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ऑक्सीजन न बेड, एंबुलेंस भी नहीं मिल रही, पत्थर की स्लैब पर हो रहा इलाज
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गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण से पीड़ित मरीजों की दिन-ब-दिन मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ऑक्सीजन न होने के कारण अस्पतालों ने नए मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर दिया है, जबकि तीमारदारों का भर्ती करने के लिए दबाव बना हुआ है। मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं हैं। जो भी एंबुलेंस मिल रही है, वह कई गुने दाम ले रही है।
ऑक्सीजन की कमी पर निगम कमिश्नर के आवास पर किया प्रदर्शन
कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण बुधवार सुबह मरीजों के परिजनों में अफरातफरी मच गई। सिविल लाइन स्थित पुष्पांजलि अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा ऑक्सीजन खत्म होने के कारण उन्हें डिस्चार्ज के लिए कह दिया गया। इतना सुनकर मरीजों के तीमारदार पास में ही निगम कमिश्नर आवास के सामने प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान उन्होंने निगम कमिश्नर विनय प्रताप सिंह से मिलने की जिद की तो कुछ ही देर बाद ऑक्सीजन गैस की सप्लाई पुष्पांजलि अस्पताल में पहुंचा दी गई। इसके अलावा तीर्थराम अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर समस्या हुई। इसकी जानकारी मरीजों के परिजनों ने सोशल मीडिया पर भी दी। वहीं पुष्पांजलि के निदेशक डॉ. एसपी यादव ने कहा कि वे सुबह शाम अपने ऑक्सीजन स्टॉक व जीवन रक्षक उपकरणों का जायजा लेते हैं। उसी समय यह भी कह दिया जाता है कि जो भी मरीज डिस्चार्ज होना चाहते हैं या फिर दूसरे अस्पताल में रेफर करवाना चाहते हैं तो करवा लें। बुधवार सुबह भी मरीजों के परिजनों को बताया गया था कि उनके पास ऑक्सीजन के मात्र 9 सिलिंडर बचे हैं, लेकिन किसी व्यक्ति ने मरीजों के परिजनों को भड़का दिया।
शव ले जाने को एंबुलेंस नहीं मिली तो निजी वाहन से ले गए
सेक्टर-10 स्थित सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार को जिला झज्जर निवासी रमेश को परिजनों ने उपचार के भर्ती कराया था। देर रात हालत बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई। बुधवार सुबह से परिजन शव को ले जाने के लिए अस्पताल कर्मियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन अस्पताल की ओर से केवल एंबुलेंस सुविधा शहर मेें देने की बात कहकर टकरा दिया गया। परिजन प्राइवेट एंबुलेंस से बात करने लगे तो उनके द्वारा 20 हजार रुपये की मांग की गई, जिस पर परिजन बेबस होकर अपने निजी वाहन से शव को लेकर इज्जर निकल गए।
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श्मशान घाट पर पीपीई किट का ढेर, संक्रमण फैलने का डर
मदनपुरी स्थित रामबाग श्मशान घाट पर गंदगी का आलम है। वहां पर सफाई नहीं हो रही है और न ही वहां पड़ी पीपीई किट का निस्तारण किया जा रहा है, जिसके कारण संक्रमित पीपीई किट का ढेर लगा हुआ है। इस कारण श्मशान घाट में आने वाले लोगों के बीच कोरोना फैलने का खतरा पैदा होने लगा है। जो लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने आते हैं, वह पीपीई किट को खुले में फेंक कर चले जाते हैं।
प्लीज डॉक्टर साहब...मेरे पति को भर्ती कर लो, नहीं तो मर जाएंगे
प्लीज डॉक्टर साहब.....मेरे पति को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कर लो, नहीं तो वह मर जाएंगे। उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। यह गुहार गांव कासन के रहने वाले मिथलेश की पत्नी ने बुधवार को नागरिक अस्पताल में तैनात डॉक्टर से लगाई। काफी देर तक गुहार लगाने के बाद डॉक्टर का दिल पसीजा और पत्थर की स्लैब पर कोरोना संक्रमित मिथलेश को ऑक्सीजन लगाकर उपचार शुरू किया। ऐसे ही हालात इन दिनों नागरिक अस्पताल में देखने को मिल रहे हैं। जहां पर रोजाना तीमारदार अपने मरीजों को लेकर पहुंच रहे हैं और उनको भर्ती कराने के लिए डॉक्टर से लेकर अपने यहां के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही है।दूसरी ओर मेडिकल स्टाफ भी अपनी मजबूरी बता रहा है। स्टाफ का कहना है कि मरीजों की भरमार है लेकिन यहां पर मात्र 10 बेड हैं। हालात यह हैं कि एक बिस्तर पर दो-दो मरीजों का इलाज हो रहा है। इस दशा में आने वाले मरीजों का अस्पताल कर्मियों के सामने स्ट्रैचर और पत्थर की स्लैब पर लिटाकर ही उपचार करने का एक मात्र विकल्प है, जबकि कई मरीज तो इलाज के लिए अस्पताल आने तक दम तोड़ देते हैं।
मां को रेफर करने की वजह पूछता रहा बेटा
यूपी के आजमगढ़ की रहने वाले महिला लता को दोपहर 12 बजे डॉक्टरों ने जांच के बाद रोहतक रेफर कर दिया। इस दौरान लता का बेटा मां को रेफर करने की वजह पूछता रह गया, लेकिन अस्पताल कर्मियों ने आपाधापी में निजी एंबुलेंस से उनको रोहतक भेज दिया।
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ऑक्सीजन की कमी पर निगम कमिश्नर के आवास पर किया प्रदर्शन
कई अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के कारण बुधवार सुबह मरीजों के परिजनों में अफरातफरी मच गई। सिविल लाइन स्थित पुष्पांजलि अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा ऑक्सीजन खत्म होने के कारण उन्हें डिस्चार्ज के लिए कह दिया गया। इतना सुनकर मरीजों के तीमारदार पास में ही निगम कमिश्नर आवास के सामने प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान उन्होंने निगम कमिश्नर विनय प्रताप सिंह से मिलने की जिद की तो कुछ ही देर बाद ऑक्सीजन गैस की सप्लाई पुष्पांजलि अस्पताल में पहुंचा दी गई। इसके अलावा तीर्थराम अस्पताल में भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर समस्या हुई। इसकी जानकारी मरीजों के परिजनों ने सोशल मीडिया पर भी दी। वहीं पुष्पांजलि के निदेशक डॉ. एसपी यादव ने कहा कि वे सुबह शाम अपने ऑक्सीजन स्टॉक व जीवन रक्षक उपकरणों का जायजा लेते हैं। उसी समय यह भी कह दिया जाता है कि जो भी मरीज डिस्चार्ज होना चाहते हैं या फिर दूसरे अस्पताल में रेफर करवाना चाहते हैं तो करवा लें। बुधवार सुबह भी मरीजों के परिजनों को बताया गया था कि उनके पास ऑक्सीजन के मात्र 9 सिलिंडर बचे हैं, लेकिन किसी व्यक्ति ने मरीजों के परिजनों को भड़का दिया।
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शव ले जाने को एंबुलेंस नहीं मिली तो निजी वाहन से ले गए
सेक्टर-10 स्थित सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार को जिला झज्जर निवासी रमेश को परिजनों ने उपचार के भर्ती कराया था। देर रात हालत बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई। बुधवार सुबह से परिजन शव को ले जाने के लिए अस्पताल कर्मियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन अस्पताल की ओर से केवल एंबुलेंस सुविधा शहर मेें देने की बात कहकर टकरा दिया गया। परिजन प्राइवेट एंबुलेंस से बात करने लगे तो उनके द्वारा 20 हजार रुपये की मांग की गई, जिस पर परिजन बेबस होकर अपने निजी वाहन से शव को लेकर इज्जर निकल गए।
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श्मशान घाट पर पीपीई किट का ढेर, संक्रमण फैलने का डर
मदनपुरी स्थित रामबाग श्मशान घाट पर गंदगी का आलम है। वहां पर सफाई नहीं हो रही है और न ही वहां पड़ी पीपीई किट का निस्तारण किया जा रहा है, जिसके कारण संक्रमित पीपीई किट का ढेर लगा हुआ है। इस कारण श्मशान घाट में आने वाले लोगों के बीच कोरोना फैलने का खतरा पैदा होने लगा है। जो लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने आते हैं, वह पीपीई किट को खुले में फेंक कर चले जाते हैं।
प्लीज डॉक्टर साहब...मेरे पति को भर्ती कर लो, नहीं तो मर जाएंगे
प्लीज डॉक्टर साहब.....मेरे पति को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कर लो, नहीं तो वह मर जाएंगे। उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। यह गुहार गांव कासन के रहने वाले मिथलेश की पत्नी ने बुधवार को नागरिक अस्पताल में तैनात डॉक्टर से लगाई। काफी देर तक गुहार लगाने के बाद डॉक्टर का दिल पसीजा और पत्थर की स्लैब पर कोरोना संक्रमित मिथलेश को ऑक्सीजन लगाकर उपचार शुरू किया। ऐसे ही हालात इन दिनों नागरिक अस्पताल में देखने को मिल रहे हैं। जहां पर रोजाना तीमारदार अपने मरीजों को लेकर पहुंच रहे हैं और उनको भर्ती कराने के लिए डॉक्टर से लेकर अपने यहां के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही है।दूसरी ओर मेडिकल स्टाफ भी अपनी मजबूरी बता रहा है। स्टाफ का कहना है कि मरीजों की भरमार है लेकिन यहां पर मात्र 10 बेड हैं। हालात यह हैं कि एक बिस्तर पर दो-दो मरीजों का इलाज हो रहा है। इस दशा में आने वाले मरीजों का अस्पताल कर्मियों के सामने स्ट्रैचर और पत्थर की स्लैब पर लिटाकर ही उपचार करने का एक मात्र विकल्प है, जबकि कई मरीज तो इलाज के लिए अस्पताल आने तक दम तोड़ देते हैं।
मां को रेफर करने की वजह पूछता रहा बेटा
यूपी के आजमगढ़ की रहने वाले महिला लता को दोपहर 12 बजे डॉक्टरों ने जांच के बाद रोहतक रेफर कर दिया। इस दौरान लता का बेटा मां को रेफर करने की वजह पूछता रह गया, लेकिन अस्पताल कर्मियों ने आपाधापी में निजी एंबुलेंस से उनको रोहतक भेज दिया।