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Gurugram News: जलभराव की समस्या से नहीं मिली निजात, नहीं बनी निकासी की योजना
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वर्षा के मौसम में शहर की 35 हजार जनता को झेलनी पड़ती है परेशानी
जिला बनने के बाद 19 वर्ष बीत जाने के बाद भी जल निकासी के नहीं हुए पुख्ता इंतजाम
शेरसिंह डागर
नूंह। शहर नूंह में पिछले एक दशक से जलभराव की समस्या बनी हुई है। हर साल बारिश में ये समस्या और विकराल होती है लेकिन, शहर में अभी भी जगह-जगह ये समस्या बरकरार है। प्रशासन की अनदेखी का यह आलम तब है जब यह मामला विधानसभा में हर बार उठाया जाता है। वहीं, इस बार भी स्थानीय विधायक आफताब अहमद ने विधानसभा में इस मामले के समाधान की मांग की। जलभराव के लिए प्रशासनिक स्तर पर ऐसी योजना नहीं बनी है, जिससे 35 हजार लोगों को जलभराव की समस्या से निजात मिले सके। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा सबसे ज्यादा जल भराव सरकारी कार्यालयों के सामने होता है। वर्षा के माैसम में चार माह तक आम लोग दुखी रहते हैं।
बता दें कि नूंह जिला 2005 में अस्तित्व में आया था। 19 वर्ष बीत जाने के बाद भी शहर की सूरत प्रशासन संवारने में नाकाम रहा है। हालांकि यहां पर प्रशासनिक स्तर पर लघु सचिवालय व जिला अदालत के लिए भवन के निर्माण हो चुके हैं। बावजूद इसके अभी भी दर्जनों कार्यालय लघु सचिवालय से अलग भवन में चल रहें हैं। अलग-अलग विभागों के इन कार्यालयों में जलभराव की समस्या आम बात हो गई है। शहर के पुराने विश्राम गृह व लोक निर्माण विभाग के कार्यालय के सामने बारिश के मौसम में कई-कई फीट पानी भर जाता है। पानी के कारण यहां से लोगों का निकलना दूभर हो जाता है। इसके अलावा बिजली बोर्ड कार्यालय व 66 केवी सब स्टेशन में नाममात्र वर्षा में जलभराव हो जाता है। इसके कारण लोगों को बिजली से संबंधित कार्यों को पूरा कराने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी तरफ से रेडक्रॉस कार्यालय, महिला थाना व कृषि विभाग के कार्यालय के सामने कई-कई फीट पानी भर जाता है। पानी की निकासी नहीं होने के कारण यहां पर आने वाले कर्मचारियों व आम लोगों को पानी से निकलना पड़ता है। अनाज मंडी के द्वार पर बने साइबर थाने के समीप वर्षा से जलभराव हो जाता है। यहां पर लोगों को परेशानी होती है। अनाज मंडी में बने मंडी के कार्यालय पर भी कमोबेश यही समस्या रहती है। बस अड्डे के सामने जलभराव इतना होता है कि यहां पर कई दिन तक पानी जमा रहता है। बस डिपो केंद्र पर वर्षा के मौसम में जल राव के कारण बसें पानी में खड़ी रहती हैं। इसके कारण बसों के खराब होने का अंदेशा बना रहता है।
शहर में भी होता है जलभराव
जिले के सरकारी कार्यालयों के अलावा शहर के कब्रिस्तान, वार्ड नंबर दो, तीन, 12, 13 की गलियों में पानी की निकासी नहीं होने के कारण जल भराव से वर्षा के माैसम में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य बाजार व नंगली चौक पर कई-कई फीट पानी दुकानों के सामने भर जाता है। इससे दुकानदार व ग्राहकों को वर्षा के माैसम में चार माह जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है लेकिन, प्लॉट व कई सड़कों पर पानी है। इससे मच्छर पनप रहे हैं और बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कभी प्रशासनिक स्तर पर व जनप्रतिनिधियों ने शहर की जलभराव की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए व्यापक योजना तैयार नहीं की।
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शहर में जलभराव की समस्या वर्षों से चली आ रही है। लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं ढूंढा गया है। लोग परेशान रहते हैं। प्रशासन के अधिकारियों को कोई चिंता नहीं। - खलील अहमद, वरिष्ठ वकील नूंह।
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शहर की गलियों में पानी जमा रहता है। निकासी की व्यवस्था नहीं होने से लोग वर्षा के मौसम में और ज्यादा परेशान रहते हैं। - मकसूद अहमद, नूंह।
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नूंह को जिला बने काफी समय बीत गया है, लेकिन इसके उद्धार के लिए कोई योजना विकास की ठीक ढंंग से नहीं से बनी, जिसका नुकसान लोगों को होता है- सतपाल सिंगला, समाजसेवी।
सरकार हर वर्ष विकास के नाम पर कराेड़ों रुपये खर्च करती है लेकिन, शहर का विकास अभी भी नहीं हुआ। चुनाव में नेता विकास की बात तो करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद विकास कराना भूल जाते हैं।
-- आसिफ अली, नूंह।
पिछले दस वर्षों में भाजपा की सरकार रही है। यहां पर विकास के नाम कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस के राज में जरूर विकास हुए थे। भाजपा ने मेवात के लोगों के साथ भेदभाव किया है। शहर को सरकार ने गंदगी का अड्डा बना दिया है। भाजपा के नेता सोए रहे। मैंने हाल ही इस मामले को फिर विधानसभा में उठाया है। समाधान कराकर छोड़ेंगे। - आफताब अहमद, विधायक नूंह।
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भाजपा सरकार में सीवर लाइन डलवाई है। पानी के लिए हाल ही में 37 किलोमीटर लाइन मंजूर की है। जल भराव को लेकर शहर में नालियों की सफाई कराई जाएगी और भी स्थाई व्यवस्था की जाएगी।
- जाहिद हुसैन, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजपा।
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जिला बनने के बाद 19 वर्ष बीत जाने के बाद भी जल निकासी के नहीं हुए पुख्ता इंतजाम
शेरसिंह डागर
नूंह। शहर नूंह में पिछले एक दशक से जलभराव की समस्या बनी हुई है। हर साल बारिश में ये समस्या और विकराल होती है लेकिन, शहर में अभी भी जगह-जगह ये समस्या बरकरार है। प्रशासन की अनदेखी का यह आलम तब है जब यह मामला विधानसभा में हर बार उठाया जाता है। वहीं, इस बार भी स्थानीय विधायक आफताब अहमद ने विधानसभा में इस मामले के समाधान की मांग की। जलभराव के लिए प्रशासनिक स्तर पर ऐसी योजना नहीं बनी है, जिससे 35 हजार लोगों को जलभराव की समस्या से निजात मिले सके। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा सबसे ज्यादा जल भराव सरकारी कार्यालयों के सामने होता है। वर्षा के माैसम में चार माह तक आम लोग दुखी रहते हैं।
बता दें कि नूंह जिला 2005 में अस्तित्व में आया था। 19 वर्ष बीत जाने के बाद भी शहर की सूरत प्रशासन संवारने में नाकाम रहा है। हालांकि यहां पर प्रशासनिक स्तर पर लघु सचिवालय व जिला अदालत के लिए भवन के निर्माण हो चुके हैं। बावजूद इसके अभी भी दर्जनों कार्यालय लघु सचिवालय से अलग भवन में चल रहें हैं। अलग-अलग विभागों के इन कार्यालयों में जलभराव की समस्या आम बात हो गई है। शहर के पुराने विश्राम गृह व लोक निर्माण विभाग के कार्यालय के सामने बारिश के मौसम में कई-कई फीट पानी भर जाता है। पानी के कारण यहां से लोगों का निकलना दूभर हो जाता है। इसके अलावा बिजली बोर्ड कार्यालय व 66 केवी सब स्टेशन में नाममात्र वर्षा में जलभराव हो जाता है। इसके कारण लोगों को बिजली से संबंधित कार्यों को पूरा कराने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी तरफ से रेडक्रॉस कार्यालय, महिला थाना व कृषि विभाग के कार्यालय के सामने कई-कई फीट पानी भर जाता है। पानी की निकासी नहीं होने के कारण यहां पर आने वाले कर्मचारियों व आम लोगों को पानी से निकलना पड़ता है। अनाज मंडी के द्वार पर बने साइबर थाने के समीप वर्षा से जलभराव हो जाता है। यहां पर लोगों को परेशानी होती है। अनाज मंडी में बने मंडी के कार्यालय पर भी कमोबेश यही समस्या रहती है। बस अड्डे के सामने जलभराव इतना होता है कि यहां पर कई दिन तक पानी जमा रहता है। बस डिपो केंद्र पर वर्षा के मौसम में जल राव के कारण बसें पानी में खड़ी रहती हैं। इसके कारण बसों के खराब होने का अंदेशा बना रहता है।
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शहर में भी होता है जलभराव
जिले के सरकारी कार्यालयों के अलावा शहर के कब्रिस्तान, वार्ड नंबर दो, तीन, 12, 13 की गलियों में पानी की निकासी नहीं होने के कारण जल भराव से वर्षा के माैसम में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य बाजार व नंगली चौक पर कई-कई फीट पानी दुकानों के सामने भर जाता है। इससे दुकानदार व ग्राहकों को वर्षा के माैसम में चार माह जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है लेकिन, प्लॉट व कई सड़कों पर पानी है। इससे मच्छर पनप रहे हैं और बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कभी प्रशासनिक स्तर पर व जनप्रतिनिधियों ने शहर की जलभराव की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए व्यापक योजना तैयार नहीं की।
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शहर में जलभराव की समस्या वर्षों से चली आ रही है। लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं ढूंढा गया है। लोग परेशान रहते हैं। प्रशासन के अधिकारियों को कोई चिंता नहीं। - खलील अहमद, वरिष्ठ वकील नूंह।
शहर की गलियों में पानी जमा रहता है। निकासी की व्यवस्था नहीं होने से लोग वर्षा के मौसम में और ज्यादा परेशान रहते हैं। - मकसूद अहमद, नूंह।
नूंह को जिला बने काफी समय बीत गया है, लेकिन इसके उद्धार के लिए कोई योजना विकास की ठीक ढंंग से नहीं से बनी, जिसका नुकसान लोगों को होता है- सतपाल सिंगला, समाजसेवी।
सरकार हर वर्ष विकास के नाम पर कराेड़ों रुपये खर्च करती है लेकिन, शहर का विकास अभी भी नहीं हुआ। चुनाव में नेता विकास की बात तो करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद विकास कराना भूल जाते हैं।
पिछले दस वर्षों में भाजपा की सरकार रही है। यहां पर विकास के नाम कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस के राज में जरूर विकास हुए थे। भाजपा ने मेवात के लोगों के साथ भेदभाव किया है। शहर को सरकार ने गंदगी का अड्डा बना दिया है। भाजपा के नेता सोए रहे। मैंने हाल ही इस मामले को फिर विधानसभा में उठाया है। समाधान कराकर छोड़ेंगे। - आफताब अहमद, विधायक नूंह।
भाजपा सरकार में सीवर लाइन डलवाई है। पानी के लिए हाल ही में 37 किलोमीटर लाइन मंजूर की है। जल भराव को लेकर शहर में नालियों की सफाई कराई जाएगी और भी स्थाई व्यवस्था की जाएगी।
- जाहिद हुसैन, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजपा।