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Gurugram News: सोशल मीडिया पर परफेक्ट बॉडी का दबाव बढ़ा रहा मानसिक समस्याएं
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इंफ्ल्यूएंसर्स की फिलटर्ड और एडिटिड तस्वीरों की तुलना अपने वास्तविक स्वरूप से करना चिंता का विषय
सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट बॉडी और खूबसूरती की तस्वीरें किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो फिल्टर और एडिटेड तस्वीरों के लगातार संपर्क में रहने के कारण कई किशोरियों के अपने रूप-रंग, त्वचा और वजन को लेकर असंतुष्टि बढ़ने के मामले सामने आए हैं। यह प्रवृत्ति आत्मविश्वास में कमी, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे रही है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में व्यक्तित्व और आत्म-छवि का विकास होता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर दिखने वाले अवास्तविक सौंदर्य मानकों से प्रभावित होकर कई लड़कियां खुद की तुलना दूसरों से करने लगती हैं। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और उनमें हीन भावना तथा आत्म-संदेह बढ़ने लगता है।
केस स्टडी-1
पूर्वी दिल्ली की 15 वर्षीय छात्रा रोजाना कई घंटे सोशल मीडिया पर बिताती थी। वह अक्सर मॉडल्स और इन्फ्लुएंसर्स की तस्वीरें देखकर अपने वजन और चेहरे को लेकर परेशान रहने लगी। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास कम होने लगा और उसने दोस्तों से मिलना-जुलना भी कम कर दिया। इसके बाद उसके परिजन उसे लेकर मानव व्यवहार एवं संबद्ध संस्थान पहुंचे। काउंसलिंग और परिवार के सहयोग के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया।
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केस स्टडी-2
शहादरा की 17 वर्षीय किशोरी फोटो फिल्टर का अत्यधिक इस्तेमाल करती थी। उसे लगने लगा कि बिना फिल्टर के उसकी तस्वीर अच्छी नहीं दिखती। समय के साथ उसमें चिंता और तनाव के लक्षण बढ़ने लगे। विशेषज्ञों की काउंसलिंग और सोशल मीडिया उपयोग सीमित करने के बाद उसकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली अधिकांश तस्वीरें फिल्टर्ड और एडिटिंग के जरिए तैयार की जाती हैं। किशोरियां जब इन तस्वीरों की तुलना अपने वास्तविक स्वरूप से करती हैं तो उनमें असंतोष और हीन भावना पैदा हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर एंग्जायटी, डिप्रेशन और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर नजर रखने के साथ उनसे नियमित संवाद करना चाहिए। किशोरियों को यह समझाना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली सुंदरता हमेशा वास्तविक नहीं होती। यदि किसी किशोरी में लगातार उदासी, चिंता, आत्मविश्वास में कमी या अपने शरीर को लेकर अत्यधिक असंतोष के लक्षण दिखाई दें तो समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
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सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट बॉडी और खूबसूरती की तस्वीरें किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो फिल्टर और एडिटेड तस्वीरों के लगातार संपर्क में रहने के कारण कई किशोरियों के अपने रूप-रंग, त्वचा और वजन को लेकर असंतुष्टि बढ़ने के मामले सामने आए हैं। यह प्रवृत्ति आत्मविश्वास में कमी, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे रही है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में व्यक्तित्व और आत्म-छवि का विकास होता है। ऐसे में सोशल मीडिया पर दिखने वाले अवास्तविक सौंदर्य मानकों से प्रभावित होकर कई लड़कियां खुद की तुलना दूसरों से करने लगती हैं। इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और उनमें हीन भावना तथा आत्म-संदेह बढ़ने लगता है।
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केस स्टडी-1
पूर्वी दिल्ली की 15 वर्षीय छात्रा रोजाना कई घंटे सोशल मीडिया पर बिताती थी। वह अक्सर मॉडल्स और इन्फ्लुएंसर्स की तस्वीरें देखकर अपने वजन और चेहरे को लेकर परेशान रहने लगी। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास कम होने लगा और उसने दोस्तों से मिलना-जुलना भी कम कर दिया। इसके बाद उसके परिजन उसे लेकर मानव व्यवहार एवं संबद्ध संस्थान पहुंचे। काउंसलिंग और परिवार के सहयोग के बाद उसकी स्थिति में सुधार आया।
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केस स्टडी-2
शहादरा की 17 वर्षीय किशोरी फोटो फिल्टर का अत्यधिक इस्तेमाल करती थी। उसे लगने लगा कि बिना फिल्टर के उसकी तस्वीर अच्छी नहीं दिखती। समय के साथ उसमें चिंता और तनाव के लक्षण बढ़ने लगे। विशेषज्ञों की काउंसलिंग और सोशल मीडिया उपयोग सीमित करने के बाद उसकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली अधिकांश तस्वीरें फिल्टर्ड और एडिटिंग के जरिए तैयार की जाती हैं। किशोरियां जब इन तस्वीरों की तुलना अपने वास्तविक स्वरूप से करती हैं तो उनमें असंतोष और हीन भावना पैदा हो सकती है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर एंग्जायटी, डिप्रेशन और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर नजर रखने के साथ उनसे नियमित संवाद करना चाहिए। किशोरियों को यह समझाना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली सुंदरता हमेशा वास्तविक नहीं होती। यदि किसी किशोरी में लगातार उदासी, चिंता, आत्मविश्वास में कमी या अपने शरीर को लेकर अत्यधिक असंतोष के लक्षण दिखाई दें तो समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।