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प्रदूषण ने बिगाड़ी सेहत, 30 फीसदी मरीज, हार्टअटैक एवं ब्रेन स्ट्रोक के साथ फेफड़ों के संक्रमण में बढ़ोतरी
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गुरुग्राम। शहर की बिगड़ी आबोहवा लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण अस्पतालों में आने वाली मरीजों की संख्या में भी 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है। शहर के इकलौते सरकारी अस्पताल में ही यह बढ़ोतरी 25 फीसदी से अधिक की है। निजी अस्पतालों के आंकड़ों को इसमें शामिल कर दें तो यह 30 फीसदी के पार पहुंच जा रही है। इनमें सांस की तकलीफ के साथ ही हार्टअटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के मरीज भी शामिल हैं। फेफड़ा संक्रमण के मरीजों की तादात तो लगातार बढ़ रही है। अस्थमा, एनर्जी तो सामान्य हो गया है। हालांकि बरसाती मौसम के बाद सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या में कुछ कमी दर्ज जरूर की गई है, लेकिन फिलहाल आ रहे कुल मरीजों की संख्या में 25 फीसदी से अधिक सांस संबंधी बीमारियों के हैं। इनमें नाक, गला, आंख और फेफड़ा संक्रमण के अधिक मरीज हैं। इस बीच अस्पताल में आने वालों को मरीजों को सामान्य खांसी की दवाएं ही दी जा रही है। सरकारी अस्पताल में मरीजों की जांच का भी कोई विशेष इंतजाम नहीं है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे मरीज ही सरकारी अस्पताल में आधी अधूरी जांच के साथ ही इलाज करा रहे हैं। सक्षम मरीज सीधे निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
दवाओं की कमी से जूझ रहे मरीज
सरकारी अस्पताल में खांसी के लिए कफ सिरप की डिमांड बढ़ने से इसकी कमी भी महसूस की जाने लगी है। इसके अलावा एलर्जी (नाक बहना, आंखों में जलन) के मरीज को दी जाने वाली विशेष दवा भी मांग के अनुसार मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन दवा का स्टॉक लगातार आने का दावा कर रहा है। प्रबंधन के अनुसार तापमान में गिरावट के साथ कफ सिरप की डिमांड अचानक बढ़ने से थोड़ी दिक्कत हुई थी, अब स्थिति काबू सही है। प्रदूषण के बढ़ने से हृदय रोगियों के साथ ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की तादात में भी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। इनके साथ ही मधुमेह (डायबटीज) और ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि हड्डी रोगियों की संख्या भी पहले से अधिक हो गई है। निजी अस्पतालों में जांच के लिए इन बीमारियों के मरीज ही अधिक पहुंच रहे हैं।
बढ़ रहा है कैंसर का खतरा
शहर के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक तनेजा के अनुसार प्रदूषण के कारण गला, नाक और आंख के साथ ही फेफड़ा संक्रमण की रफ्तार बढ़ रही है। प्रदूषण से ये अंक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। जब ऑक्सीजन रक्त के अंदर नहीं पहुंच पाती तो हार्टअटैक, ब्रेन स्ट्रोक के साथ काम करने की क्षमता घट जाती है। चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, डायबटीज और बीपी भी अनियंत्रित हो जाता है। बिगड़े प्रदूषण के कारण शहरवासियों में कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। डॉ. तनेजा के अनुसार फेफड़ा संक्रमण के कारण कैंसर की संभावनाएं बढ़ रही है। प्रदूषण से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) गंभीर रूप लेकर कैंसर भी बन सकती है। इसके लक्षण अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से मिलते जुलते हैं। यह क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस है जिसमें मरीज की एनर्जी कम हो जाती है, वह कुछ कदम चलकर ही थक जाता है। सांस नली में नाक से फेफड़े के बीच सूजन के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई घट जाती है। डॉ. तनेजा के अनुसार बिगड़ते प्रदूषण के कारण बच्चों और गर्भवती महिलाओं में बीमार होने की संभावनाएं ज्यादा हैं।
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दवाओं की कमी से जूझ रहे मरीज
सरकारी अस्पताल में खांसी के लिए कफ सिरप की डिमांड बढ़ने से इसकी कमी भी महसूस की जाने लगी है। इसके अलावा एलर्जी (नाक बहना, आंखों में जलन) के मरीज को दी जाने वाली विशेष दवा भी मांग के अनुसार मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन दवा का स्टॉक लगातार आने का दावा कर रहा है। प्रबंधन के अनुसार तापमान में गिरावट के साथ कफ सिरप की डिमांड अचानक बढ़ने से थोड़ी दिक्कत हुई थी, अब स्थिति काबू सही है। प्रदूषण के बढ़ने से हृदय रोगियों के साथ ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की तादात में भी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। इनके साथ ही मधुमेह (डायबटीज) और ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि हड्डी रोगियों की संख्या भी पहले से अधिक हो गई है। निजी अस्पतालों में जांच के लिए इन बीमारियों के मरीज ही अधिक पहुंच रहे हैं।
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बढ़ रहा है कैंसर का खतरा
शहर के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक तनेजा के अनुसार प्रदूषण के कारण गला, नाक और आंख के साथ ही फेफड़ा संक्रमण की रफ्तार बढ़ रही है। प्रदूषण से ये अंक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। जब ऑक्सीजन रक्त के अंदर नहीं पहुंच पाती तो हार्टअटैक, ब्रेन स्ट्रोक के साथ काम करने की क्षमता घट जाती है। चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, डायबटीज और बीपी भी अनियंत्रित हो जाता है। बिगड़े प्रदूषण के कारण शहरवासियों में कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। डॉ. तनेजा के अनुसार फेफड़ा संक्रमण के कारण कैंसर की संभावनाएं बढ़ रही है। प्रदूषण से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) गंभीर रूप लेकर कैंसर भी बन सकती है। इसके लक्षण अस्थमा और ब्रोंकाइटिस से मिलते जुलते हैं। यह क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस है जिसमें मरीज की एनर्जी कम हो जाती है, वह कुछ कदम चलकर ही थक जाता है। सांस नली में नाक से फेफड़े के बीच सूजन के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई घट जाती है। डॉ. तनेजा के अनुसार बिगड़ते प्रदूषण के कारण बच्चों और गर्भवती महिलाओं में बीमार होने की संभावनाएं ज्यादा हैं।
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