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Nuh Violence: उपद्रवियों ने महिला जज की कार में लगाई आग, तीन साल की बेटी के साथ वर्कशॉप में छिपकर बचाई जान
Thu, 03 Aug 2023 11:50 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 03 Aug 2023 11:50 AM IST
सार
नूंह हिंसा की सोमवार को महिला जज और उनकी तीन साल की बेटी भी शिकार हो गई। उन्होंने किसी तरह वहां से भागकर जान बचाई। फिलहाल उनके एक स्टाफ ने मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
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Nuh Violence
- फोटो : ANI
विस्तार
हरियाणा के नूंह में सोमवार को नूंह में जलाभिषेक यात्रा के दौरान भड़की हिंसा में महिला जज ने तीन साल की बेटी के साथ बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाई। पुलिस ने महिला जज के साथ प्रोसेसर सर्वर की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ नूंह थाने में मामला दर्ज कर लिया है।
आरोपी अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एडिशनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अंजलि जैन अपने गनमैन सियाराम, प्रोसेसर सर्वर टेकचंद के साथ अपनी तीन साल की बेटी को लेकर उसकी नलहड़ स्थित मेडिकल कॉलेज से दवाई लेने के लिए गई थी।
करीब 2:00 बजे जब वह वापस आई तो नूंह पुराने बस स्टैंड के पास करीब सौ से डेढ़ सौ अज्ञात लोगों ने उनकी गाड़ी पर पथराव कर दिया। जिससे वह बुरी तरह से घबरा गईं और वह अपने गनमैन सियाराम और टेकचंद की मदद से जान बचाकर जैसे-तैसे एक वर्कशॉप पहुंची।
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उन्होंने इस बात की सूचना कुछ वकीलों को दी तो वकील मौके पर पहुंचे और उन्हें वहां से निकाल लाए। इस मंजर को देखकर हर कोई हैरान था। जज ने गाड़ी के बारे में पता किया और अपने कर्मचारियों से उसके बारे में जानकारी हासिल के आदेश किए, लेकिन तब तक गाड़ी को जला दिया गया था। लिहाजा इस हिंसा में उपद्रवियों ने किसी को नहीं बख्शा उनके हाथ जो लगा उन्होंने चुन-चुन कर लोगों को अपना निशाना बनाया।
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आरोपी अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एडिशनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अंजलि जैन अपने गनमैन सियाराम, प्रोसेसर सर्वर टेकचंद के साथ अपनी तीन साल की बेटी को लेकर उसकी नलहड़ स्थित मेडिकल कॉलेज से दवाई लेने के लिए गई थी।
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करीब 2:00 बजे जब वह वापस आई तो नूंह पुराने बस स्टैंड के पास करीब सौ से डेढ़ सौ अज्ञात लोगों ने उनकी गाड़ी पर पथराव कर दिया। जिससे वह बुरी तरह से घबरा गईं और वह अपने गनमैन सियाराम और टेकचंद की मदद से जान बचाकर जैसे-तैसे एक वर्कशॉप पहुंची।
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उन्होंने इस बात की सूचना कुछ वकीलों को दी तो वकील मौके पर पहुंचे और उन्हें वहां से निकाल लाए। इस मंजर को देखकर हर कोई हैरान था। जज ने गाड़ी के बारे में पता किया और अपने कर्मचारियों से उसके बारे में जानकारी हासिल के आदेश किए, लेकिन तब तक गाड़ी को जला दिया गया था। लिहाजा इस हिंसा में उपद्रवियों ने किसी को नहीं बख्शा उनके हाथ जो लगा उन्होंने चुन-चुन कर लोगों को अपना निशाना बनाया।
उपद्रवियों ने लोगों को चुन चुन कर बनाया निशाना
हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने लोगों को चुन-चुन कर अपना निशाना बनाया। उपद्रवियों ने लोगों के वाहनों को जहां देखा, आग के हवाले कर दिया। अस्पताल जैसे संस्थानों को भी नहीं बख्शा। दिल्ली अलवर रोड पर स्थित अलवर अस्पताल को निशाना बनाते हुए उपद्रवियों ने पहले अस्पताल के गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ा।
हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने लोगों को चुन-चुन कर अपना निशाना बनाया। उपद्रवियों ने लोगों के वाहनों को जहां देखा, आग के हवाले कर दिया। अस्पताल जैसे संस्थानों को भी नहीं बख्शा। दिल्ली अलवर रोड पर स्थित अलवर अस्पताल को निशाना बनाते हुए उपद्रवियों ने पहले अस्पताल के गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ा।
उसके बाद अस्पताल में घुसकर लूटपाट की और मरीजों के नाम पूछकर मरीजों के साथ भी बदतमीजी की। इसको लेकर क्षेत्र के लोगों में खासा रोष है। हालांकि अभी तक इस बारे में अस्पताल प्रशासन और मरीजों की तरफ से कोई शिकायत देने की खबर नहीं है, लेकिन जिस तरह से बदतमीजी की गई है।
इसको लेकर एक समुदाय में खासा रोष है। नई अनाज मंडी में भी ऐसा देखा गया। उपद्रवियों ने जिस गाड़ी पर मूर्ति देखी, उसे अपना निशाना बनाया। जो गाड़ी अपने समुदाय की नजर आई, उसे छोड़ दिया।