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Gurugram News: दौलताबाद में लैंडफिल साइट बनाने का विरोध
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लोगों ने किया प्रदर्शन, कहा -दूसरा बंधवाड़ी बन सकता है नया नवेला द्वारका एक्सप्रेसवे
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दौलताबाद के रिहायशी इलाके में करीब छह एकड़ जगह पर फिलहाल लैंडफिल साइट विकसित करने और बाद में वहां कूड़ा निस्तारण यूनिट बनाने की सूचना मिलने के बाद इलाके के लोग भड़क उठे। बृहस्पतिवार को द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों और दौलताबाद के लोगों ने साइट पर प्रदर्शन किया। शनिवार को व्यापक स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों के लोगों का कहना कि जिस जगह को लैंडफिल साइट के लिए चुना गया है, उसके साथ कई सोसाइटियां हैं, शीतला अस्पताल बन रहा है। एक यूनिवर्सिटी है। लंबे समय तक यहां शहर का कचरा डंप होगा, चाहे बाद में प्रोसेसिंग यूनिट लग जाए मगर कचरे की दुर्गंध, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण होगा । जिस तरह बंधवाड़ी के आस-पास लीचेट के कारण भूजल प्रदूषित हो चुका है। वहां आस-पास के गांवों में लोगों को कैंसर हो रहा है। यही हाल दौलताबाद, द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों के लोगों का होगा। कचरे के वाहनों की आवाजाही के कारण लोगों को परेशानी भी होगी।
विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन की प्रणाली सबसे उपयुक्त
शहर में वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा प्रबंधन की मांग कर रहे शहर के आरडब्ल्यूए, वैज्ञानिकों, भाभा इंस्टीट्यूट के पूर्व वैज्ञानिक डाॅ. एनबी नायर, पर्यावरण विशेषज्ञ परिमल वर्धन आदि का कहना है कि कचरा प्रबंधन के लिए विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन की प्रणाली सबसे उपयुक्त है। यह एसडब्ल्यूएएम पॉलिसी 2016 के अनुकूल भी है। इसमें शहर में सबसे पहले घरों में कचरे को छांटकर देने, इसके बाद वार्ड स्तर पर कचरा निस्तारण केंद्र बनाए जाने की बात है। जहां घरों से आए छंटे हुए कूड़े में किचन और बागवानी के कचरे से खाद बनाई जाए। रिसाइकिल किए जाने वाली चीजों को सेकेंड्री कलेक्शन केंद्र में भेजा जाए। जो चीजें रिसाइकिल नहीं सकती है, वे खत्ते में जाएं या जो ज्वलनशील चीजें हैं, वे सीमेंट फैक्ट्री आदि में जाए। रिहायशी इलाके में ऐसा कचरा प्रबंधन हो कि कम से कम प्रदूषण हो। अगर सामूहिक रूप से संयंत्र बनाया जाना है तो बॉयो गैस या कंप्रेस्ड बॉयो गैस बनाया जाए। डिपार्टमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी ने 1980 में यह प्रमाणित किया है कि बॉयो गैस और इससे भी एडवांस कंप्रेस्ड बॉयो गैस कचरा प्रबंधन का सबसे कम प्रदूषणकारी और सुरक्षित उपाय है।
हवा, पानी और जमीन हो जागएी प्रदूषित
वर्ष 2010 में जब शहर में 400 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता था तब बंधवाड़ी में डंपिंग हो रही थी। अब 1200 मीट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है। बंधवाड़ी में कूड़े का पहाड़ बनने के बाद से यहां की हवा, पानी और जमीन प्रदूषित हुई। 2010 में घोषणा हुई और 2024 तक वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की योजना ठप हो गई। अब किसी एक जगह मिला जुला कूड़ा डंप करना उस जगह एक और बंधवाड़ी तैयार करना है। ग्रीन कोल बनाने के लिए भी पहले आरडीएफ बनाया जाएगा। यह सुरक्षित नहीं बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अधिकांश ग्रीन कोल आरडीएफ संयंत्र परिचालन के दो- तीन वर्ष लाभदायक नहीं होते हैं। इन सबसे बेहतर विकल्प वार्ड स्तर पर कचरा प्रबंधन और सोर्स सेग्रिगेशन का है, जिससे स्थानीय जरूरतमंदों को रोजगार भी मिलेगा। एसडब्ल्यूएएम पॉलिसी बेहतर विकल्प है। शहर की बहुत सारी सोसाइटियों में खुद से कचरा प्रबंधन भी किया जा रहा है। दूसरी लैंडफिल साइट बनाकर उसे बंधवाड़ी जैसा बनाना सरासर गलत है। - रुचिका सेठी टक्कर, संयोजिका व्हाई वेस्ट योअर वेस्ट, सिटिजन फॅार क्लीन एयर
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लोगों ने कहा
नगर निगम का यह फैसला बहुत गलत है। यह एक रिहायशी इलाका है। यहां अस्पताल बन रहा है। यूनिवर्सिटी है। कई सोसाइटियां हैं। यहां कचरा डंपिंग से लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी होगी। यहां की हवा, पानी और जमीन प्रदूषित होगी। -अमित सलूजा, एम्मार इंपीरियल गार्डन सेक्टर 102
यहां लैंडफिल साइट बनाया जाना द्वारका एक्सप्रेसवे के निवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होाग। इस क्षेत्र में इससे भारी वाहनों की आवाजाही होगी। कचरा डंप किए जाने से इस स्थल पर दुर्गंध फैलेगी, चारों और कचरा दिखेगा। कचरे को जलाने से खतरनाक गैसें निकलेंगी। जिससे स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं पैदा होगी। यह क्षेत्र फ्लाई जोन के नजदीक है। इससे पक्षी इधर- उधर उड़ेंगे और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले विमानों के लिए खतरा बनेंगे।- रंजन जैन, चिंटेल्स सेरेनिटी, सेक्टर 109
एक ओर सरकार द्वारका एक्सप्रेसवे को भविष्य का शहर बनाने की बात करती है तो दूसरी और लैंडफिल साइट बनाकर इस क्षेत्र को बर्बाद करने की योजना बना रही है। यह इलाका हवाई अड्डे के मार्ग में आता है। गिद्ध और ऐसे पक्षी हवाई जहाजों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करेंगे। यहां लैंडफिल साइट बनाने की जगह कचरा प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। - भारत नैन, निवासी सेक्टर 110
गुरुग्राम डंपिंग कैपिटल बन गया है। पहले से धूल और धुएं के कारण प्रदूषित शहर में कूड़े को जमा करने का केंंद्र दौलताबाद में बनाए जाने की घोषणा बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे द्वारका एक्सप्रेसवे के रिहाइशी इलाके में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होगी। -प्रवीण कौशल, निवासी शोभा सिटी सेक्टर 108
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दौलताबाद के रिहायशी इलाके में करीब छह एकड़ जगह पर फिलहाल लैंडफिल साइट विकसित करने और बाद में वहां कूड़ा निस्तारण यूनिट बनाने की सूचना मिलने के बाद इलाके के लोग भड़क उठे। बृहस्पतिवार को द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों और दौलताबाद के लोगों ने साइट पर प्रदर्शन किया। शनिवार को व्यापक स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों के लोगों का कहना कि जिस जगह को लैंडफिल साइट के लिए चुना गया है, उसके साथ कई सोसाइटियां हैं, शीतला अस्पताल बन रहा है। एक यूनिवर्सिटी है। लंबे समय तक यहां शहर का कचरा डंप होगा, चाहे बाद में प्रोसेसिंग यूनिट लग जाए मगर कचरे की दुर्गंध, इससे भूमि, जल और वायु प्रदूषण होगा । जिस तरह बंधवाड़ी के आस-पास लीचेट के कारण भूजल प्रदूषित हो चुका है। वहां आस-पास के गांवों में लोगों को कैंसर हो रहा है। यही हाल दौलताबाद, द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों के लोगों का होगा। कचरे के वाहनों की आवाजाही के कारण लोगों को परेशानी भी होगी।
विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन की प्रणाली सबसे उपयुक्त
शहर में वैज्ञानिक तरीके से ठोस कचरा प्रबंधन की मांग कर रहे शहर के आरडब्ल्यूए, वैज्ञानिकों, भाभा इंस्टीट्यूट के पूर्व वैज्ञानिक डाॅ. एनबी नायर, पर्यावरण विशेषज्ञ परिमल वर्धन आदि का कहना है कि कचरा प्रबंधन के लिए विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन की प्रणाली सबसे उपयुक्त है। यह एसडब्ल्यूएएम पॉलिसी 2016 के अनुकूल भी है। इसमें शहर में सबसे पहले घरों में कचरे को छांटकर देने, इसके बाद वार्ड स्तर पर कचरा निस्तारण केंद्र बनाए जाने की बात है। जहां घरों से आए छंटे हुए कूड़े में किचन और बागवानी के कचरे से खाद बनाई जाए। रिसाइकिल किए जाने वाली चीजों को सेकेंड्री कलेक्शन केंद्र में भेजा जाए। जो चीजें रिसाइकिल नहीं सकती है, वे खत्ते में जाएं या जो ज्वलनशील चीजें हैं, वे सीमेंट फैक्ट्री आदि में जाए। रिहायशी इलाके में ऐसा कचरा प्रबंधन हो कि कम से कम प्रदूषण हो। अगर सामूहिक रूप से संयंत्र बनाया जाना है तो बॉयो गैस या कंप्रेस्ड बॉयो गैस बनाया जाए। डिपार्टमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी ने 1980 में यह प्रमाणित किया है कि बॉयो गैस और इससे भी एडवांस कंप्रेस्ड बॉयो गैस कचरा प्रबंधन का सबसे कम प्रदूषणकारी और सुरक्षित उपाय है।
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हवा, पानी और जमीन हो जागएी प्रदूषित
वर्ष 2010 में जब शहर में 400 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता था तब बंधवाड़ी में डंपिंग हो रही थी। अब 1200 मीट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है। बंधवाड़ी में कूड़े का पहाड़ बनने के बाद से यहां की हवा, पानी और जमीन प्रदूषित हुई। 2010 में घोषणा हुई और 2024 तक वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की योजना ठप हो गई। अब किसी एक जगह मिला जुला कूड़ा डंप करना उस जगह एक और बंधवाड़ी तैयार करना है। ग्रीन कोल बनाने के लिए भी पहले आरडीएफ बनाया जाएगा। यह सुरक्षित नहीं बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अधिकांश ग्रीन कोल आरडीएफ संयंत्र परिचालन के दो- तीन वर्ष लाभदायक नहीं होते हैं। इन सबसे बेहतर विकल्प वार्ड स्तर पर कचरा प्रबंधन और सोर्स सेग्रिगेशन का है, जिससे स्थानीय जरूरतमंदों को रोजगार भी मिलेगा। एसडब्ल्यूएएम पॉलिसी बेहतर विकल्प है। शहर की बहुत सारी सोसाइटियों में खुद से कचरा प्रबंधन भी किया जा रहा है। दूसरी लैंडफिल साइट बनाकर उसे बंधवाड़ी जैसा बनाना सरासर गलत है। - रुचिका सेठी टक्कर, संयोजिका व्हाई वेस्ट योअर वेस्ट, सिटिजन फॅार क्लीन एयर
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लोगों ने कहा
नगर निगम का यह फैसला बहुत गलत है। यह एक रिहायशी इलाका है। यहां अस्पताल बन रहा है। यूनिवर्सिटी है। कई सोसाइटियां हैं। यहां कचरा डंपिंग से लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी होगी। यहां की हवा, पानी और जमीन प्रदूषित होगी। -अमित सलूजा, एम्मार इंपीरियल गार्डन सेक्टर 102
यहां लैंडफिल साइट बनाया जाना द्वारका एक्सप्रेसवे के निवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होाग। इस क्षेत्र में इससे भारी वाहनों की आवाजाही होगी। कचरा डंप किए जाने से इस स्थल पर दुर्गंध फैलेगी, चारों और कचरा दिखेगा। कचरे को जलाने से खतरनाक गैसें निकलेंगी। जिससे स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं पैदा होगी। यह क्षेत्र फ्लाई जोन के नजदीक है। इससे पक्षी इधर- उधर उड़ेंगे और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले विमानों के लिए खतरा बनेंगे।- रंजन जैन, चिंटेल्स सेरेनिटी, सेक्टर 109
एक ओर सरकार द्वारका एक्सप्रेसवे को भविष्य का शहर बनाने की बात करती है तो दूसरी और लैंडफिल साइट बनाकर इस क्षेत्र को बर्बाद करने की योजना बना रही है। यह इलाका हवाई अड्डे के मार्ग में आता है। गिद्ध और ऐसे पक्षी हवाई जहाजों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करेंगे। यहां लैंडफिल साइट बनाने की जगह कचरा प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। - भारत नैन, निवासी सेक्टर 110
गुरुग्राम डंपिंग कैपिटल बन गया है। पहले से धूल और धुएं के कारण प्रदूषित शहर में कूड़े को जमा करने का केंंद्र दौलताबाद में बनाए जाने की घोषणा बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे द्वारका एक्सप्रेसवे के रिहाइशी इलाके में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होगी। -प्रवीण कौशल, निवासी शोभा सिटी सेक्टर 108