य है कि हम मीडिया हैं तो मीडिया बनकर लोकतंत्र के प्रहरी रहें। निर्भीक पत्रकारिता करने और अंधेरों में अमर उजाला का दीप जलाए रखने के लिए जोरदार अभिनंदन करता हूं।
मैंने जीवन में पहला अखबार अमर उजाला पढ़ा
रामदेव ने बताया कि उनके गांव में अखबार नहीं आया करता था और गुरुकुल में हम पढ़ते नहीं थे। मैंने अपने जीवन में पहला अखबार अमर उजाला हरिद्वार में पढ़ा था और आज कई साल बाद जब मुझे अमर उजाला एयरपोर्ट पर मिला तो फिर से मैंने इसे पढ़ा।