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Gurugram News: खिलाड़ियों को कोच तो मिले पर अधूरी सुविधाएं बन रहीं बाधा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुरुग्राम में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए राज्य सरकार और खेल विभाग ने कई खेलों में कोच की नियुक्ति तो कर दी है लेकिन ज़मीनी स्तर पर खेल सुविधाओं की कमी है।
जिले में क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबॉल, हैंडबॉल, एथलेटिक्स, योग, खो-खो, टेबल टेनिस, तीरंदाजी और बास्केटबॉल जैसे खेलों के लिए प्रशिक्षक नियुक्त हैं। कोचिंग का लाभ भी खिलाड़ियों को मिल रहा है और वे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग भी ले रहे हैं लेकिन सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सबसे चिंताजनक स्थिति स्विमिंग को लेकर है।
जिले में इस खेल के लिए प्रशिक्षक तो उपलब्ध है लेकिन खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए स्विमिंग पूल या अन्य कोई भी आधारभूत सुविधा मौजूद नहीं है। इससे कोच चाहकर भी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण नहीं दे पा रहे हैं।
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वहीं दूसरी तरफ निशानेबाजी जैसे खेल में जिले की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिले में न तो कोई शूटिंग रेंज है और न ही प्रशिक्षित कोच। ऐसे में शूटरों को निजी कोच से प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। ऐसे में उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को नियमित अभ्यास करने में दिक्कत आती है।
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गुरुग्राम। गुरुग्राम में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए राज्य सरकार और खेल विभाग ने कई खेलों में कोच की नियुक्ति तो कर दी है लेकिन ज़मीनी स्तर पर खेल सुविधाओं की कमी है।
जिले में क्रिकेट, हॉकी, वॉलीबॉल, हैंडबॉल, एथलेटिक्स, योग, खो-खो, टेबल टेनिस, तीरंदाजी और बास्केटबॉल जैसे खेलों के लिए प्रशिक्षक नियुक्त हैं। कोचिंग का लाभ भी खिलाड़ियों को मिल रहा है और वे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग भी ले रहे हैं लेकिन सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सबसे चिंताजनक स्थिति स्विमिंग को लेकर है।
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जिले में इस खेल के लिए प्रशिक्षक तो उपलब्ध है लेकिन खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए स्विमिंग पूल या अन्य कोई भी आधारभूत सुविधा मौजूद नहीं है। इससे कोच चाहकर भी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण नहीं दे पा रहे हैं।
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वहीं दूसरी तरफ निशानेबाजी जैसे खेल में जिले की स्थिति बेहद चिंताजनक है। जिले में न तो कोई शूटिंग रेंज है और न ही प्रशिक्षित कोच। ऐसे में शूटरों को निजी कोच से प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। ऐसे में उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को नियमित अभ्यास करने में दिक्कत आती है।