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Gurugram News: एमसीजी शिकायत प्रणाली पर उठे सवाल, सीएम विंडो में जांच की मांग

Fri, 08 May 2026 01:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 01:09 AM IST
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Questions Raised Over MCG Complaint System; Probe Demanded via CM Window
शिकायतें बिना समाधान बंद हो रहीं, सफाई व्यवस्था पर करोड़ों खर्च के बावजूद हालात खराब
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संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। नगर निगम गुरुग्राम की शिकायत निवारण प्रणाली और सफाई व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। सेक्टर 49 स्थित उप्पल साउथंड सोसाइटी के नागरिकों ने सीएम विंडो में शिकायत दर्ज कर एमसीजी कॉल सेंटर, सफाई व्यवस्था और ठेकेदारों के कामकाज की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के टैक्स के पैसे से चल रही व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की भारी कमी है।

जयराज फोगाट ने शिकायत में बताया कि एमसीजी का कॉल सेंटर पिछले कई वर्षों से सीवर, स्ट्रीट लाइट, सफाई और आवारा पशुओं जैसी समस्याओं के समाधान के लिए संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने मोबाइल नंबर से कई शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन अधिकतर मामलों में सिर्फ शिकायत नंबर जारी कर दिए गए और बाद में बिना समाधान के शिकायतें बंद कर दी गईं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों के साथ जुड़े जूनियर इंजीनियर के मोबाइल नंबर कई बार ऐसे अधिकारियों के होते हैं जिनका संबंधित क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं होता। शिकायतों पर न तो प्रभावी कार्रवाई होती है और न ही शिकायतकर्ता की संतुष्टि ली जाती है।
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दूसरी शिकायत में नागरिकों ने वार्ड-16 में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 से लगातार सीएम विंडो और ईमेल के माध्यम से सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति की शिकायतें भेजी जा रही हैं लेकिन जमीन पर कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसकी संतुष्टि रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदारों के भुगतान किए जा रहे हैं जबकि आरडब्ल्यूए और स्थानीय निवासी सफाई व्यवस्था से लगातार असंतुष्ट हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति, वेतन वितरण और श्रम कानूनों के पालन को लेकर भी पारदर्शिता नहीं है।


आरडब्ल्यूए ने मांग की है कि वर्ष 2024 से अब तक वार्ड-16 में सफाई पर हुए खर्च का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। साथ ही शिकायतों को बिना फील्ड जांच बंद करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत मिशन जैसे दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
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